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यदि समस्त जंगल खत्म हों जाएँ तो क्या ओक़्सिजन भी खत्म हो जाएगा? |
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पर्यावरण
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सोमवार , , 25 फ़रवरी |
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तरकश ब्यूरो
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| यदि दुनिया से सभी जंगलों का सचमुच मे नाश हो जाए तो क्या प्राणवायु कही जाने वाली ऑक्सीजन खत्म हो सकती है? |
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एक अध्ययन के अनुसार यह
बात सही है कि जंगलों का नाश होना प्रकृति के संतुलन के लिए ठीक नही है
परंतु यदि ऑक्सीजन की उपलब्धता की ही बात हो तो जंगलों का नाश होने से कोई
खास फर्क शायद ना भी पडे.
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इस समय दूनिया में ग्लोबल वार्मिन्ग या वैश्विक गर्मी की चर्चाएँ जोर पकडती जा रही हैं. इस समय भारत मे कडाके की ठंड पड रही है. यह ठंड सामान्य से अधिक है और उसी तरह से पूरी दूनिया मे गर्मी भी बढती जा रही है.
मनुष्य अपनी निजी स्वार्थों के लिए जंगलों का नाश करने मे तुला हुआ है. पुरी दूनिया के जंगल तेजी से खत्म हो रहे हैं. जिस तेजी से पेडो को काटा जा रहा है उतनी तेजी से पेड लगाए नही जाते हैं. इस बीच एक सवाल यह उठता है कि यदि दुनिया से सभी जंगलों का सचमुच मे नाश हो जाए तो क्या प्राणवायु कही जाने वाली ऑक्सीजन खत्म हो सकती है?
एक अध्ययन के अनुसार यह
बात सही है कि जंगलों का नाश होना प्रकृति के संतुलन के लिए ठीक नही है
परंतु यदि ऑक्सीजन की उपलब्धता की ही बात हो तो जंगलों का नाश होने से कोई
खास फर्क शायद ना भी पडे. क्योंकि पृथ्वी के फेफडे कहे जाने वाले अमेज़न के जंगल सहित तमाम वनस्पति सृष्टि प्रकाशसंस्लेषण के द्वारा मात्र 10% ऑक्सीजन ही मुक्त करती है. बाकी की 90% आपुर्ति समुद्री शैवाल जैसे जीव पैदा करते हैं.
इसलिए जंगलों का नाश होने से ऑक्सीजन वायु के खात्मे की कोई सम्भावना नही है. लेकिन जंगलों का नाश प्राकृतिक संतुलन को बिगाड रहा है और यह हमारे लिए खतरे की घंटी जरूर है.
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