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वेंकटरमन रामकृष्णन: 'वेंकी' ने दिलाया देश को सम्मान |
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विज्ञान
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गुरुवार , , 08 अक्टूबर |
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| वेंकटरमन रामकृष्णन का जन्म 1952 में तमिलनाडु के चिदम्बरम शहर में हुआ था
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वेंकटरमन रामकृष्णन भारत के अथवा भारतीय मूल के सातवें ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होने नोबल पुरस्कार प्राप्त कर देश का सम्मान बढाया है. अपने मित्रों के बीच 'वेंकी' के नाम से मशहूर वेंकटरमन रामकृष्णन को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में वर्ष 2009 का नोबेल पुरस्कार मिला है.
उन्हें यह पुरस्कार अमेरिकी वैज्ञानिक थामस ए. स्टेट्ज और इजरायल की वैज्ञानिक अदा ई. योनथ के साथ संयुक्त रूप से मिला है. इस टीम ने राइबोसोम की संरचना और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में महत्वपूर्ण अध्ययन किया है.
तीनों वैज्ञानिकों ने राइबोसोम का 3-डी माडल बनाया है जिससे यह पता चला कि किस तरह विभिन्न एंटीबायोटिक और राइबोसोम आपस में जुड़े रहते हैं. उनकी खोज से कई बीमारियों से बचाव के लिए एंटीबायोटिक बनाने में मदद मिल रही है.
वेंकटरमन रामकृष्णन का जन्म 1952 में तमिलनाडु के चिदम्बरम शहर में हुआ था. उन्होने अनमलाई विश्वविद्यालय से पढाई की और 1971 में उन्होंने वडोदरा की एम.एस. यूनिवर्सिटी से भौतिकी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए. अमेरिका की ओहायो यूनिवर्सिटी से पीएच.डी करने के बाद उन्होने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया. फिलहाल वे कैम्ब्रिज के मोलक्यूलर बायोलोजी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं और इंग्लैंड के एमआरसी लेबोरेटरी आफ मोलेक्यूलर बायोलाजी के स्ट्रक्चरल स्टडीज डिवीजन के प्रमुख हैं. इस बीच उन्होनें अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली थी.
वेंकटरमन रामकृष्णन के शोध कई अति महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं. उनके अब तक 95 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं. 21 सितंबर, 2000 को नेचर पत्रिका में प्रकाशित उनके शोधपत्र ने 30S रायबोसोम के 3 आगस्ट्रम संरचना की तीन सह ईकाई के बारे में जानकारी प्रदान की थी.
नोबल पुरस्कार जीतने के बाद वेंकटरमन ने कहा कि वे अपने सहयोगियों, छात्रों और लैब में काम करने वाले तमाम शोधकर्ताओं के आभारी हैं.
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