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कृत्रिम शिश्न बनाने की दिशा में उठा पहला कदम
विज्ञान
बुधवार , , 11 नवम्बर
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कृत्रिम टिस्यू लगने के बाद भी इन खरगोशों का सेक्स जीवन बिल्कुल सामान्य रहा 
वैज्ञानिकों के एक दल ने कृत्रिम शिश्न विकसित करने की दिशा में पहला कदम उठाया है. वेक फोरेस्ट यूनिवर्सिटी बाप्टिस्ट मेडिकल सेंटर के संशोधकों ने दावा किया है कि उन्होनें जानवरों में शिश्नोत्थान के लिए जरूरी टिस्यू का निर्माण किया है और उसका सफलता पूर्वक परीक्षण भी किया है.  

परीक्षण:
अपने परीक्षण में संशोधकों ने एक खरगोश के कुछ टिस्यू लेकर लेबोरेटरी में पेनाइल इरेक्टाइल टिस्यू या शिश्नोत्त्थान टिस्यू तैयार किया. बाद में कुछ खरगोशों के प्राकृतिक शिश्नोत्थान टिस्यूओं को निकाल कर इन कृत्रिम टिस्यूओं को लगा दिया गया.

कृत्रिम टिस्यू लगने के बाद भी इन खरगोशों का सेक्स जीवन बिल्कुल सामान्य रहा और उन्होनें संतानोत्पति भी की. यह जननांग संबंधित अब तक का पहला पूर्ण बदलाव है.

चुनौती:
शिश्न के स्नायू और टिस्यू का कार्य और सरंचना काफी जटील होती है. इसलिए उनके कृत्रिम प्रारूप को तैयार कर पाना लगभग असम्भव होता है. कृत्रिम टिस्यू से किए गए  किसी भी प्रकार के बदलाव से सेक्स जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रहता.

भविष्य:
इस इंस्टिट्यूट के निदेशक एंथोनी अटाला का कहना है कि इस विषय पर अभी और अभ्यास किया जाना है लेकिन हमने जो नतीजे प्राप्त किए हैं वे उत्साहजनक है और अब हमें लगता है कि भविष्य में शिश्नोत्थान संबंधित विकारों का इलाज सरलता से किया जा सकेगा.

इस तकनीक के विकसित होने के बाद उन पुरूषों को लाभ होगा जिनके शिश्न के भाग में कैंसर है, शिश्नोत्थान की समस्या है या जिन्हें शिश्न पर गम्भीर चोट आई है.




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