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अनोखा हरा-लाल सेब, अनुवांशिक बदलाव की मिसाल |
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पर्यावरण
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शनिवार , , 26 सितम्बर |
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| यह प्रकृति का करिश्मा है
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ब्रिटेन के कोल्टोन रेलीग गाँव के श्री मोरिस के खेत में एक अनोखा सेब उगा. मोरिस ने जब इस सेब को तोड़ा तो उन्हें लगा कि कोई उनके साथ मजाक कर रहा है. क्योंकि सेब आधा हरा और आधा लाल था. ऐसा लग रहा था मानो किसी ने हरे सेब को आधा लाल रंग में रंग दिया हो.
लेकिन जब मोरिस ने ध्यान से देखा तो पाया कि सेब के ऊपर कोई कृत्रिम रंग नहीं लगा है और वह सेब वास्तव में आधा हरा और आधा लाल है वह भी ठीक मध्य से. यह अनोखा सेब है, जिसे मोरिस खाना नहीं चाहते. उन्होने इसे अपने रेफ्रिजरेटर में सहेज कर रखा है.
मोरिस के अनुसार," यह प्रकृति का करिश्मा है. उन्होने ऐसा पहले कभी नहीं देखा. एक सेब बिल्कुल मध्य में से दो रंगो में बँटा हुआ है, जैसे किसी कुशल चित्रकार ने रंगा हो."
लेकिन ऐसा हुआ कैसे?
द टेलिग्राफ की खबर के अनुसार इस तरह का सेब पैदा होनी की सम्भावना 10 लाख में 1 बार होती है. इसे अनुवांशिक बदलाव के साथ जोड़कर देखा जा सकता है. इसमें होता यह है कि दो अलग अलग जिन एक साथ विकसित होते हैं और अपना प्रभाव छोड़ते जाते हैं.
सरे काउंटी की आरएचएस गार्डन वाइस्ली के फल महानिरिक्षक जिम आर्बुरी के अनुसार यह अनुवांशिक बदलाव का नतीजा है. इसको सीमेरा [chimera] कहते हैं. इसमें दो कोष अलग अलग तरह से बढते हैं और आधा सेब एक कोष के द्वारा और दूसरा हिस्सा दूसरे कोष के द्वारा पनपता है.
फिलहाल तो इस तरह का एक ही सेब मोरिस के खेत में उगा है. लेकिन कृषि विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ऐसे और भी सेब उग सकते हैं. कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि यदि अगले साल भी इस तरह का कोई सेब उगता है तो कोई नई प्रजाति विकसित हो रही है यह माना जा सकता है. फिलहाल कृषि वैज्ञानिक और मोरिस दोनों ही उत्साहित हैं और दोनों की वजहें अलग अलग है.
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