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ब्रिटिश बच्चों का “शेग बैंड और सेक्स” खेल, अभिभावक परेशान!
समाज
गुरुवार , , 01 अक्टूबर
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हर रंग यह सूचित करता है कि खिलाड़ी किस हद तक जाएगा – यानी कि चुम्बन से लेकर सेक्स तक
ब्रिटिश बच्चों के एक नए फैशनेबल “खेल” ने अभिभावकों की नींद उड़ा दी है. यह एक विचित्र खेल है जिसमें ब्रिटिश बच्चे बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.

ब्रिटिश स्कूलों में 7 साल की उम्र के बच्चे भी रंग बिरंगे “शेग बैंड ” पहन कर घूम रहे हैं. शेग बैंड दरअसल प्लास्टिक के सस्ते कड़े होते हैं जो कुछ कुछ फ्रेंडशिप बैल्ट की तरह होते है. हर रंग के शेग बैंड का अलग अलग मतलब होता है. ये शेग बैंड हरे, पीले, लाल, काले, केसरिया आदि कई रंगों में उपलब्ध होते हैं और हर रंग का अपना मतलब होता है और हर रंग यह सूचित करता है कि खिलाड़ी किस हद तक जाएगा – यानी कि चुम्बन से लेकर सेक्स तक!

कैसे खेला जाता है यह खेल?
बच्चों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे इस खेल में एक खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ी के हाथ में पहने हुए ब्रास्लेट या शेग बैंड को तोड़ने की कोशिश करता है, और यदि सफलता मिलती है तो सामने वाले खिलाड़ी को रंग के हिसाब से कार्य करना पड़ता है.

ब्रिटिश अखबार द सन में छपी सूचि के अनुसार यदि पीला बैंड टूट जाता है तो उसे पहनने वाली लड़की को उसे तोड़ने वाले लड़के को गले लगाना होता है. यदि बैंगनी बैंड टूट जाए तो उसे चुम्बन देना होता है, गुलाबी बैंड टूट जाए तो नग्न होना पड़ता है, लाल बैंड टूट जाए तो लड़की को लेप डांस करना होता है, काला बैंड टूटने पर दोनों खिलाड़ी सेक्स में लिप्त होते हैं और सबसे महत्वपूर्ण सुनहरा बैंड टूट जाने पर उपरोक्त सभी क्रियाएँ करना जरूरी हो जाता है.

ब्रिटिश बच्चों के लिए यह प्रतिष्ठा का प्रश्न बन रहा है कि कौन किस रंग का बैंड पहन रहा है. उदाहरण के लिए यदि कोई लड़की या लड़का पीला और केसरिया बैंड पहनता है तो उसे हेय की दृष्टि से देखा जाता है. लेकिन काला या सुनहरा बैंड पहनने वाली लड़के या लड़के को हिम्मतवाला समझा जाता है तथा प्रोत्साहन दिया जाता है.

एक 12 साल की लड़की ने अखबार को बताया कि अभिभावकों को इस बारे में अधिक जानकारी ही नहीं है. उन्हें लगता है कि यह कोई फ्रेंडशिप बैल्ट जैसा कड़ा है, लेकिन इसका मतलब तो कुछ और ही है.

लेकिन अब इस तरह के खेल और शेग बैंड के विरोध में स्वर उठने शुरू हो गए हैं. ब्रिटिश सांसद मेरी क्रेग ने बच्चों के मामलों के मंत्रालय को पत्र लिखकर इस मामले की जाँच करने का आग्रह किया है तथा इस तरह के बैंड पर पाबंदी लगाने को कहा है.

लेकिन अब यह चलन ऑस्ट्रेलिया के कई स्कूलों मे भी देखा जा रहा है और इससे अभिभावकों की नींद उड़ गई है. 



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