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फरीदकोट के पास पत्रकार गिरफ़्तार
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पाकिस्तानी पुलिस ने मुंबई हमलों के दौरान एक मात्र जीवित पकड़े गए पाकिस्तानी हमलावर अजमल अमिर कसाब के इलाक़े के दो पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है.

पुलिस ने इन स्थानीय पत्रकारों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं जबकि पत्रकारों का कहना है कि उन्होंने कसाब का गांव खोजने में देशी-विदेशी पत्रकारों की मदद की, इसलिए उन्हें गिरफ़्तार कर के परेशान किया जा रहा है.

गिरफ्तार होने वाले पत्रकारों में दीपालपुर प्रेस कलब के अध्यक्ष रब नवाज़ जोया और महासचिव चौधरी जावेद चंडोड़ शामिल हैं.

पुलिस अधिकारी राणा लियाक़त अली के अनुसार रब नवाज़ जोया और चौधरी जावेद चंडोर पर वाहन चोरी करने की कोशिश और प्रेस कलब की सरकारी निधि में भ्रष्टाचार के आरोप हैं.

ग़ौरतलब है कि दीपालपुर पंजाब के ज़िले ओकड़ा का एक तालुक़ा है जो लाहौर से करीब 130 किलोमीटर की दूरी पर है. दीपालपुर शहर से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर अजमल आमिर कसाब का गाँव फरीदकोट है.

पुलिस ने पत्रकारों के ख़िलाफ दो मुक़दमे दर्ज किए हैं लेकिन थाने में बंद एक पत्रकार चौधरी जावेद चंडोड़ ने बीबीसी को बताया, “हमें उस समय से पुलिस और स्थानीय प्रशासन तंग कर रही है जबसे हम ने अजमल कसाब का गाँव तलाश करने में देशी और विदेशी पत्रकारों की मदद की थी.”

उन्होंने आगे बताया, “पिछले एक साल से गुप्तचर एजेंसियाँ हमें तंग कर रही थी और हमारे आने जाने पर नज़र रखी जा रही थी.”

जावेद चंडोड़ के मुताबिक पुलिस ने उन्हें झूठे मुक़दमों में फंसाया है और उन्हें अजमल कसाब का गाँव तलाश करने की सज़ा दी जा रही है.

उन्होंने कहा, “पुलिस ने जो मुक़दमे बनाए हैं वह सरासर झूठे हैं जहाँ तक प्रेस कलब के फंड में भ्रष्टाचार की बात है तो हम ने प्रेस क्लब में काफी काम करवाया है.”

स्थानीय पत्रकारों के अनुसार पाकिस्तान सरकार की ओर से अजमल आमिर कसाब की पाकिस्तानी नागरिकता स्वीकार करने के बावजूद भी दीपालपुर शहर और उस के आस-पास के गाँवों के लोगों को इस विषय पर बात नहीं करने दी जा रही है.

अजमल आमिर कसाब पर मुंबई की एक जेल में बंद हैं और वहाँ उन के ख़िलाफ मुक़दमा भी चल रहा है.

पत्रकारों ने बताया कि गुप्चर एजेंसियों को लोग दीपालपुर शहर में घूम रहे होते हैं और हर आने जाने वाले व्यक्ति पर नज़र रखी जाती है.दीपालपुर दक्षिण पंजाब को वह इलाक़ा है जहाँ जेहादी गुटों का प्रभाव बढ़ रहा है.

ध्यान रहे कि गुरुवार को दीपालपुर शहर में स्थानीय राजनीतिक दलों ने पत्रकारों की रिहाई के लिए प्रदर्शन भी किया है.
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