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7 बड़ी परंतु अनजानी दुर्घटनाएँ / विनाशलीलाएँ
शानदार 7
गुरुवार , , 22 अक्टूबर
ये वे विनाशलीलाएँ थी जिनकी वजह से हजारों लाखों लोगों की मौत हो गई, लाखो लोग बेघर हो गए और हजारो लोग प्रभावित हुए. लेकिन ये विनाशलीलाएँ या दुर्घटनाएँ कभी खबर नहीं बनी. लोगों का ध्यान इन दुर्घटनाओं की तरफ या तो गया ही नहीं या फिर कम गया.
स्टान चक्रवात, मध्य अमेरिका [अक्तूबर 2005]
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स्टान चक्रवात अक्तूबर 2005 में आया था और इसने ग्वाटेमाला, अल स्लवाडोर, निकारागुआ, होंडुरास, कोस्टारिका और मैक्सिको के कुछ भागों पर तबाही मचाई थी. करीब 2000 लोग मारे गए थे.

लेकिन इस चक्रवात ने खबर नहीं बनाई क्योंकि उसके ठीक पहले कैटरीना और रीटा नामक चक्रवात सुर्खियाँ बन चुके थे और उसके ठीक बाद पाकिस्तान के भूकम्प ने दुनिया भर का ध्यान खींच लिया था.



ग्वाटेमाला भूकम्प [फरवरी 1976]
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ग्वाटेमाला शहर में आया भूकम्प मीडिया में छाया था. इस भूकम्प से काफी तबाही मची थी. 23 हजार लोग मारे गए थे और लाखों लोग [पूरी जनसंख्या 1/6 भाग] बेघर हो गए थे.

लेकिन जो एक बात अखबारों में नहीं छपी वह यह कि इस भूकम्प ने देश की अर्थव्यवस्था को तहस नहस कर दिया था. जीवन जरूरी चीजों के दाम आसमान छूने लगे थे, सालों तक लोग बेघर ही रहे, कमाई के जरिए समाप्त हो गए और लोग खाने को तरस गए.

कुछ लोग कहते हैं कि ग्वाटॆमाला शहर ने भूकम्प के बाद जो त्रासदी झेली उससे काफी कम त्रासदी भूकम्प से हुई थी.

 



विलहेम गस्टलोफ का डूबना
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लोग टाइटेनिक को याद करते हैं लेकिन विलहेम गस्टलोफ की त्रासदी कोई याद नहीं करता. वह इसलिए क्योंकि इस विषय में काफी कम लिखा गया है. यह एक जर्मन जहाज था जो 30 जनवरी 1945 को बाल्टिक हार्बर से निकला था.

इस जहाज में 5000 विस्थापित भरे थे जिनमें अधिकतर महिलाएँ और बच्चे थे. इसके अलावा 1600 सैनिक भी ठुंसे गए थे.

इस जहाज की भनक सोवियत पनडुब्बी एस13 को लगी, जिसमें से निकले 3 तारपिडो ने इस जहाज को समुद्र में डूबा दिया. 5400 लोग मारे गए थे, टाइटेनिक से कहीं अधिक.

 


अशगाबात भूकम्प, तुर्कमेनिस्तान [अक्तूबर 5, 1948]
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तुर्कमेनिस्तान तब सोवियत संघ का हिस्सा था और वहाँ कड़ा कम्यूनिस्ट राज था. 5 अक्तूबर 1948 को आए विनाशकारी भूकम्प ने अशगाबात शहर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था. कोई इमारत साबुत नहीं बची थी. जान माल का भारी नुकसान हुआ था.

उस समय स्टालिन ने इस विनाशलीला की खबर बाहरी दुनिया तक नहीं पहुँचने दी थी. 1988 आते आते पता चला कि इस विनाशलीला में लाखों लोग मारे गए थे.

तांगशन का भूकम्प [जुलाई 28, 1976]
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तांगशन चीन का एक औद्योगिक शहर है जो राजधानी बिजिंग से पूर्व में स्थित है. 28 जुलाई 1976 की सुबह 3 बजे जब इस शहर के लोग गहरी नींद में थे, अचानक धरती हिली और सबकुछ तबाह गया. करीब 2,50,000 लोग मारे गए थे और हजारों मकान धराशाही हो गए थे. रेल नेटवर्क, बिजली के खम्भे आदि नष्ट हो गए.

चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने मृतकों का सही आँकड़ा लम्बे काल तक दबाए रखा. और तो और उसने विदेशी सहायता लेने से भी इंकार कर स्थिति को और भी विकट बना दिया था. सयुंक्त राष्ट्र और रेड क्रोस के दलों को आने से रोका गया था.

 

 

बानकियो बांध का टूटना, चीन [अगस्त 1975]
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यह बांध कम्यूनिस्ट पार्टी की शान था. इसे जब बनवाया गया तब इसे काफी प्रचारित किया गया था. इसे बनाने वाले इंजीनियरों का दावा था कि यह बांध हजारों साल तक टिकेगा. लेकिन हुआ इसका ऊल्टा. अगस्त 1975 को इस बांध में दरारें आनी शुरू हो गई. नीना नामक चक्रवात ने स्थिति को और बिगाड़ दिया. यह बांध बढ रहे जलस्तर को झेल नहीं पाया और ध्वस्त हो गया. इससे निकला पानी तूफान बनकर तबाही मचाता गया और आसपास के 62 छोटे बांध भी इसकी लहर में टूट गए.

उस समय चीन में पत्रकारिता पर लगभग प्रतिबंध था. इस दुर्घटना में कितने लोग मारे गए यह किसी को ज्ञात नहीं था. आखिरकार 1995 में पता चला कि इस दुर्घटना में 1 लाख से लेकर 3 लाख तक लोग मारे गए थे.

 


घाना की बाढ [2007]
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यह बाढ देश के उत्तर पूर्वी, उत्तर पश्चिमी और उत्तरी इलाकों में आई थी. इस बाढ की कम ही चर्चा होती है परंतु इस बाढ ने 2,75,000 लोगों को प्रभावित किया था.

घाना रेड क्रोस के प्रमुख ने कहा भी यह काफी भयानक बाढ है. सोच नहीं सकते इतनी. लेकिन कोई ध्यान ही नहीं दे रहा. कमाल है!

इस बाढ से 20000 घर टूट गए और घाना का कई देशों से सम्पर्क टूट गया था.

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