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| 2 सितम्बर को यूनिवर्सिटी ओफ केलिफोर्निया में दो कम्प्यूटरों को एक 15 फूट के तार से जोड़ा गया और अर्पानेट का टेस्ट किया गया
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आज जिसके बिना जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है वह है इंटरनेट. WWW के बीना जिंदगी की कल्पना करना मुश्किल है क्योंकि आज करोड़ों लोग, लाखों उद्योग, हजारों संस्थान और सैंकड़ों देश इस व्यवस्था से जुड़े हुए हैं.
2 सितम्बर 1969 को कोई 20 लोगों द्वारा पहली बार एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक छोटा सा संदेश पहुँचाया गया. यह इंटरनेट की शुरूआत थी.
इंटरनेट की गाथा:
1969: 2 सितम्बर को यूनिवर्सिटी ओफ केलिफोर्निया में दो कम्प्यूटरों को एक 15 फूट के तार से जोड़ा गया और
अर्पानेट का टेस्ट किया गया. परीक्षण सफल रहा. इसके बाद 29 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया से एक संदेश स्टानफोर्ड रिसर्च इंस्टिट्यूट तक भेजा गया. यह परीक्षण आंशिक सफल रहा क्योंकि पूरा सिस्टम मात्र दो शब्द “log on’ भेज कर क्रेश हो गया.
1972: रे टोमलिंसन ने ईमेल व्यवस्था की खोज की. इसके माध्यम से एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क तक निजी संदेश भेजे जा सकते थे. टोमलिंसन ने “@” चिह्न लगाकर सबके लिए अलग आईडी बनाई.
1973: अर्पानेट वैश्विक हुआ. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंडन और नोर्वे के रोयल रडार एस्टबलिशमेंट इसके नेटवर्क से जुड़े.
1974: विंसेंट सर्फ और बॉब कान ने TCP की खोज की जिससे कि अनेकों नेटवर्क एक साथ एक दूसरे से जुड़ सकें. यह इंटरनेट की वास्तविक शुरूआत थी. इसके बाद TCP/IP अस्तित्व में आया.
1976: यूनिक्स का जन्म हुआ. रानी एलिजाबेथ ने अपना पहला ईमेल भेजा.
1083: डुमेन नेम व्यवस्था की शुरूआत हुई. “.com”, ‘.gov”, “.edu” जैसे डुमेन नामों पर विचार किया गया.
1985: Symbolics.com दुनिया का पहला पंजीकृत डुमेन बना
1987: ज़ेरोक्स के जो बैकर और एप्पल मार्क डेविस ने यूनिवर्सल करेक्टर सेट यानी
यूनिकोड की सम्भावनाएँ तलाशना शुरू किया. आज हम प्रादेशिक भाषाओं की अंसख्य साइटें देख रहे हैं. यह यूनिकोड की आभारी हैं.
1988: मोरिस नामक पहले कम्प्यूटर वॉर्म ने हजारों कम्प्यूटर सिस्टमों को बिठा दिया.
1989: क्वांटम कम्प्यूटर सर्विस [अब AOL] ने एप्पल कम्प्यूटरों के अमेरिकन ओनलाइन सिस्टम की शुरूआत की. यह सोश्यल नेटवर्किंग की शुरूआत थी.
1990: टीम बर्नर ली ने WWW यानी कि World Wide Web की रूपरेखा तैयार की. इससे दुनिया भर के कम्प्यूटर सिस्टम एक दूसरे के साथ जुड़ जाने थे.
1993: मार्क एंडरसीन और उनके दोस्तों ने यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस में दुनिया का पहला वेब ब्राउजर बनाया. यह चित्रों और अक्षरों को एक ही स्थान पर दिखाता था. इससे इंटरनेट का इस्तेमाल करना सरल हो गया. इस वेब ब्राउजर का नाम था –
मोज़ेक .
1994: एंडरसीन और कुछ अन्य लोगों ने मिलकर एक कम्पनी खोली जो दुनिया का पहला व्यवसायिक वेब ब्राउज़र बनाने वाली थी. इस ब्राउज़र का नाम रखा गया –
नेटस्केप . नेटस्केप की अपार सफलता ने माइक्रोसोफ्ट को “इंटरनेट एक्सप्लोरर” बनाने के लिए प्रेरित किया.
1995: एमेज़न.कॉम के साथ वर्चुअल शोपिंग की शुरूआत हुई.
1996: अमेरिका में ओनलाइन पोर्नोग्राफी के खिलाफ कानून बने और उन्हें अनेकों चुनौतियाँ भी मिली.
1997: जोर्न बार्गर ने "वेबलॉग" शब्द को प्रचलित किया. भविष्य में ब्लॉगिंग एक सशक्त माध्यम बनने जा रहा था.
1998: स्टानफोर्ड विश्वविद्यालय के कमरों में
गूगल ने जन्म लिया. अमेरिका की सरकार ने डुमेन नामों के व्यवस्थापन के लिए
Internet
Corporation for Assigned Names and Numbers यानी आईकैन की स्थापना की.
2000: डॉट कॉम धमाका हुआ. ढेर सारी वेबसाइटें आई. अमेज़न.क़ॉम और ईबे आदि साइटों ने पहली बार डिनायन ऑफ सर्विस अटैक का सामना किया. इसके तहत ढेर सारी क्वेरी भेज किसी भी साइट को बिठा दिया जाता है [कुछ दिन पहले ट्विटर के साथ भी ऐसा ही हुआ था]
2002: दुनिया की इंटरनेट आबादी 50 करोड़ तक पहुँची
2004: मोज़िला ने
फायरफोक्स ब्राउज़र मैदान में उतारा और इंटरनेट एक्सप्लोरर को पहली बार चुनौती मिली. इसी वर्ष फेसबुक लॉंच हुआ जिसने सोश्यल नेटवर्किंग की परिभाषा बदल दी.
2006: दुनिया की इंटरनेट आबादी 1 अरब तक पहुँची.
ट्विटर.कॉम लाँच हुआ जिसने माइक्रोब्लॉगिंग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया.
2008: चीन ने इंटरनेट प्रयोक्ताओं की आबादी के लिहाज से अमेरिका को पीछे छोड़ दिया.