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राम की गंगा कितनी मैली!
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 5
बेकारअति उत्तम 
पर्यावरण
गुरुवार , , 04 अक्टूबर
Team Tarakash

 


 

 

 

 

 

 

 

gangaश्रद्धालुओं का एक बहुत बडा वर्ग ऐसा है जो यह मानता है कि गंगा एक अलौकिक नदी है जिसका पानी कभी गंदा नही हो सकता है. यह सच है कि हिन्दू धर्म में गंगा का बहुत महत्व है. और हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए गंगा का महत्व माँ के जितना है, तभी इसे श्रद्धा से गंगा मैया पुकारा जाता है.

गंगा भारत की सबसे बडी नदियों मे से एक और निर्विवाद रूप से सबसे प्रसिद्ध और श्रद्धा की दृष्टि से सबसे पवित्र नदी है. लेकिन दुखद बात यह है कि गंगा सबसे प्रदूषित नदियों में से भी एक है. गंगा हिमालय की चोटी से निकल कर मैदानों के रास्ते बंगाल की खाडी में मिल जाती है. यह अन्य नदियों की तरह ही एक लंबी परंतु सामान्य नदी है. इसका पानी अलौकिक नही है.

हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के अणुओं को मिलाकर कर बनने वाला पानी प्राकृतिक रूप से कभी भी बिगड नही सकता है. लिबीया जैसा कई अफ्रीकी देश सहारा के भूगर्भ में हजारों साल से दबे रहे पानी को निकालकर इस्तेमाल में ला रहे हैं. यानि कि जब तक पानी मे कोई अशुद्धि ना मिलाई जाए वह शुद्ध ही रहता है. गंगा का पानी भी शुद्ध तभी तक रहता है जब तक कि उसमें कुडा, मल मूत्र, गन्दगी और रसायानिक अम्ल ना मिला दिया जाए.

आज तेजी से फैल रहे प्रदूषण ने गंगा की सूरत बिगाड दी है. रसायन बनाने वाले कारखानों, चमडा फ़ैक्टरियों, कागज मिलों का 2 करोड 90 लाख लिटर प्रदूषित पानी हर दिन गंगा में मिल रहा है. रोज तकरीबन 60000 लोग गंगा स्नान कर रहे हैं. इसके अलावा इसे माँ की तरह मानने वाले और पूजने वाले इसके भक्त जन ही वाराणासी और इलाहाबाद के संगम पर इसे प्रदूषित करने में कोई कसर नही छोड रहे.

कुछ लोग तो शवों का अग्निसंस्कार करने की बजाय उसे युँ ही गंगा में बहा देते हैं. इसके अलावा मूर्तियां, फूलपत्रियाँ, दिए आदि लाखों की संख्या में गंगा मे बहाए जा रहे हैं.

गंगा लगातार प्रदूषित होती जा रही है. राज्य सरकारें हों या केन्द्र सरकारें, वे अनेक योजनाएँ बनाती हैं जो कागज़ों मे ही रह जाती है. सरकार की वोटबेंक की राजनीति और श्रद्धालुओं की घोर लापरवाही देश की इस पवित्र और श्रद्धेय नदी को विनाश की ओर ले जा रही है.




 


टिप्पणियाँ (2)add
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द्वारा प्रेषित तानसेन् , अक्टूबर 04, 2007
बरबाद कर दी नदी, गंगा का दूषित पानी अमृत समझ कर पीलेगें लेकिन टंकी का पानी छ्न्नी लगा के पीएंगे! अरे भई पानी मे गंद मिलाओगे तो पानी गंदा नही होएगा तो फिर क्या होएगा। गंगा मे नहाने वालो को ,ऊसमे गंद मिलाने वालो को कोई फर्क नही पडता, ये लोग तो जानते भी नही होंगे की गंगा नदी प्रदूषित हो रही है। अगर भारत सरकार नदीयो की चिंता करती तो गंगा के तटों के किनारे बिजली के नंगे तार खडे कर देती। फिर कोई मलमूत्र, शव, थैलियां, कूडा करक़ट नही मिला पाता। अब ईन जनों का अन्ध विश्वास खत्म करें भी तो कैसे करे... ईंसान पूरा दम लगा के बरबाद कर रहा है प्राकृतिक धन। अगर हम प्रकृति की परवाह नही करेंगे तो प्रकृति हमारी परवाह नही करेगी।
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द्वारा प्रेषित vivek , जनवरी 17, 2008
THESE DEROGATORY COMMENTS ON GANGA MAIYA HAVE HURT MY SENTIMENTS................ TO EXPRESS MY FEELINGS I WILL FILE PIL, BURN PUBLIC PROPERTY, ORGANIZE RALLIES, INCITE RIOTS, KILL PEOPLE, DEMOLISH OTHER COMMUNITY'S' ESTABLISHMENTS,................. NO ONE CAN STOP ME ...... OUR CULTURE HAS BEEN CHALLENGED, I HAVE RIGHT TO DO ANYTHING I WANT. YOU BATTER APOLOGIZE FOR YOUR INSULTING REMARKS ON OUR HERITAGE.
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