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| ये कम्पनियाँ आपके और हमारे जैसे लाखों-करोड़ों वेब उपयोगकर्ताओं पर नज़र रखकर एक डेटाबेस तैयार करती है
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यह “कोई” है इंटरनेट ट्रेकिंग कम्पनियों द्वारा आपके पीसी में संग्रहित की गई कूकीज़. ये कम्पनियाँ आपके इंटरनेट व्यवहार पर नज़र रखती हैं. आपने कौन सी साइट खोली, आप किस तरह के समाचार पढते हैं, आप कौन कौन सी स्वास्थ्य संबंधी साइटों पर जाते हैं आदि. ये सब जानकारियाँ उन कम्पनियों तक जाती है जो विभिन्न उत्पाद तैयार करती हैं. ये कम्पनियाँ आपके और हमारे जैसे लाखों-करोड़ों वेब उपयोगकर्ताओं पर नज़र रखकर एक डेटाबेस तैयार करती है.
अब सवाल यह उठता है कि इन ट्रेकिंग कम्पनियों तक प्रयोक्ताओं की जानकारी कौन पहुँचाता है. इसका जवाब है सोश्यल नेटवर्किंग साइटे.
वोर्सेस्टर पोलिटेक्निक इंस्टिट्यूट के अनुसार इसकी बहुत सम्भावना है कि सोश्यल नेटवर्किंग साइटें अपने प्रयोक्ताओं की निजी जानकारियाँ ट्रेकिंग कम्पनियों को उपलब्ध करवाती हैं.
इसकी मदद से ट्रेकिंग कम्पनियाँ कुछ चुने हुए लोगों के इंटरनेट आचार व्यवहार पर नजर रख पाती हैं.
WPI के कम्प्यूटर साइंस प्रोफेसर क्रैग विल्स के अनुसार, “जब हम सोश्यल नेटवर्किंग साइट पर पंजीकरण करते हैं तो हमें एक विशेष पहचान कोड मिलता है. यह पहचान कोड कुछ अंकों या अक्षरों से बना होता है. हमने पता लगाया है कि सोश्यल नेटवर्किंग साइटें ये कोड ट्रेकिंग साइटों को उपलब्ध करवा देते हैं. इससे प्रयोक्ता की निजी जानकारी जैसे कि नाम, पता, उम्र, जन्म तिथि, कार्यक्षैत्र आदि ट्रेकिंग कम्पनियों को प्राप्त हो जाती है.
उसके बाद उनके द्वारा स्थापित कूकी आपके इंटरनेट व्यवहार की जानकारी उन ट्रेकिंग कम्पनियों को पहुँचा देते है, जहाँ आपके नाम से वह संग्रहित होती रहती है. इससे उनके पास व्यक्ति आधारित डेटाबेस तैयार हो जाता है, जिसका उपयोग का दुर्रपयोग कोई भी कम्पनी कर सकती है.