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जानवरों के व्यवहार का अध्ययन करेंगे रोबोटिक जानवर |
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पर्यावरण
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सोमवार , , 05 मई |
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तरकश ब्यूरो
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| रोकी नामक रोबोट गिलहरी का नियंत्रण एक लैपटॉप पर इंस्टॉल किए गए सॉफ्टवेर से किया जाता है. |
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दूनिया भर में जानवरों के रहन सहन और उनके जीवन के व्यवहार के उपर कई तरह के प्रयोग होते रहे हैं और हमें जानवरों के जीवन की कई आश्चर्यजनक बातें पता चलती रहती है. लेकिन आज भी कई जानवरों के जीवन का गहन अध्ययन करने मे हम असफल रहे हैं. कुछ जानवर बहुत चपल होते हैं और उनके निवास स्थान तक पहुँच पाना असम्भव होता है. गिलहरी जैसे छोटे जानवर बहुत संवेदनशील होते हैं और इंसानों के करीब आने से पहले ही वे अपने स्थान से भाग जाते हैं. इसलिए उनका अध्ययन करना कठिन हो जाता है.
लेकिन अब इसका हल निकाल लिया गया है. अमरीका की हैम्पसायर कॉलेज इंजीनियर सारा पोर्टन द्वारा बनाई गई एक रोबोट गिलहरी "रोकी" अब गिलहरियों के पास जाकर उनके रहन सहन का अध्ययन कर रही है.
इस गिलहरी के अंदर एक कैमरा और एक शक्तिशाली माइक्रोफोन लगा है. इसके अलावा इसमें छोटे स्पीकर भी लगे हुए हैं जिसके माध्यम से गिलहरियों की पहले से रिकॉर्ड की गई आवाजों को प्रेषित किया जाता है.
रोकी नामक रोबोट गिलहरी का नियंत्रण एक लैपटॉप पर इंस्टॉल किए गए सॉफ्टवेर से किया जाता है. नियंत्रक इस रोबोट को काफी दूर से नियंत्रित कर सकते हैं, जिससे कि वास्तविक गिलहरियों को इंसानों की मौजूदगी का अहसास ना हो.
इस प्रयोग से कई बार नाकामी हाथ लगी है. कई बार गिलहरियाँ रोकी के पास आने से पहले ही भाग खडी होती हैं. लेकिन कई बार वे रोकी के पास चली आती हैं और उसे वास्तविक गिलहरी समझ बैठती हैं. यह प्रयोग अभी तक आंशिक रूप से ही सफल हुआ है लेकिन इससे भविष्य की सम्भावनाओं को बल मिला है.
संशोधक इस समय गिलहरियों की आवाजों का विश्लेषण भी कर रहे हैं क्योंकि पहले से रिकॉर्ड की गई आवाजों के क्या मतलब है यह अभी तक ज्ञात नही है. इसलिए रोकी द्वारा प्रेषित की गई आवाजों से कई बार गिलहरियाँ भाग खडी होती हैं और कई बार चौकन्नी हो जाती हैं.
भविष्य में मात्र गिलहरी ही नहीं अन्य कई जानवरों के भी रोबोटिक संस्करण बनने की उम्मीद है. और इससे कई नई जानकारियाँ मिल सकती हैं.
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