|
| चीन का दावा है कि भारत ने उसके 90,000 वर्ग किलोमीटर के इलाके पर अवैध कब्जा कर रखा है
|
भारत को किस राष्ट्र से सबसे अधिक खतरा है? यह सवाल उठता तो आपके – हमारे दिमाग में जिस देश की छवि उभरने लगती है वह है पाकिस्तान! जबकि सच्चाई यह है कि पाकिस्तान भारत से चार बार युद्ध हार चुका है, और निकट भविष्य में भी उसके भारत पर हावी होने की कोई सम्भावना नहीं है. लेकिन जो असली खतरा मूहँ बाए खड़ा है उसकी ओर अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा.
चीनी ड्रेगन एक बार फिर उसी तरह की जमावट कर रहा है जैसी उसने 60 के दशक में करनी शुरू की थी. और उसके बाद 1962 के युद्ध में क्या हुआ था यह सब जानते हैं. चीन भारत के अन्य पड़ोसी देशों और वहाँ से भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ रहे आतंकवादी संगठनों को परोक्ष मदद कर जहाँ भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है वहीं उसने भारत के आसपास अपने सैन्य अड्डे बना लिए हैं. पाकिस्तान के ग्वादर और श्रीलंका में चीन निर्मित बंदरगाह तैयार हो रहे हैं और म्यानमार के साथ भी चीन के निकट के संबंध हैं. इस तरह से चीन भारत को लगभग हर तरफ से घेर चुका है.
जहाँ एक और भारत यह आरोप लगाता रहा है कि
चीन ने कश्मीर के उसके 43,180 वर्ग किलोमीटर क्षैत्र पर अपना कब्जा कर रखा है, वहीं चीन का दावा पढिए. चीन का दावा है कि भारत ने उसके 90,000 वर्ग किलोमीटर के इलाके पर अवैध कब्जा कर रखा है, जिसमें अरूणाचल प्रदेश भी शामिल है.
अरूणाचल का तमांग इलाका विशेष रूप से विवादास्पद है जिसे चीन तिब्बत का एक हिस्सा मानता है. भारत जहाँ पहले तिब्बत को चीन के अंदर एक स्वायत्त प्रदेश मानता था, वहीं 2003 को हुए एक समझौते के बाद भारत ने मान लिया कि तिब्बत चीन का ही एक हिस्सा है. बदले में चीन ने सिक्कीम जैसे छोटे से इलाके को भारत का हिस्सा माना, लेकिन अरूणाचल पर उसका दावा कायम है.
चीन मामलों के विशेषज्ञ
गोर्डन चांग के अनुसार चीन भारत को प्रतियोगी मानता है और इसलिए उसे अस्थिर रखना चाहता है. ऐसा उसने 1970 के समय में भी किया था जब उसने पाकिस्तान को परमाणु हथियारों की तकनीक उपलब्ध करवाई थी.
गोर्डन चांग के अनुसार भारतीय नेताओं को चाहिए कि वे चीन का मुकाबला आक्रामकता से करें. चीन जानता है कि अमेरिका अपनी परेशानियों से ही बाहर नहीं आ सकता और इसलिए वह एशियाई क्षैत्र में अपना प्रभुत्व जमाना चाहता है.
कई अन्य
रक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अरूणाचल वास्तव में एक बहाना है. चीन की असली मंशा भारत पर लगाम लगाने की है जो एशियाई क्षैत्र में उसके प्रभुत्व पर लगाम लगाए रखता है. चीन की मंशा अगला अमेरिका बनने की है और भारत उसकी राह की बड़ी बाधा है. कमजोर और घीरा हुआ भारत चीन के पक्ष में जाता है वहीं भारत से उलझ कर चीन अपनी अंदरूनी कमजोरियों को आसानी से छिपा लेता है.
1962 के बाद भारत चीन से पार पाने के लिए कभी उसके मित्र रहे रूस के पाले में गया था, तो चीन ने अमेरिका और पाकिस्तान के साथ मैत्री कर संतुलन कायम किया. रूस द्वारा अफग़ानिस्तान पर हमले से भी भारत और रूस की स्थिति कमज़ोर हुई. और अब चीन पाकिस्तान का सबसे विश्वस्त सहयोगी बन चुका है. कोई आश्चर्य नहीं कि भारत पर पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए हालिया हमलों में बरामद अधिकतर हथियार चीन निर्मित या फिर चीन के सहयोग से बने कारखानों में बने थे.
चीन लम्बे काल की योजना बनाकर चल रहा है. भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह “हिन्दी चीनी भाई भाई” के नेहरू नारे को भूल कर वास्तविकता को पहचाने. भारत जितनी जल्दी इसे समझ लेगा उतना ही बेहतर है.