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7 प्रभावशाली महिलाएँ, जिन्होनें दुनिया को दिशा दी
शानदार 7
बुधवार , , 04 नवम्बर

महिलाएँ किसी से कम नहीं होती. यह बात इन महिलाओं पर लागू होती है. इन्होनें अपने साहस, लगन और अदम्य ईच्छाशक्ति से दुनिया को एक नई दिशा दी.

एमेलिया इयरहार्ट 
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1897 में केंसास में जन्मी एमेलिया दुनिया की सर्वश्रेष्ठ पायलट में से एक थी. एमेलिया ने एक एयर शो देखकर पायलट बनने की ठानी और अगले ही वर्ष यानी 1921 में पायलट का लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया. अकेले विमान उड़ाकर अटलांटिक और प्रशांत महासागर पार करने वाली वह पहली महिला थी.

एमेलिया ने अगला लक्ष्य तैयार किया दुनिया का चक्कर लगाना, अकेले! 1973 में उसने उड़ान भरी और 2/3 हिस्सा पार भी कर लिया. लेकिन उसके बाद दक्षिण प्रशांत महासागर के ऊपर उनका विमान गायब हो गया और फिर कभी नहीं दिखा. ना ही एमेलिया दिखी.

फ्लोरेंस नाइटेंगल
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फ्लोरेंस का जन्म 1820 में हुआ था. फ्लोरेंस उन पहली महिलाओं में से थी जिन्होनें युद्ध के समय अस्पतालों में नर्स की भूमिका निभाई थी. उन्होनें स्वास्थ्य संबंधी कई किताबें भी लिखी. 1860 में उन्होने नाइटेंगल ट्रेनिंग स्कूल की स्थापना की जो नर्सों को प्रशिक्षण देती थी. 1910 में जब उनकी मृत्यु हुई तब तक वे अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं के लड़ती रही थी. उनकी उपलब्धि इस मायने में खास है कि उन्होनें ये कार्य उस जमाने में किए जब महिलाओं को बहुत कम स्वतंत्रता प्राप्त थी.

मार्गरेट थेचर
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1925 में जन्मी मार्गरेट थेचर ने अपने करियर की शुरूआत वकिलात से की, उसके बाद वे सांसद और बाद में 1979 में प्रधानमंत्री बनी. वे पहली महिला प्रधानमंत्री थीं. अपने कार्यकाल में उन्होने निजीकरण, कम कर, नागरिक स्वतंत्रता आदि के क्षैत्र में काफी कार्य किया. उनमें निर्णय लेने की अद्भूत क्षमता थी, इसलिए उन्हें लौहमहिला कहा जाता था.

इंदिरा गांधी 
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इंदिरा गांधी जब प्रधानमंत्री बनी थी, तब कहा जाता था कि उनकी कैबिनेट की वे एकमात्र पुरूष सदस्य हैं. जाहिर है लोग उनकी अडिगता और निर्णय लेने की क्षमता के कायल थे. 1971 के भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण तथा उसके बाद परमाणु परीक्षण ने उनकी लोकप्रियता को काफी बढा दिया था.

लेकिन उन्होनें कई अलोकप्रिय निर्णय भी लिए और उसका खामियाजा भी भुगता. लेकिन आज भी लोग उन्हें याद करते हैं – लौह महिला के रूप में.

मेरी क्यूरी
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1867 में वारसाउ में जन्मी मेरी क्यूरी वह पहली व्यक्ति हैं जिन्हें दो बार नोबेल पुरस्कार मिला. वे रेडियोलोजी के क्षैत्र की विशेषज्ञ थी. उन्होने पोलोनियम और रेडियम की खोज की थी. उन्होनें साबित किया था कि रेडियोएक्टिव आइसोटोप से कैंसर का इलाज हो सकता है.

यह विडम्बना है कि जुलाई 4, 1934 में उनकी मृत्यु रेडिएशन के प्रभाव की वजह से ही हुई.
 

झांसी की रानी
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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१९ नवंबर १८२८ – १७ जून १८५८) मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना थीं.

1857 के विप्लव और आज़ादी की पहली जंग में भाग लेने वाली महिलाओं का यदि जिक्र किया जाए तो सबसे पहला नाम जो उभरता है वह है झांसी की रानी लक्ष्मीबाई.

लक्ष्मीबाई जुझारू योद्धा थी और अपनी कम उम्र के बावजूद उन्होनें अंग्रेजों के दाँत खट्टे कर दिए थे. खुद अंग्रेज उन्हें जुझारू योद्धा मानते थे, लेकिन अंग्रेजो के खिलाफ कम सैन्य ताकत की वजह से लक्ष्मीबाई की हार हुई. युद्ध में घायल हो जाने के बाद 29 वर्ष की अल्पायु में ही उनकी मृत्यु हुई.

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा स्थापित इंडियन नेशनल आर्मी की महिला यूनिट का नाम रानी झांसी ब्रिगेट था.

किरण बेदी
Keith-Urban-Nicole-Kidman.jpg 1972 का वर्ष भारतीय पुलिस बल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है. इस दिन किरण बेदी देश की पहली महिला पुलिस अफसर बनी थी. और इसके बाद 3 दशकों तक उन्होनें लगातार नई ऊँचाईयाँ प्राप्त की.

तिहाड़ जेल के इंस्पेक्टर जनरल के तौर पर उन्होनें कई नई योजनाएँ शुरू की और कैदियों के मानसिक और सामाजिक विकास के लिए कार्य किए.

दिल्ली का पुलिस कमिश्नर ना बनाए जाने के विरोध में उन्होनें समय से पहले सेवा निवृति ले ली थी. वे कई समाजसेवी संस्थाओं से जुड़ी हैं और टीवी पर कचहरी चलाती हैं.

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