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सौरऊर्जा से चलने वाला लाइटसैल खोजेगा नई दुनिया |
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तकनीक
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गुरुवार , , 12 नवम्बर |
इस तरह का पहला प्रयास असफल हो चुका है. दुनिया का पहला सौरऊर्जा से चलने वाला उड़नयान कोसमोस -1 अपनी पहली उड़ान भरते समय दुर्घटनाग्रस्त होकर समुद्र में गिर गया था. लेकिन असफलता ही सफलता की जननी है!
और इसलिए लुइस फ्राइडमैन और कार्ल सेगन के द्वारा स्थापित एक गैर सरकारी सोसाइटी की उम्मीदें अभी भी कायम है. बल्कि उनका नया सोलरसैल तैयार होने जा रहा है जो मात्र सौरऊर्जा से उड़ान भरेगा.
यह यान आम यानों की तरह रॉकेट ईंधन का इस्तेमाल नहीं करेगा बल्कि सौर किरणों के फोटोन से ऊर्जा प्राप्त कर अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा. इसके निर्माताओं के अनुसार शुरू में इस यान की गति धीमी होगी परंतु धीरे धीरे यह गति पकड़ लेगा और करीब 1,61,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरेगा. यही नहीं इस यान की उम्र भी आम यानों की अपेक्षा काफी अधिक होगी. यह यान 5 साल के भीतर सौरमंडल से भी बाहर चला जाएगा.
कैसा है यान? लाइटसैल 1 क्यूबसेट नामक एक छोटे उपग्रह के आधार पर बनाया गया है. इसके निर्माताओं ने क्यूबसेट के मॉडल के आसपास ही नए यंत्र जोड़े हैं. इसमें हीरे के आकार के सोलरसैल लगाए गए हैं ओ काफी पतले [5 माइक्रोन] हैं. फिलहाल यह यान 800 किलोमीटर ऊँचाई पर स्थापित किया जाएगा.
इस यान को रॉकेट के माध्यम से अपनी कक्षा में स्थापित किया जाएगा. इसके बाद मिशन कंट्रोलर इसके अनोखे सोलर सिस्टम को चालू कर देंगे और फिर यह यान मात्र सौरऊर्जा के ऊपर आधारित रहेगा. सूरज की किरणों से ऊर्जावान यह यान इसके बाद अपनी यात्रा शुरू करेगा.
इस परियोजना कि लागत है करीब 1.8 मीलियन डॉलर और यह राशि अनुदानों से ही अर्जित की गई है. इस यान की सफलता के बाद इसके निर्माता लाइटसैल-2 और लाइटसैल-3 का भी निर्माण करेंगे.
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