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| इस खोज ने एक नई बहस छेड़ दी है
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टायरनोसौरस रेक्स यानी कि टीरेक्स नामक भीमकाय डायनोसोर के जिवाष्म से मिले जबड़े के नमूने ने वैज्ञानिकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है. इस जबड़े के नमूने में विशेष बात यह है कि इसपर एक अन्य जाति के डायनोसोर [गोर्गोसौरस] के दाँत के निशान मिले हैं – जो यह साबित करते हैं कि डायनोसोर आपस में लड़ते समय एक दूस्रे के मूहँ पर काटते थे.
लेकिन इस खोज ने एक नई बहस छेड़ दी है और वैज्ञानिकों की इस विषय पर अलग अलग राया है. अमेरिका की अलबेर्टा विश्वविद्यालय के फिल बेल और फिलिप करी द्वारा खोजे गए इस जिवाष्म के जबड़े पर मौजूद दाँत के निशाने क्या साबित करते हैं? फिलिप करी के अनुसार – या तो ये जानवर काफी हिंसक थे या फिर यह किसी तरह का यौन व्यवहार है.
कई प्रकार सी ओटर्स सम्भोग की क्रिया के दौरान मादा के मूँह को काटते हैं. इसलिए इस सम्भावना को बल मिला कि डायनोसोर भी ऐसा ही करते थे. डिस्कवरी न्यूज़ के अनुसार इस सम्भावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है.
परंतु एक और तथ्य एक नई सम्भावना को जन्म देता है. इस जिवाष्म के अन्य दाँतो का विकास नहीं हुआ था. इसका अर्थ यह हुआ कि यह जानवर काटे जाने के दो साल के भीतर मर गया होगा, क्योंकि डायनोसोर के दाँत हर दूसरे साल नए उग आते थे. वैज्ञानिकों का एक अनुमान यह है कि हो सकता है यह जानवर काटे जाने के पहले ही मर गया हो और बाद में इसका मांस खाने के लिए अन्य डायनोसोर ने इसे काटा हो.
लेकिन इस व्याख्या को भी चुनौती मिल रही है. जबड़े पर दाँत का छोटा निशान ही है और ऐसा लगता है कि काटने वाले का दाँत टूट गया होगा. यदि किसी अन्य डायनोसोर ने इस डायनोसोर को खाने की कोशिश की होगी तो उसके जबड़ॆ पर दाँतो के गहरे निशान होते और उसने अपना दाँत टूटने नहीं दिया होता.
इसलिए वैज्ञानिक अब इस बात पर सहमत हुए हैं कि यह निशान किसी लड़ाई की ओर इशारा करते हैं. एक स्थान पर अपना प्रभुत्व हासिल करने के लिए डायनोसोर आपस में लड़ते थे और इस दौरान चेहरों को काटते थे. यदि इस लड़ाई में दाँत टूट भी जाए तो भी परवाह नहीं की जाती थी क्योंकि डायनोसोर के दाँत हर दूसरे साल फिर से उग आते थे.