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देश पर हमला. आतंक की पाठशाला |
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विशेष
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गुरुवार , , 26 नवम्बर |
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तरकश ब्यूरो
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बंगलुरू, अहमदाबाद, जयपुर, दिल्ली में बम धमाके. मुम्बई पर हमला. ऐसा लगता
है मानो पूरा देश आतंकवादियों की गिरफ्त मे आ चुका है. कैसा होता है इन
आतंकवादियों का नेटवर्क, जो इस तरह के धमाको को अंजाम देते हैं.
आइए संक्षिप्त मे जानते हैं.
आम तौर पर इस तरह का नेटवर्क चार तरह के सब नेटवर्क से चलता है. इसमें होते है हेंडलर, स्लीपर सेन, बम मेकर और कोर टीम.
हेंडलर:
हेंडलर इन धमाकों के पीछे का दिमाग होता है. वह सारी व्यवस्था पर नजर रखता है. और टीम के बाकी के सदस्यों का ब्रेनवॉश करता है. उन्हे जिहाद के पाठ पढाता है और उन्हे यकीन दिलाता है कि वे जो कर रहे हैं वही सही है.
एक हेंडलर कई दूसरे और छोटे छोटे कोर समूहों का निदेशक हो सकता है. उदाहरण के लिए पुलिस का मानना है कि औरंगाबाद, मुम्बई और मालेगाँव धमाकों के पीछे एक ही हेंडलर शब्बीर अहमद मुशिर्रुल्ला है.
हेंडलर ही यह निर्णय लेता है कि कब और कहाँ धमाके करने हैं.
स्लीपर सेल:
स्लीपर सेल आपके और हमारे बीच मौजूद सामान्य लोग होते हैं. सामान्य दिनों वे सुशुप्त अवस्था में रहते है और सामान्य जिंदगी जीते हैं. वे छात्र अथवा कर्मचारी हो सकते हैं. वे तब तक हरकत मे नही आते जब तक कि हेंडलर उनसे सम्पर्क ना कर ले. हेंडलर द्वारा सम्पर्क किए जाने के बाद वे बाकी की कोर टीम को सक्रिय सहयोग देते हैं. पूरे मिशन के दौरान उनका काम होता है कोर टीम को पुलिस की नजरों से छुपाना और मिशन को कामयाब बनाना.
एक अनुमान के अनुसार भारत में इस समय स्लीपर सेल का एक बहुत बडा नेटवर्क मौजूद है.
बम मेकर:
बम मेकर का काम तरह तरह के बम बनाना होता है. ये लोग प्रशिक्षण प्राप्त होते है तथा क्रुड बम से लेकर आर.डी.एक्स. तक की जानकारी रखते हैं. तथा परिस्थिति के हिसाब से बम बनाकर कोर टीम को देते हैं. किस तरह के बम बनाना है यह निर्णय हेंडलर लेता है तथा बम मेकर का कार्य हेंडलर को वह बम बनाकर देना होता है. ये लोग समय के साथ खुद की जानकारियाँ बढाते रहते हैं.
कोर टीम:
कोर टीम के सदस्य सबसे खतरनाक और समर्पित होते हैं. उन्हे अपनी जिंदगी की परवाह नहीं होती है. वे हथियारों से बखूबी काम ले सकते हैं तथा बहुत ही चालाक होते हैं. वे सामान्य लोगों के बीच आसानी से घुलमिल जाते हैं. शातिर दिमाग के ये कार्यकर्ता बमों को सही स्थान पर लगाते हैं. सामान्य तौर पर कोर टीम के सदस्य उस शहर या राज्य के नही होते हैं जहाँ बम लगाए जाने हों. कोर टीम के अधिकतर सदस्य विदेशी आतंकवादी भी होते हैं.
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