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| इंसान ने डाइनोसॉर की जितनी प्रजातियों का वर्गीकरण किया है उनमें से 1/3 कभी थी ही नहीं
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क्या हम डाइनोसॉर की प्रजातियों को लेकर मात्र ख्याली पुलाव पका रहे हैं? यदि पालियोंटोलोजिस्ट मार्क गूडविन, और जैक होर्नर की बात को माना जाए तो अभी तक इंसान ने डाइनोसॉर की जितनी प्रजातियों का वर्गीकरण किया है उनमें से 1/3 कभी थी ही नहीं!
इन दोनों वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वयस्क डाइनोसॉर और कम उम्र के या शिशु डाइनोसॉरको अलग अलग प्रजाति का मान लिया गया. उदाहरण के लिए वयस्क इंसान और उसकी संतान के चेहरों और शरीर में काफी फर्क होता है. दोनों एक जैसे नहीं दिखते लेकिन वे दोनों होते तो एक ही प्रजाति के हैं. यही बात अन्य जीव जंतुओं पर लागु होती है और व डाइनोसॉर पर भी.
लेकिन वैज्ञानिकों ने कम उम्र के कई डाइनोसॉरों के जीवाष्मों का अध्ययन करने के बाद उन्हें किसी अन्य प्रजाति का डाइनोसॉर मान लिया जबकि यह सच नहीं है. सबसे बढिया उदाहरण नेनोटायरानोस का है. इस नन्हें डाइनोसॉर को एक अलग प्रजाति का डाइनोसॉर माना जाता था लेकिन अब कई विशेषज्ञ इसे टी.रेक्स नामक भीमकाय डाइनोसॉर की छोटी संतान मान रहे हैं. दोनों की शारीरिक रचना में भिन्नता है लेकिन ऐसा हर जीव में होता है. इंसानों में भी शिशु की शारीरिक रचना अलग होती है और वयस्क होते होते वह बदलती जाती है.
बहरहाल नेनोटायरानोस और टी.रेक्स के बीच का संबंध तब स्थापित हुआ जब एक और डाइनोसॉर का जीवाष्म मिला जो इन दोनों के बीच के कद का था. नेनोटायरानोस के 17 दाँत थे जबकि टी.रेक्स के 12 होते हैं. इस नए जीवाष्म जिसको किशोर टी.रेक्स माना गया है के 14 दाँत हैं. जीवशाष्त्रियों का अनुमान है कि डाइनोसॉर के दाँत वयस्क होते होते कम होते जाते थे.
इस नई खोज और कुछ और उदाहरणों से स्पष्ट हुआ है कि जीव विज्ञानियों ने डाइनोसॉर की प्रजातियों का वर्गीकरण करते समय उनकी उम्र का ध्यान नहीं रखा है और इससे चुक होने की सम्भावना बढ गई है. अब ऐसा लग रहा है कि डाइनोसॉर शायद उतनी प्रजातियों के नहीं थे जितने की हम मानते हैं.