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2010 फिल्म का पोस्टर
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यह कोई फिल्मी कथा नहीं है जैसी कि 2010 नामक फिल्म में दिखाई गई थी. इस फिल्म में हाल 9000 नामक एक कम्प्यूटर सिस्टम होता है जो इंसानों के साथ संबंध बनाकर रखता है और उनसे सीखता है. वह तो फिल्मी कहानी थी लेकिन ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के संशोधक इस कल्पना को हकीकत में बदलने की कोशिश कर रहे हैं.
उनका विचार यह है – एक ऐसा कम्प्यूटर सिस्टम बनाना जो लगातार सीख सके, आसपास के लोगों से निर्देश ले सके और यह जान सके कि वह क्या सही कर रहा है और क्या गलत. यही नहीं, इससे भी आगे बढ कर वह जान सके कि यदि वह गलत कर रहा है तो क्यों.
आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस की सीमा को भी तोड़कर यह एक नए जमाने का सुपर कम्प्यूटर होगा जो इंसान से उसी की भाषा में बात करेगा और बिल्कुल वैसा ही व्यवहार करेगा जैसा कोई अन्य इंसान कर सकता है.
यह कम्प्यूटर खुद अपनी गलतियों से सीखेगा और उनमें सुधार करेगा. इस प्रोजेक्ट से जुड़ी मार्गरेट बर्नेट के अनुसार, यह कम्प्यूटर लोगों से बात करेगा, अपनी गलतियाँ पहचानेगा और अपनी प्रोग्रामिंग में लगातार बदलाव करेगा. इससे वह लगातार उन्नत होगा.
यह बिल्कुल इंसानों के व्यवहार की तरह है. हम अपने जीवन में कितनी ही नहीं बातें सीखते है. हमें अच्छे और बुरे का अहसास इंसानों के द्वारा ही करवाया जाता है. हमें हमारी गलती लोगों से ही पता चलती है और हम उन्हें समझ कर सुधार लेते हैं. अब यही काम मशीन अपने लिए करेगी.
इस मशीन को बनाने में जुटी टीम के लिए दो चुनौतियाँ हैं. पहली – एक ऐसा सिस्टम बनाना जो इंसानों से बात कर उस हिसाब से अपने आप को सुधार सके. और दूसरी जो कि अधिक जटिल है – सही और गलत कि पहचान कर सके, ताकि कोई विघ्न संतोषी इंसान गलत जानकारियाँ देकर सिस्टम बिगाड़ ना दे.
लेकिन यह टीम जुटी हुई है और उनका दावा है कि एक दिन ऐसा सिस्टम बन जाएगा जो सही मायनों में इंसान का साथी, उसका हमदर्द होगा.