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जानिए गूगल क्रोम के बारे में
इंटरनेट
बुधवार , , 03 सितम्बर
तरकश ब्यूरो



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गूगल ने अपना ऑपन सॉर्स वेब ब्राउजर "क्रोम " का पहला बीटा संस्करण जारी किया है. क्रोम वेब ब्राउज़र वर्तमान श्रेणी के सभी वेब ब्राउजरों से उन्नत बताया जाता है.

  • गूगल क्रोम टेब सिस्टम को एक नई पहचान दे रहा है, अन्य ब्राउज़र के विपरीत गूगल क्रोम में हर टेब का अपना खुद का एड्रेस बार होता है. और प्रत्येक टेब को बंद करते ही उस टेब मे खुली साइट द्वारा रोकी जा रही सारी मेमरी खत्म हो जाती है. इससे सिस्टम के पास मेमरी बढ जाती है और अन्य साइटें जल्दी खुलती है.
  • गूगल क्रोम में हर टेब की अपनी अलग प्रोसेस होती है. तस्वीरें, एचटीएमएल, फ्लेश और जावा जैसी अलग अलग अप्लिकेशन अलग अलग खुलती हैं, जिससे किसी एक अप्लिकेशन के ना चलने पर भी पूरी साइट बंद नही होती है.
  • चुँकि हर टेब की अपनी अलग मेमरी होती है, इससे किसी एक साइट के जाम हो जाने से पूरा ब्राउज़र बंद नहीं होता है और केवल उस टेब को बंद किया जा सकता है.
  • अन्य ब्राउज़रों के विपरीत क्रोम मे टेब यूआरएल बार के उपर की तरफ होती है. हालाँकि ओपेरा ने नए संस्करण मे भी टेब यूआरएल बार के उपर की तरफ है.
  • क्रोम में एड्रेस या यूआरएल बार को ओमनी बार कहा जाता है.
  • ओमनी बार आपके द्वारा किए गए सर्च को याद रखता है और फिर से की वर्ड डालने पर वांछित पन्ने दिखा देता है.
  • ओमनी बार केवल यूआरएल ही नहीं, आपके द्वारा सर्फ की जा रही साइट से संबंधित साइटों के पते भी देता है.
  • हर बार क्रोम को खोलने पर वह आपके द्वारा पिछली बार खोली गई 9 साइटों की थम्बनेल दिखाता है और दाय़ीं तरफ आपके द्वारा सर्च किए गए कीवर्ड दिखाता है.
  • क्रोम वेबकिट का इस्तेमाल कर बनाया गया है, एपल सफारी भी इसी कोड पर आधारित है.
  • क्रोम पूरी तरह से ऑपन सॉर्स प्रोग्राम है, यानि कि कोई भी इसका कोड इस्तेमाल कर सकता है.
  • गूगल क्रोम एक नया जावास्क्रिप्ट वर्चुअल मशीन का उपयोग करता है जो वर्तमान अन्य वर्चुअल मशीनों से तेज है.
  • गूगल क्रोम में टास्क मेनेजर है, जिससे आपको पता चलता है कि कौन सी साइट कितनी मेमरी खा रही है.
  • गूगल क्रोम में प्राइवेट ब्राउज़िंग की जा सकती है. यदि आप इंकोग्निटो टेब खोलकर सर्फिंग करेंगे तो गूगल क्रोम उस पन्ने को याद नहीं रखेगा.

इसके अलावा भी गूगल क्रोम मे कई अन्य सुविधाएँ हैं. यदि आप किसी अन्य सुविधा के बारे मे लिखना चाहें तो कृपया टिप्पणी करें.




टिप्पणियाँ (4)add
..
द्वारा प्रेषित amit gupta , सितम्बर 03, 2008
अन्य ब्राउज़रों के विपरीत क्रोम मे टेब उपर की तरफ होती है. हालाँकि ओपेरा ने नए संस्करण मे भी टेब उपर की तरफ है.


कौन से अन्य ब्राउज़रों की बात कर रहे हो जनाब यह भी बता दो। मैंने तो देखा है कि इंटरनेट एक्सप्लोरर में टैब ऊपर ही होते हैं, फायरफॉक्स में भी टैब ऊपर ही होते हैं(मैंने उनको नीचे करने के लिए एक प्लगिन लगा रखा है), ऑपरा में टैब ऊपर ही आते हैं लेकिन उनको नीचे किया जा सकता है, सफ़ारी में भी टैब ऊपर ही होते हैं। इन चार ब्राउज़रों के बारे में तो विश्वास के साथ इसलिए कह सकता हूँ क्योंकि प्रयोग किया है, बाकियों के बारे में नहीं जानता यदि आप कॉनकरर, गैलियन, सीमंकी आदि की बात कर रहे हों तो! smilies/smiley.gif

क्रोम वेबकिट का इस्तेमाल कर बनाया गया है, मोज़िला फायरफॉक्स और सफारी भी इसी कोड पर आधारित है.


सफ़ारी ही वेबकिट पर आधारित है। फायरफॉक्स गेको इंजन को प्रयोग करता है जिसको नेटस्केप ने बनाया था और जो कि बाद में मोज़िला का हो गया। इंटरनेट एक्सप्लोरर भी गेको इंजन को ही प्रयोग करता है।
http://en.wikipedia.org/wiki/Gecko_(layout_engine)

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द्वारा प्रेषित tarakash beuro , सितम्बर 04, 2008
अमितजी,

"उपर की तरफ" से हमारा आशय है, यूआरएल बार के उपर. फायरफोक्स और इंटरनेट एक्स्प्लोरर मे यह यूआरएल बार के नीचे होता है. क्रोम ने टेबिंग सिस्टम को एक नया आयाम दिया है.

यह सही है कि फायरफोक्स वेबकिट नहीं बल्कि गेको पर आधारित है. सुधार के लिए धन्यवाद.
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गूगल क्रोम के पंगे
द्वारा प्रेषित आशीष श्रीवास्तव , सितम्बर 04, 2008
1. बरहा ढंग से काम नही करता, सयुंक्ताक्षर जैसे भ या भी टाईप नही हो रहे है ! smilies/angry.gif
2. वेब साईट जो फ्लेश का ज्यादा प्रयोग करती है, मेमोरी खा रही है ! ये पंगे फायरफाक्स मे भी है !
3. पाप अप ब्लाकर की सेंटीग फायरफाक्स या आई ई जैसी सुविधाजनक नही है।
4. डायनामीक फान्ट वाली साईटे जैसे प्रभासाक्षी मे हिन्दी दिखायी नही देती !
5. UTF हिन्दी की रेंडरींग उतनी अच्छी नही है जितनी आई ई और प्रभासाक्षी की है !

कुछ्ह अच्छाईयां भी
1. क्रोम अपने साथ हिन्दी लेकर आया है। मेरा कम्प्युटर पर हिन्दी लीप इंस्टाल है, क्रोम के सारे के सारे मेनु और डायलाग बाक्स हिन्दी मे दिखायी दे रहे है ।
2. वेब पन्ने तेजी से लोड हो रहे है !
3.हल्का फुल्का लग रहा है !
4. गूगल स्टाईल लूक एन्ड फील (रंग रूप ) अच्छा लग रहा है
5. ओमनी बाक्स सबसे बढ़ीया है, अब गूगल.काम पर जाना बंद ! वैसे जाता भी नही था, मेनुबार पर जो बक्सा लगा होता था ! smilies/grin.gif

वैसे ये बीटा है देखते है आगे क्या होता है । मुझे डर सिर्फ इस बात का है ये आई ई को भगाने की बजाये फायरफाक्स को ना भगा दे ! जैसे फायर पाक्स ने आई ई की जगह नेटस्केप का ही सफाया कर दिया था !
smilies/angry.gif
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एसएमएस से केवल उन्हें ही असुविधा होती है जो पढ़ना और मिटाना नहीं जानते
द्वारा प्रेषित धनराज वाधवानी, राजवाड़ा, इन्दौर म.प्र. , सितम्बर 05, 2008
एसएमएस से केवल उन्हें ही असुविधा होती है जो पढ़ना और मिटाना नहीं जानते

असल में एसएमएस से केवल उन्हें ही असुविधा होती है जो पढ़ना और मिटाना नहीं जानते। जब उन्हें यह आ जाएगा तो फ़िर उन्हें लगेगा कि यह तो एक अनचाहे पोस्ट कार्ड की अपेक्षा अच्छा है। कितने अच्छे ऑफ़र मिलते हैं व कितना सकून मिलता है किसी से एसएमएस पाकर। हॉ यह जरूर है कि अनचाहा फ़ोन काल जरूर परेशान कर सकता है क्योंकि सामने वाले को जवाब देना जरूरी हो जाता है और तुरंत फ़ोन रिसीव करना भी जरूरी लगता है। जबकिस एसएमएस में ऐसा नहीं है वह तो लेटर बॉक्स की तरह के इनबॉक्स में आकर पड़ा रहता है व सुविधा अनुसार रीड किया जा सकता है। असल में अनचाहे काल व एसएमएस में अत्यधिक अंतर होता है। इन दोनो के लिये यानी एसएमएस और काल के लिये अलग अलग माफ़द्ण्ड होने चाहिये। अनचाहे होने पर भी। डू नॉट काल रजिस्ट्री भी दोनो के लिये अलग अलग होना चाहिये। - धनराज वाधवानी, राजवाड़ा , इन्दौर म.प्र.


धनराज वाधवानी, राजवाड़ा, इन्दौर म.प्र.
यह ई-मेल देखने के लिये कृपया जावास्क्रिप्ट को चालू करें
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