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जानिए क्या होती है पाँवों की भाषा |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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शुक्रवार , , 04 दिसम्बर |
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कहते हैं बातें सिर्फ जुबान से ही नहीं होती, आँखे भी बहुत कुछ बोल देती है.
वास्तव में होता यह है कि हमारा शरीर हमारी मनोदशा के हिसाब से व्यवहार करने लग जाता है और इसे "बॉडी लैंगुएज" या शारीरिक भाषा कहते हैं. जब हम किसी की तरफ आकर्षित होते हैं या किसी की बात में रूची आने लगती है तो हमारी आँखों मे एक चमक आ जाती है और चेहरे पर मुस्कान इससे सामने वाला व्यक्ति समझ जाता है कि हम उसमें रूची ले रहे हैं. इसी तरह से व्यक्ति के हाथ भी उसकी मनोदशा का वर्णन कर देते हैं.
लेकिन ब् पाँव इंसान की मनोदशा के राज खोल देते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा चेहरा और हमारे हाथ हमारे मन में चल रही उथल पुथल को जाहिर कर देंगे इसलिए हम उन पर नियंत्रण लाने की कोशिश करने लग जाते हैं, लेकिन हम पाँवों की तरफ उतना ध्यान नहीं देते.
ब्रिटेन के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक प्रोफेसर ज्यौफ बीटी ने अपने अभ्यास में पाया कि लोग किस तरह से जाने - अनजाने अपने पाँवों के माध्यम से अपनी मनोदशा का वर्णन कर देते हैं. वे कुछ उदाहरण देकर इसे स्पष्ट करते हैं.
जैसे कि यदि यह जानना हो कि कोई महिला आपसे प्रभावित हो रही है कि नहीं, आप उसके पाँवों को देखिए. यदि उस महिला ने अपने पाँव खुले रखे हैं तो इसका अर्थ है कि वह आप में अथवा आपकी बातचीत में रूची ले रही है. यदि वह महिला बैठी हुई है और उसने अपने पाँव सटाकर या पीछे की तरफ मोड़कर रखें हैं तो इसका अर्थ यह है कि उसे आप में रूची नहीं है और वह असहज है.
लेकिन पुरूष ऐसा नहीं करते, इसलिए महिलाएँ यही युक्ति नहीं आजमा सकती. लेकिन फिर भी वह यह जान सकती है कि उसके साथ खड़ा पुरूष उसमें रूची ले रहा है या नहीं. बातचीत के दौरान यदि पुरूष बार बार अपने पाँवों को हिलाए तो इसका मतलब है कि वह असहज है और जल्द से जल्द उस स्थिति से अलग होना चाहता है. ऐसे में कोई महिला समझ सकती है कि उस पुरूष को उसकी बातों में अथवा खुद उसमें कोई रूची नहीं अथवा वह डर रहा है या असहज हो रहा है.
लेकिन महिलाएँ इसका उलट करती हैं. यदि बातचीत के दौरान कोई महिला अपने पाँवों को एकदम स्थिर रखे तो इसका अर्थ यह है कि वह असहज हो रही है तथा अंदर से घभरा रही है.
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