नेपाल में सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक दुर्गा पूजा से पहले बलि के लिए बकरों की कमी को देखते हुए अधिकारियों से और बकरे ढूँढ़ने के लिए कहा गया है.
अधिकारियों के अनुसार राजधानी काठमांडू में बलि के लिए बकरों की काफ़ी कमी हो गई है.
इस कमी की वजह का तो पता नहीं चला है मगर लोगों का कहना है कि शायद माँग आपूर्ति से ज़्यादा हो गई है.
इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि चीन ने नेपाल में बकरों का निर्यात कम किया है और शायद उसी वजह से क़ीमतें कहीं ज़्यादा हो गई हैं.
नेपाल खाद्य निगम ने अधिकारियों से कहा है कि वे 19 सितंबर को दशाइँ पर्व से पहले गाँवों में जाकर बकरे ख़रीदकर काठमांडू लाएँ.
उस दिन से शुरू हो रहे 15 दिन के पर्व के दौरान देवी दुर्गा को बकरों की बलि दी जाती है.
बकरों के गोश्त की बढ़ती माँग के बाद क़ीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश में एक रेडियो कैंपेन भी शुरू किया गया है, जिसमें किसानों से बकरे बेचने के लिए कहा जा रहा है.
सरकार का विश्वास
नेपाल खाद्य निगम के उप महानिदेशक बिजय थापा ने इस मौक़े पर कहा, "काठमांडू शहर में पर्व के दौरान बकरों की कमी हो जाती है जिससे क़ीमतें बढ़ जाती हैं. हम आपूर्ति ठीक रखने के लिए और बकरे ला रहे हैं जिससे क़ीमतें भी नियंत्रित रहें."
गाँवों में ऐसे विज्ञापन लगाए गए हैं जिनमें बकरे पालने वालों से अपील की गई है कि वे बकरे बेचें.
थापा का कहना था कि काठमांडू में बकरों की क़ीमत 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है, मगर सरकार को उम्मीद है कि क़ीमतें और नहीं बढ़ेंगी क्योंकि उन्होंने छह हज़ार बकरे मँगाए हैं.
थापा के अनुसार, "देश भर में हमारे लोग एकजुट होकर इस त्यौहार की तैयारी कर रहे हैं. लगभग ढाई सौ बकरे तो काठमांडू पहुँच भी घए हैं और आने वाले दिनों में कुछ और पहुँचेंगे."
उनका कहना था कि सरकार उन बकरों को बाज़ार से कम दाम पर ही बेचेगी.
संवाददाताओं का कहना है कि पिछले साल भी बकरों की कमी हुई थी और सरकार ने लगभग चार हज़ार बकरे शहर में पहुँचाने की बात कही थी मगर वो पहुँचा सिर्फ़ 2300 बकरे ही पाई थी.
|