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| फैसला हमेशा सही और गलत में होता है
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छोटी मोटी अनबन और झगड़े तो आम बात है. कभी कोई आपके कपड़े पहन कर चला जा सकता है, कभी आपका रूममेट आपसे बिना पूछे आपके पर्स में से कुछ रूपए लेकर चला जाता है, आपका छोटा भाई आपके कमरे में सामान बिखेर कर रखता है, आपकी पत्नी अनावश्यक चीजें खरीद कर ले आती है, आपके पति आए दिन मित्रों को दावत के लिए बुला लेते हैं....
सूचि लम्बी है, लेकिन यह सब ऐसी बाते हैं जिनको लेकर आम तौर पर अनबन होती है. हमारे यहाँ इस तरह की अनबनो को या तो आपस में बातचीत कर सुलझा लिया जाता है या फिर बड़े बुजुर्ग मध्यस्थता कर मामले को बढने नहीं देते. लेकिन पश्चिमी देशों मे यह सम्भव नहीं है, और इसलिए
इस तरह की साइटें बनती है.
वैसे यह
साइट है मजेदार. यहाँ एक ओनलाइन ज्यूरी होती है जो दोनों पक्षों की बात पढने के बाद अपना फैसला सुनाती है. फैसला हमेशा सही और गलत में होता है.
यह कैसे काम करता है?
सबसे पहले आपको इस साइट पर पंजीकरण करना होता है. इसके बाद आप अपनी बात यहाँ लिख सकते हैं. मान लीजिए कि आप लिखते हैं कि – मेरी पत्नी अनावश्यक शोपिंग करती है. क्या वह सही है? सवाल इसी तरह से लिखना होता है, यानी कि अंत में सही या गलत के बारे में पूछा जाना चाहिए.
इसके बाद आप अपनी पत्नी को ईमेल के माध्यम से “न्यायालय” में आने का न्यौता भेज सकते हैं. आपकी पत्नी अपना पंजीकरण करवाने के पश्चात अपना पक्ष रख सकती है. जब दोनों खेमें अपना अपना पक्ष रख चुके होते हैं तो ओनलाइन ज्यूरी की वोटिंग शुरू हो जाती है, जो 24 घंटों के लिए चलती है. इसके बाद जिस पक्ष को सर्वाधिक वोट मिले वह विजयी!
ज्यूरी टिप्पणीयों के माध्यम से अपनी राय भी रख सकती है. यह पुरी प्रक्रिया काफी मजेदार है. बशर्ते आप इसे अधिक गम्भीरता से ना लें.