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| स्तनधारी प्राणी विशेष होते हैं और उन्होने मगरमच्छ जैसे प्राणियों को उत्क्रांति की दौड़ में आसानी से हराया है
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एक नई शोध के अनुसार उत्क्रांति की दौड़ में स्तनधारी जानवर, मछलियाँ और पक्षी जीत गए हैं और मगरमच्छ और घड़ियाल जैसे सरिश्रृप हार गए हैं, और इसके पीछे की वजह यह है कि मगरमच्छ जैसी जीव अन्य जीवों की तरह अपनी उपजातियाँ उत्पन्न करने में असफल रहे हैं.
यूनिवर्सिटी ओफ कैलिफोर्निया के माइकल एल्फारो – जिनके नैतृत्व में यह शोध की गई – का कहना है कि, “स्तनधारी प्राणी विशेष होते हैं और उन्होने मगरमच्छ जैसे प्राणियों को उत्क्रांति की दौड़ में आसानी से हराया है.”
एल्फारो की टीम ने 47 प्रकार के जिवाष्मों का कम्प्यूटेशन तरीके से अभ्यास कर यह पता लगाया कि इनमें उपजातियाँ बनाने की क्षमता कितनी थी. इस शोध से पता चला कि जो आधुनिक पक्षी उत्क्रांति की दौड़ में विजेता बने हैं वे हैं – सोंगबर्ड, तोता, कबूतर, चील, हमिंगबर्ड आदि. इन पक्षियों ने उत्क्रांति के दौर में अपने-अपनी असंख्य उपजातियाँ बनाई और आज इनकी संख्या काफी अधिक है.
उसी तरह से लगभग सभी स्तनधारी जीव – कंगारू जैसे कुछ जीवों को छोड़ कर - भी अपने 11 करोड़ वर्ष के जीवनचक्र में अपनी असंख्य उपजातियाँ बनाने में कामयाब रहे हैं.
लेकिन यह बात मगरमच्छों पर लागू नहीं होती. हालाँकि वे इस दुनिया में 25 करोड़ वर्षों से मौजूद हैं लेकिन इतने लम्बे समयकाल में भी उनकी मात्र 23 उपजातियाँ ही विकसित हुई जो कि अनुमान से 1000 गुना धीमी रफ्तार है. इसी कुल के एक जीव है तुआतारा जो न्यूज़ीलैंड में पाई जाती है और छिपकलियों से मिलती जुलती है. इस जीव की मात्र दो उपजातियाँ हैं जबकि साँप और छिपकलियों की 8000 से अधिक उपजातियाँ हैं.
कहा यह जाता है कि यदि जीवसृष्टि अपनी उपजातियों का तेजी से विस्तार ना करे तो उसके विलुप्त होने का खतरा बढ जाता है. मगरमच्छ जैसे जीव अपनी उपजातियों का विस्तार करने में असफल रहे लेकिन फिर भी वे विलुप्त होने से बच गए. ऐसा क्यों हुआ यह अभी भी एक पहेली है.