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प्यार रचनात्मकता बढाता है, सेक्स तार्किकता |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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शुक्रवार , , 04 सितम्बर |
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| शोध ने साबित किया है कि लोग दो तरह से सोचते हैं – या तो वे जंगल पर ध्यान केन्द्रीत करेंगे या फिर पेड़ों पर
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प्यार में पागल व्यक्ति रचनात्मक हो जाता है लेकिन सेक्स में लिप्त व्यक्ति रचनात्मक तो नहीं होता लेकिन उसकी तार्किक शक्ति बढ जाती है.
एक नई शोध से यही बात सामने आई है. कुछ डच समीक्षकों ने एक प्रयोग कर यह पता लगाने का प्रयास किया कि अलग अलग भावनाओं का मनुष्य की रचनात्मकता और क्रियाशिलता पर क्या असर पड़ता है. इन समीक्षकों ने विद्यार्थियों के कुछ दलों को अलग अलग कार्य दिए.
एक दल को कहा गया कि वे अपने प्रेमी के साथ घूम रहे हैं ऐसा सोचें और दूसरे दल को कहा गया कि वे ऐसा सोचें कि वे किसी विपरित लिंग के व्यक्ति के साथ एक रात का आनंद उठा रहे हैं. इसके बाद उन्हें कुछ रचनात्मक कार्य और कुछ ऐसे कार्य दिए गए जो तर्कसंगत थे.
जिस समूह को प्यार की बातें सोचने को कहा गया था उन्होनें रचनात्मक कार्यों को काफी अच्छी तरह से अंजाम दिया लेकिन जो दल सेक्स के बारे में सोच रहा था वह रचनात्मक कार्य ढंग से नहीं कर पाया. लेकिन तार्किक कार्यों का मामला ऊल्टा रहा. उसमें सेक्स की बातें सोच रहे दल ने बाजी मार ली.
इस शोध से जुड़ॆ एक समीक्षक का मानना है कि उनकी शोध ने साबित किया है कि लोग दो तरह से सोचते हैं – या तो वे जंगल पर ध्यान केन्द्रीत करेंगे या फिर पेड़ों पर.
प्यार में पागल व्यक्ति लम्बे समय का लक्ष्य देखता है और इस वजह से रचनात्मक होता है. लेकिन सेक्स में लिप्त व्यक्ति कम समय का सुख देखता है और रचनात्मक नहीं रह पाता लेकिन वह अधिक तार्किक होता है.
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