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अनिद्रा का सबसे घातक असर: त्वरित निर्णय लेने में अक्षमता |
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स्वास्थ्य
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बुधवार , , 18 नवम्बर |
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एक सैनिक के लिए त्वरित निर्णय लेना बेहद जरूरी होता है. उसे अपने सामने आ रहे व्यक्ति की पहचान दुश्मन, अपने साथी या किसी सामान्य व्यक्ति में से एक के रूप में करनी होती है. इसके लिए उसे 1 सेकंड से भी कम का समय मिलता है. यदि वह निर्णय नहीं ले पाता तो बहुत सम्भव है कि सामने वाले व्यक्ति की गोली उसका सीना चीर दे.
यह तो हुई सैनिक की बात लेकिन हम सभी को अपने रोजमर्रा के काम में कई बार त्वरित निर्णय लेना होता है. दिमाग कई निर्णय अपने आप लेता है. ये निर्णय सेंकड के हजारवें हिस्से में लिए जाते हैं इसलिए निर्णय लेते समय समीक्षा करने का विकल्प नहीं मिलता है. दिमाग भूतकाल के अनुभवों और समझ के हिसाब से सामने घटित हो रही घटना की पहचान कर उस हिसाब से निर्णय ले लेता है. लेकिन यह तभी हो पाता है यदि उसे पूरा आराम मिला हो. और इसलिए वे व्यक्ति जो काम के बोझ अथवा अन्य कारणों से पूरी नींद नहीं ले पाते हैं, त्वरित निर्णय भी नहीं ले पाते हैं.
साइकोलोजी के प्रोफेसर टोड मेडोक्स और डेविड सीनेयर ने अनिद्रा के असर पर शोध किया है. उनका दावा है कि अनिद्रा से व्यक्ति त्वरित निर्णय नहीं ले पाता और हर घटना की बारिकी से जाँच करने लग जाता है, और इससे कई बार उसे नुकसान भी होता है. इससे संचार का समायोजन भी प्रभावित होता है.
अपने अभ्यास के लिए इस टीम ने यूनाइटेड स्टेट्स मिलेटरी एकेडमी के 49 कैडेटों का परीक्षण किया. इन कैडेटों को दो अलग अलग टीमों में बाँटा गया और इन्हें एक कार्य दिया गया. यह कार्य दो बार करना था. पहली बार कार्य करते समय कैडेटों को सोने दिया गया और दूसरी बार उन्हें जगाकर रखा गया.
इस अभ्यास से पता चला कि जो टीम अच्छी नींद ले पाई थी उनकी कार्यक्षमता में 4.3% की बढोत्तरी हुई थी लेकिन जो टीम सोई नहीं थी उसकी कार्यक्षमता में 2.4% की कमी आई थी. यह दर यूँ तो काफी कम लग सकती है लेकिन सैनिकों के लिए 1% की भी कमी या बढोत्तरी मायने रखती है. और यह बात केवल सैनिकों के लिए ही लागू नहीं होती बल्कि आम इंसानों के लिए भी यह दर काफी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है.
वैसे अनिद्रा के शरीर और दिमाग पर असर की दर अलग अलग लोगों में अलग अलग होती है, लेकिन अनिद्रा से दिमाग पर घातक असर हो सकता है यह सच है!
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