सचिन की बल्लेबाजी देख रहे एक दर्शक ने अपने हाथ में एक बैनर ले रखा था जिसपर लिखा था -
"जब मैं मर जाउंगा तब भगवान को देखुंगा. लेकिन अभी मैं सचिन तेंदुलकर को देख रहा हूँ."
इग्लैंड के एक बल्लेबाज ने एक घटना याद की. वे रेलगाड़ी में शिमला से दिल्ली आ रहे थे. बीच रास्ते में एक स्टेशन आया और लोगों ने टीवी पर देखा कि सचिन 98 रन बनाकर खेल रहे हैं. बस भीड़ जमा हो गई और ट्रेन तब तक नहीं चली जब तक सचिन ने शतक नहीं बना लिया. वह बल्लेबाज याद करते हैं -
इस देश में सचिन नामक व्यक्ति समय को रोक सकता है!
यह सच है सचिन समय को रोक सकता है, और यदि 99 रन पर खेल रहा हो तो करोड़ों लोगों की सांसो को भी रोक सकता है! इस देश में क्रिकेट एक धर्म है तो सचिन सबसे बड़ा भगवान है!
सचिन का सफर [16 नवम्बर, 2009 तक]:
1989: अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरूआत की. 16 वर्ष के स्कूल विद्यार्थी का सामना पाकिस्तान के धुरंधर गेंदबाजों से हुआ. वकार युनुस की गेंद ने नाक तोड़ी. अब्दुल कादिर की लय बिगड़ी. स्कूली बच्चे के छक्कों ने कादिर की प्रतिष्ठा धुमिल की.
1991: सचिन ने 14 एकदिवसीय मैचों में 4 अर्धशतक बनाए. विरोधी कहने लगे - कहाँ है वह जलवा! कहाँ है शतक!
1992: सचिन ने टेस्ट मैच मे 148 रनों की यादगार पारी खेली. इसी वर्ष विश्वकप खेला गया, यह सचिन का पहला क्रिकेट विश्वकप था. भारत बुरी तरह हारा लेकिन सचिन नम्बर 1 बल्लेबाज बन गए.
1993: क्रिकेट जीवन के 4 साल पूरे हुए लेकिन अभी तक एक भी एकदिवसीय शतक नहीं!
1994: पहला एकदिवसीय शतक! इसी वर्ष सचिन ने 3 एकदिवसीय शतक जड़े.
1996: द्वितीय विश्वकप! भारत सेमी फाइनल तक पहुँचा, लेकिन कोलकाता में श्रीलंका के हाथों हार ने अजहरूद्दीन की कप्तानी छीन ली. सचिन कप्तान बने.
1997: सचिन का बल्ला बोलता रहा लेकिन भारत फिसलता रहा. सचिन से कप्तानी छीन ली गई.
1999: घटनाओं और दुर्घटनाओं वाला वर्ष. पहली पार कमर में दर्द उठा. तृतीय विश्वकप में भाग लिया. विश्वकप के बीच में ही पिता का निधन हुआ. टेस्ट क्रिकेट में अपना पहला दोहरा शतक बनाया, और एकदिवसीय क्रिकेट में 186 रन बनाए जो आज भी रिकार्ड है. सचिन फिर से कप्तान बने.
2000: भारतीय टीम के प्रदर्शन में गिरावट. सचिन ने कप्तानी छोड़ी.
2001: गांगूली का उदय. उनकी कप्तानी में भारत ने बढत बनाई. गांगूली आक्रामक कप्तान थे. सचिन का बल्ला फिर बोलने लगा. उधर मैच रेफरी माइन डेनेस ने सचिन पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगाया.
2003: अपने जीवन का चौथा विश्वकप खेला. सचिन की 98 रनों की सेमीफाइनल पारी आज भी उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी मानी जाती है. शोएब अख़्तर की तेजी की धज्जियाँ उड गई थी. लेकिन टेस्ट क्रिकेट में सचिन ने बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया. 5 टेस्ट खेले और 153 रन ही बनाए.
2004: भारत ने पाकिस्तान को उसी की धरती पर हराया. इसमें सचिन का योगदान यादगार रहा.
2006: सचिन के लिए निराशाजनक दौर चल रहा था. प्रशंसक कहने लगे अब रिटायर हो जाना चाहिए.
2007: पाँचवा विश्वकप जिसे सचिन सहित पूरा भारत भूला देना चाहेगा. पहले ही दौर में टीम बाहर. बांग्लादेश से भी मिली हार.
2008: भारत का उदय! ऑस्ट्रेलिया जाकर ऑस्ट्रेलिया की धज्जियाँ उडाई. इसी वर्ष हरभजन सिंह और एंड्रे साइमंड्स के बीच तकरार हुई. "मंकी" या "मा की.." का विवाद उठा. सचिन ने हरभजन का साथ दिया. मैथ्यू हैडन ने कहा सचिन ने हरभजन को बचाने के लिए झूठ बोला.
2009: "बुजुर्ग" सचिन का बल्ला अभी भी जादू बना हुआ है. हैदराबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 175 रनों की यादगार पारी ने एक बार फिर सिद्ध किया कि सचिन तो एक ही है!
सचिननामा:
- 195 पारियाँ सचिन ने खेली टेस्ट क्रिकेट में 10000 रन बनाने के लिए
- 159 टेस्ट मैचों में 12773 रन बनाए जो एक रिकार्ड है
- 20 वर्ष का होने से पहले ही 5 शतक बनाए. ऐसा करने वाले वे अकेले खिलाड़ी
- अप्रैल 1990 से लेकर अप्रैल 1998 के बीच लगातार 186 मैच खेले. कभी टीम से बाहर नहीं हुए.
- 436 एकदिवसीय मैचों में 17178 रन बनाए हैं, यह भी रिकार्ड है
- एकदिवसीय मैचों में 91 अर्धशतक बनाए हैं, जी हाँ रिकार्ड ही है
- एक ही वर्ष में 1894 रन बनाए, यह भी रिकार्ड