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विश्व दर्पण
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मंगलवार , , 25 मार्च |
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तरकश ब्यूरो
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भूटान अब लोकतंत्र की राह पर बढ चुका है.
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सोमवार का दिन भूटान के इतिहास के लिए स्वर्णिम युग की शुरूआत का दिन था. सुबह से ही लोग लम्बी लम्बी कतारों मे खडे थे. ये लोग पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे थे. भूटान अब लोकतंत्र की राह पर बढ चुका है.
कुछ लोग इससे बहुत दुखी हैं कि सैंकडो वर्ष पुरानी राजाशाही प्रणाली समाप्त हो रही है, वहीं कुछ लोग बेहद उत्साहित भी हैं. एक भूटानी व्यक्ति ने बताया कि, वे बहुत खुश हैं लेकिन डरे हुए भी हैं कि नई प्रणाली कैसे काम करेगी.
इस सब की शुरूआती वर्तमान राजा के पिता जिग्मी सिंगे वांगचुक ने की थी. अपने बेटे की ईच्छा का सम्मान करते हुए उन्होने देश मे लोकतांत्रिक प्रणाली लागु करने की शुरूआत की थी. उन्होने रोजमर्रा का कामकाज सम्भालने के लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया था. उन्होने भरोसा दिलाया था कि देश मे जल्द ही चुनाव होंगे और लोग अपने प्रतिनिधि खुद चुनेंगे.
आश्चर्य की बात यह है कि स्थानीय लोग ही इस बात से अधिक उत्साहित नही थे, क्योंकि राजाशाही प्रणाली से वे संतुष्ट थे. भूटान की दोनों राजनैतिक पार्टियाँ जनतंत्र नही चाहती थी. एक पार्टी के प्रतिनिधि ने बताया कि हम पर लोकतंत्र थोप दिया गया है. यह हमारे सम्राट की ईच्छा थी.
दोनों पार्टियों के घोषणापत्र की शुरूआत "महामहिम की महान सोच" से शुरू होती है. लोग अभी भी अपने राजा से खुश हैं, परंतु देश अब लोकतांत्रिक है.
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