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किसी की बात बुरी लगी? अपने जीन को दोष दीजिए |
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विज्ञान
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शनिवार , , 05 दिसम्बर |
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हर व्यक्ति का स्वभाव अलग अलग होता है. किसी को कोई चीज अच्छी लगती है तो किसी अन्य व्यक्ति को वही चीज बुरी लगती है. कोई व्यक्ति हसमुख होता है और किसी की बात का जल्दी से बुरा नहीं मानता लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जिनसे बात करते समय काफी सावधान रहना पड़ता है कि कब उन्हें कोई बात बुरी लग जाए.
ऐसा क्यों होता है? यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के मार्कस हीलिग का अभ्यास बताता है कि इसके लिए इंसान के शरीर में स्थित ओपियड रीसेप्टर के जीन में बदलाव जिम्मेदार है. ओपियड रीसेप्टर दर्दनिवारक का काम करता है. यह ना केवल शारीरिक बल्कि मानसिक कष्ट को भी दूर करता है. लेकिन इसके जीन में यदि थोड़ा बदलाव हो जाए तो भावनात्मक कष्ट के निवारण के लिए यह उतना कारगर सिद्ध नहीं हो पाता.
मार्कस की टीम ने अपने अभ्यास के लिए कुछ लोगों को चुना और उनसे पूछा कि जब कोई उनका बहिष्कार करता है तो वे कैसा महसूस करते हैं. इन लोगों को एक वीडियो गेम खेलने को भी कहा गया जिसमें कम्यूटर जनरेटेड खिलाड़ी मूल खिलाड़ी को टॉस नहीं करने देते थे. संशोधकों ने पाया कि जिन लोगों ओपियड रीसेप्टर में बदलाव हुआ था उन लोगों ने सामान्य लोगों की अपेक्षा कड़ा विरोध दर्ज करवाया और उन्हें बुरा भी बहुत लगा. दूसरे शब्दों में उन्होनें भावनात्मक रूप से गहरी चोट महसूस की.
दिमाग का जो हिस्सा शारीरिक चोट के प्रति सवेंदना प्रगट करता है वही हिस्सा सामाजिक बहिष्कार के प्रति भी सवेंदना प्रगट करता है. यानी भावनात्मक रूप से चोट खाया यदि कोई व्यक्ति अधिक अपमानित महसूस करे तो वह अपने जीन को दोष दे सकता है.
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