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7 चिकित्सा क्षैत्र की "प्रथम’ बातें |
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शानदार 7
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बुधवार , , 09 सितम्बर |
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आज चिकित्सा क्षैत्र में आई क्रांति और नई नई खोजों की वजह से इंसानों की मृत्युदर काफी कम हो गई है. कुछेक बिमारियों को छोड़ दें तो आज लगभग हर बिमारी का इलाज सम्भव है, वहीं कई नई-नई बिमारियाँ भी उत्पन्न हो रही है जो संशोधकों को व्यस्त रखती हैं. बहरहाल आइए जानें 7 ऐसी बातें जो चिकित्सा जगत मे “पहली” बार हुई.
पहली “एड्स” मौत
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इस बारे में पुख़्ता जानकारी तो उपलब्ध नहीं है परंतु एचआईवी से ग्रस्त पहला इंसान कोंगो देश का निवासी था जिसकी मृत्यु इसी इंफेक्शन से हुई थी. उसकी मौत के बाद की गई खून की जाँच से पता चला था कि उसे एचआईवी इंफेक्शन था. यह 1959 की बात है. लेकिन कई चिकित्सक इसे सही नहीं मानते. उनका तर्क है कि उस इंसान के 6 जीन में से मात्र दो में ही एड्स के वाइरस पाए गए थे. इसलिए पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि वही एड्स का प्रथम शिकार था.
इसके बाद न्यूयार्क के एक 49 वर्ष के क्लर्क की न्यूमोसाइटिस कैरिनी न्यूमोनिया नामक रोग से मृत्यु हुई. यह रोग एड्स के काफी करीब माना जाता है. चिकित्सक मानते हैं कि इसकी काफी सम्भावना है कि उस व्यक्ति को एड्स था.
[कड़ी]
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प्रथम “स्वाइन फ्लू” का मरीज
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मैक्सिको के ला ग्लोरिया का एक 4 साल का लड़का एज़र हर्नांडेज़ जिसे “निनो सेरो” [छोटा बच्चा ज़ीरो] कहा जाता है. यह लड़का दुनिया में स्वाइन फ्लू [2009 के नए केसों] का शिकार हुआ प्रथम मरीज माना जाता है. लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
अब इस लड़के की एक प्रतिमा मैक्सिको के ला ग्लोरिया शहर में लगाई गई है, जो इस बिमारी के वाइरस एच1एन1 पर विजय की प्रतीक है. मैक्सिको में इस बिमारी की शुरूआत हुई थी और मैक्सिको के करीब 19000 लोग इस बिमारी से ग्रसित हुए हैं.
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प्रथम यकृत [लीवर] प्रत्यारोपण
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यकृत प्रत्यारोपण का प्रथम सफल ऑपरेशन अमेरिका के डेनवर शहर के डॉ. थोमस स्टार्ज़ ने किया था. यह 1967 की बात है जब इस तरह का प्रत्यारोपण प्रायोगिक स्तर पर ही किया जाता था. स्वयं डॉ. स्टार्ज़ ने इससे पहले कई प्रयोग किए थे लेकिन उनमें सफलता नहीं मिली थी.
1967 में आंशिक सफलता मिली लेकिन फिर भी प्रत्यारोपित यकृत वाले मरीज अधिक दिनों तक जीवित नहीं रह पाते थे. चिकित्सक जानते थे कि उनकी मंजिल अभी काफी दूर है.
[कड़ी]
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प्रथम ‘बाइपास’ सर्जरी
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वह दिन था 2 मई 1960. इस दिन अल्बर्ट आइंस्टाइन कॉलेज ऑफ मेडिसीन – ब्रोंक्स म्यूनिसिपल होस्पिटल सेंटर के डॉ. रोबर्ट गोएट्ज़ , डॉ. माइकल रोहमन और सहायक चिकित्सक डॉ. जोर्डन हैलर और डॉ. रोनाल्ड डी ने प्रथम कोरोनरी आर्टरी बाइपास सर्जरी की थी.
रूस के कार्डिएक सर्जन डॉ. वासिली कोलसोव ने 1964 में प्रथम सफल कोरोनरी आर्टरी एनस्टोमोसिस सर्जरी की थी.
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प्रथम ‘टेस्ट ट्यूब” शिशु
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लूइस जोय ब्राउन दुनिया का पहला “टेस्ट ट्यूब” इंसान है. लूइस का जन्म ब्रिटेन में 25 जुलाई 1978 को हुआ था. यह दुनिया का पहला सफल “टेस्ट ट्यूब” शिशु था. इस जन्म को जहाँ चिकित्सा क्षैत्र की बड़ी उपलब्धि माना गया वहीं कई लोगों ने इस बात पर आपत्ति भी जताई कि भविष्य में इसका दुरपयोग हो सकता है.
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प्रथम टीका
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शिक्षाविद ओले ल्यूंड के अनुसार टीकाकरण के क्षैत्र में प्राचीन चीन निवासियों ने काफी प्रगति की थी और ऐसे साक्ष्य हैं कि 200 बीसी में चीन में टीके का प्रचलन था. इस बात के सबूत भी हैं कि 17वीं शताब्दी के भारत में भी टीके का प्रचलन था. उस जमाने में लोगों को स्मालपोक्स बिमारी से लड़ने के लिए पाउडर के रूप में टीका दिया जाता था.
वैसे प्रथम टीका विकसित करने का श्रेय एडवर्ड जैनर को दिया जाता है जिन्होने 1798 में स्मालपोक्स का टीका बनाया था.
[कड़ी]
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प्रथम सम्पूर्ण चेहरा रीप्लांट [Full Face Replant]
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भारत की संदीप कौर दुनिया की पहली इंसान है जिसका पूरा चेहरा फिर से रीप्लांट किया गया हो. 1994 में 9 साल की संदीप का सिर एक थ्रेशर में आ गया था और उसके चेहरे के दो टुकड़े हो गए थे. उसके अभिभावक उसके चेहरे को प्लास्टिक के बैग में डालकर डॉ. अब्राहम थोमस के पास ले गए. द गार्जियन अखबार के अनुसार डॉ. अब्राहम ने संदीप की सफल शल्य चिकित्सा कर उसके टूटे हुए चेहरे को फिर से जोड़ दिया था.
आज संदीप नर्स का काम करती है.
[कड़ी] << कड़ी में दी गई तस्वीरें विचलित कर सकती है.
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