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ट्विटर युवाओं का? ज़रा एक बार फिर से सोचिए
इंटरनेट
रविवार , , 20 सितम्बर
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सोश्यल नेटवर्किंग साइटों पर युवाओं की उपस्थिति कुछ खास नहीं है
16 वर्षीय सोनाक्षी शर्मा अपने मित्रों को हर दिन करीब 200 एसएमएस करती हैं. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि वे ट्विटर का इस्तेमाल क्यों नहीं करती? तो उनका जवाब होता है यह – ट्विटर क्यों? मैं नहीं चाहती कि हर कोई यह जाने कि ‘मैं क्या कर रही हूँ.’

ऐसी सोच रखने वाली सोनाक्षी अकेली युवा नहीं है. अधिकाधिक युवा यही सोचते हैं, और इससे इस अवधारणा को चुनौती मिली है कि – सोश्यल नेटवर्किंग साइटें युवाओं की वजह से चलती है. कुछ तथ्यों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि सोश्यल नेटवर्किंग साइटों पर युवाओं की उपस्थिति कुछ खास नहीं है.

ट्विटर की ही बात करें तो 12 से 17 वर्ष के मात्र 11% लोग ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए ऐसा नहीं कहा जा सकता कि ट्विटर की उल्लेखनीय सफलता के पीछे युवाओं और किशोरों का हाथ है. ट्विटर की भारी सफलता दरअसल बड़ी उम्र के लोगों की आभारी है. सेलिब्रिटियों और बड़ी उम्र के लोगों ने ट्विटर को लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचाया है.

ट्विटर एक नई और क्रांतिकारी साइट है, लेकिन इसकी सफलता युवाओं की आभारी नहीं है, इससे यह बात साबित होती है कि किसी भी नई चीज या विचार की सफलता मात्र युवा वर्ग पर ही निर्भर करती है ऐसा नहीं है.

कोमस्कोर के एंड्रेउ लिप्समैन के अनुसार “ट्विटर एक नई परम्परा स्थापित कर रहा है. किशोरों ने जहाँ अन्य सोश्यल नेटवर्किंग साइटों के शुरूआती दौर को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, वहीं आज अगर देखा जाए तो मायस्पेस के कुल प्रयोक्ताओं में से मात्र 14% ही किशोर हैं और फेसबुक में तो यह अनुपात मात्र 9% है.

लिप्स्मैन का मानना है कि जैसे जैसे इंटरनेट विस्तृत हो रहा है वैसे वैसे प्रयोक्ताओं के व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है. यह इंटरनेट की सफलता का नया आयाम है. 



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