|
नैत्रहीन व्यक्ति देख सकेंगे! जीभ बनेगी आँख |
|
तकनीक
|
|
गुरुवार , , 03 सितम्बर |
|
| मात्र 20 घंटों के प्रशिक्षण के बाद कोई भी नैत्रहीन व्यक्ति आकारों को समझने लगता है
|
जीभ भी आँख का काम कर सकती है! सुनने में यह अविश्वसनीय लगता है परंतु वैज्ञानिकों ने यह करिश्मा कर दिखाया है. वैज्ञानिकों ने एक नया डिवाइज़ बनाया है जिसका नाम है ब्रैनपोर्ट. इस डिवाइज की मदद से नैत्रहीन व्यक्ति भी देख सकेंगे.
कैसे काम करता है यह डिवाइज:
इस डिवाइज के साथ एक छोटा सा कैमरा तथा एक सनग्लास आता है. नैत्रहीन व्यक्ति सनग्लास पहन लेता है जिस पर लगा कैमरा सामने के दृश्यों की तस्वीरें लेने लगता है. ये तस्वीरें हाथ में उठाए जा सकने वाले मोबाइल आकार के एक डिवाइज़ तक भेजी जाती है, जो इन तस्वीरों को इलैक्ट्रिकल पल्स यानी कम्पन में बदल देता है. इसके बाद ये पल्स उस व्यक्ति की जीब पर लगाए गए एक लोलीपोप जैसे डिवाइज तक भेजे जाते हैं, जहाँ से ये संदेश उस व्यक्ति के दिमाग तक पहुँच जाते हैं.
मात्र 20 घंटों के प्रशिक्षण के बाद कोई भी नैत्रहीन व्यक्ति आकारों को समझने लगता है, यहाँ तक कि वे रास्तों पर लगाए गए साइनबोर्डो को भी पढ लेता है.
कैमरे के द्वारा खींची गई तस्वीरें एक मोबाइल डिवाइज़ के माध्यम से इलैक्ट्रिकल पल्स में बदल जाती है और ये पल्स व्यक्ति की जीभ पर रखे डिवाइज तक जाती है. जीभ पर रखे गए डिवाइज मे करीब 600 इलैक्ट्रोड होते हैं जो दृश्य में मौजूद स्पष्टता के अनुसार कम या अधिक कम्पन तैयार करते हैं और इससे एक चित्र जैसा बन जाता है.
लाइटहाउस इंटरनेशनल जो कि इस सिस्टम का परीक्षण कर रहा है – से जुड़े विलीयम सिपले ने ऑस्ट्रेलिया के एक अखबार को बताया कि,”शुरू में तो हम आश्चर्यचकित थे कि यह डिवाइज क्या काम कर सकता है. एक व्यक्ति ने इसे पहना और जब उसे दिखाई देने लगा तो वह रो ही पड़ा”.
यह डिवाइज अभी परीक्षण की अवस्था में है, लेकिन वह दिन अब दूर नहीं जब नैत्रहीन व्यक्ति भी काम चलाऊ ही सही लेकिन कम से कम हलन चलन में सहायक हो सके इतना देख पाएंगे.
|
|