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7 विवादास्पद ‘नोबेल पुरस्कार”
शानदार 7
शनिवार , , 10 अक्टूबर

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को वर्ष 2009 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलना, ना केवल चर्चा में है बल्कि कई विवादों को भी जन्म दे रहा है. खुद उनके देश अमेरिका में भी खुशी कम परंतु आश्चर्य अधिक व्यक्त किया जा रहा है. कई विश्लेषक मानते हैं कि एक ऐसे देश के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार कैसे मिल सकता है जो कई देशों में लड़ाईयाँ लड़ रहा हो?

यह पहला मौका नहीं है जब नोबेल पुरस्कार समिति का निर्णय विवादों के घेरे में आया है. लगभग हर वर्ष ऐसा ही होता है. प्रस्तुत है 7 व्यक्तियों की सूचि जिनको नोबेल पुरस्कार देना विवादों के घेरे में आया.

थियोडोर रूज़वेल्ट 
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अमेरिका के 26वें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट को 1905 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला था. उन्हें यह सम्मान रूस-जापान युद्ध को समाप्त करवाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए दिया गया था. लेकिन पुरस्कार समिति ने फिलिपींस में विद्रोह को समाप्त करने के लिए उनके द्वारा करवाए गए बलप्रयोग को नजरअंदाज कर दिया था.


अनवर सदात
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इजिप्त के राष्ट्रपति अनवर सदात को 1978 में केम्प डेविड एकोर्ड को सफलता पूर्वक समाप्त करने में दिए गए योगदान के बदले नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया. यह कार्य 1973 में किया गया था लेकिन उसी वर्ष इजिप्त इज़रायल के साथ युद्ध में भी लिप्त था, लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया.



हेनरी किसींजर
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अमेरिका के रक्षा सचीव को 1973 में वियतनाम शांति समझौते मे उल्लेखनीय योगदान देने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया. लेकिन पुरस्कार समिति ने 1969 – 1975 के बीच कम्बोडिया में एनवीए के विरूद्ध बमबारी में उनकी भूमिका और ओपरेशन कोंडोर में उनके शामिल होने को नजरअंदाज किया. 

 


राइगोबेर्टा मेंचु 
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राइगोबेर्टा मेंचु को उनकी आत्मकथा आई राइगोबेर्टा मेंचु के लिए 1992 में नोबेल पुरस्कार मिला. लेकिन डेविड स्टोल नामक व्यक्ति ने उनपर आरोप लगाया था कि उन्होनें आत्मकथा में कई मनगढंत बातें लिखी है. 

यासर अराफात 
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फिलिस्तीनी प्राधिकरण के प्रमुख यासर अराफात को इजरायल के शाइमोन पेरेज़ और आइज़ेक राबिन के साथ सयुंक्त रूप से 1994 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था. लेकिन अराफात वर्षों तक हिंसात्मक कार्यों में लिप्त थे. वे फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठनों का संचालन भी करते थे. 
 

वांगारी मथाई
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इन्हें 2004 में एड्स निवारण के क्षैत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था. लेकिन कई केन्याई मीडिया माध्यम और यूरोप रेडियो के अनुसार उन्होनें कभी कहा था कि एचआईवी वाइरस का निर्माण पश्चिमी दुनिया के वैज्ञानिकों ने किया है ताकि अश्वेत लोगों को समाप्त किया जा सके. मथाई ने बाद में इन आरोपों का खंडन किया.


अल गोर
frenchman-lluis-colet.jpg अमेरिका के उपराष्ट्रपति अल गोर को 2007 में आईपीसीसी नामक संस्था के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार मिला था. उन्हें यह पुरस्कार पर्यावरण सरंक्षण और ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से दुनिया को बचाने के लिए दिए जा रहे उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला था. लेकिन उनके विरोधियों के अनुसार अल गोर का इस क्षैत्र से कोई लेना देना नहीं है और वे इस अभियान से केवल इसलिए जुड़े थे ताकी नोबेल पुरस्कार पा सकें. उनके विरोधी यहाँ तक कहते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग जैसा कुछ होता ही नहीं है.

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