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हिमालय के ग्लेशियर समाप्त हो रहे हैं |
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पर्यावरण
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गुरुवार , , 20 मार्च |
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तरकश ब्यूरो
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| पृथ्वी के जीवनचक्र मे भारी फेरबदल होने की आशंका है |
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सयुंक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिमालय के ग्लेशियर धीरे धीरे अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं. बढ रही गर्मी की वजह से ये ग्लेशियर पिघल रहे हैं और आगामी दस वर्षों मे वे अपना अस्तित्व खो सकते हैं.
इस वजह से भारतीय उपमहाद्विप की कई महत्वपूर्ण नदियाँ जैसे कि गंगा, ब्रह्मपुत्र आदि जो कि वर्तमान समय मे बारहों महिने बहती रहती हैं, आने वाले समय मे मौसमी नदियों का रूप ले सकती है.
इसका हिमालय और हिन्दूकुष पर्वतमाला की तराई क्षैत्र मे रहने वाले लोगों पर घातक असर पड सकता है. नदियों का पानी सुख जाने से पानी की भारी किल्लत हो सकती है.
विश्वभर की पर्वतश्रृंखलाओं के ग्लैशियर भूतकाल की अपेक्षा दुगनी गति से पिघल रहे हैं. 2006 मे पिघलने की औसत मात्रा 1.4 मिटर जितनी हो गई थी जबकि 1980 मे यह मात्र 0.3 मिटर ही थी.
बताया गया है कि सन 2040 आते आते पृथ्वी का तापमान कम से कम 3 डिग्री तक बढ जाएगा और इससे बर्फिले पहाडो की बर्फ भारी मात्रा मे पिघल कर नदियों मे बाढ भी लाएगी. इससे पृथ्वी के जीवनचक्र मे भारी फेरबदल होने की आशंका है.
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