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अच्छे सामाजिक संबंध बचाते हैं स्तन कैंसर से |
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स्वास्थ्य
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मंगलवार , , 03 नवम्बर |
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| स्तन कैंसर से ग्रस्त किसी महिला का अच्छे और खुशहाल वातावरण में रहना अति आवश्यक है
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एक नई शोध से पता चला है कि अच्छे और बुरे सामाजिक संबंधों का कैंसर जैसी कई घातक बिमारियों पर असर पड़ता है. अपने प्रयोग में वैज्ञानिकों ने पाया कि यदि किसी के सामाजिक संबंध अच्छे ना हों तो उसकी बिमारी को ठीक होने में अधिक समय लगता है.
विशेष रूप से स्तन कैंसर से ग्रस्त किसी महिला का अच्छे और खुशहाल वातावरण में रहना अति आवश्यक है. यदि स्तन कैंसर से ग्रस्त महिला तनावपूर्ण माहौल में रहती है तथा यदि उसके सामाजिक संबंध अच्छे नहीं हैं तो उसका काफी विपरित असर कैंसर की गांठ पर पड़ता है.
वैज्ञानिकों ने दो चूहों के ऊपर एक परीक्षण कर इस बात का पता लगाया. इस संबध में शोध आज से 6 वर्ष पहले से ही जारी है. शिकागो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग के लिए 2 चूहों को चुना और उनमें कुछ अनुवांशिक बदलाव किए जिससे कि उनके शरीर में मैमारी ग्लांड [स्तन कैंसर की गांठ] उत्पन्न हो गई.
अब उन दोनों चूहों में से एक चूहे को कुछ अन्य चूहों के साथ तथा दूसरे चूहे को अकेले में रखा गया. इस तरह से दोनों के वातावरण को एकदम से बदल दिया गया. एक निश्चित समयावधि के बाद जब दोनों की जाँच की गई तो पता चला कि जिस चूहे को अलग थलग रखा गया था उसके शरीर में स्तन कैंसर की गांठ और बड़ी हो गई थी और उसके शरीर में तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन बढ गए थे.
कैंसर विशेषज्ञ और इस शोध से जुड़ी डॉ. सुज़ैन कोनज़ेन के अनुसार,”मुझे शक था कि सामाजिक वातावरण का कोई असर कैंसर की गांठ पर पड़ सकता है. लेकिन जब मैनें नतीजे देखे तो मैं चौंक गई.”
नतीजे स्पष्ट हैं. समाज से कटे चूहे की बिमारी और बढ गई थी. वैज्ञानिकों ने जब यह जानना चाहा कि आखिर ऐसा क्यों हुआ तो पता चला कि अलग थलग कर दिए गए चूहे के शरीर मे मेटाबोलिक पाथवे जीन का स्तर बढ गया और इससे कैंसर की गांठ भी बड़ी हो गई. अकेले रहने के तनाव ने उसके शरीर पर विपरित असर डाला.
इस शोध से सिद्ध हुआ है कि कैंसर तथा अन्य बिमारियों की रोकथाम के लिए खुशहाल जीवन भी अत्यधिक आवश्यक है.
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