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चली चली रे पतंग मेरी चली रे... |
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धर्म एवं मान्यताएँ
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बुधवार , , 10 जनवरी |
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पंकज बेंगाणी
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मुख्यमंत्री मोदी को भी पतंग उडाने का शौख है
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यह सब पेशेवराना तरिके से भी होता है. कोई कनिया डाने मे विशेषज्ञ है तो कोई ढील का सुल्तान और कोई खेंच का उस्ताद.
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अगर आप गुजरात में हैं तो यकीनन आप इस दिन का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि यह एक विशेष दिन होता है। इस दिन अगर आप आसमान की तरफ नजर उठाकर देखेंगे तो दंग रह जाएँगे क्योंकि आपको आकाश रंग बिरंगा नजर आएगा। फिर अगर आप अपनी नजरों को थोडा सा नीचे की तरफ लाएँगें तो आपको हर घर की छत पर लोगों का हजूम दिखाई देगा। जी नहीं, गलियों में दंगे फसाद नहीं हो रहे होंगे परंतु आकाश में दंगल जरूर शुरू हो चुकी होंगी।
मैं बात कर रहा हुँ मकर सक्रांति या फिर उत्तरायण की। इस दिन सूरज अपनी दिशा को बदलना शुरू करता है, और उत्तर दिशा की तरफ पलायन करने लगता है। इसी पर से उत्तरायण नाम पडा होगा। इस दिन लोग गंगा में स्नान करते हैं और सूरज का जलाभिषेक करते हैं।
चूँकि यहाँ त्योहार सर्दीयों मे आता है, इस दिन बनने वाली मिठाइयाँ भी कुछ इस तरह की होती हैं जो शरीर को गर्म रखे और स्फूर्ति दे, जैसे कि तिल के लड्डु।
लेकिन यदि आप गुजरात में हैं तो आप एक और विशेष नास्ते का स्वाद ले सकते हैं जिसे उँधियु कहा जाता है। उन्धियु विभिन्न सब्जीयों और हरी दाल के मिश्रण से बनाया जाता है और पूरी के साथ खाया जाता है।
पर असली रोमांच तो पतंगबाजी का ही है। क्या नर क्या नारी, बच्चे और बुढे सभी छतों पर जमा हो जाते हैं, संगीत का इंतजाम किया जाता है, आँखो पर काले चश्मे और उँगलियों मे टेप चिपकाई जाती है और फिर पतंगबाजी का कभी खत्म ना होने वाला दौर शुरू हो जाता है.
और यह सब पेशेवराना तरिके से भी होता है. कोई कनिया डाने मे विशेषज्ञ है तो कोई ढील का सुल्तान और कोई खेंच का उस्ताद.
अहमदाबाद मे 13 से 15 जनवरी तक राज्य सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव भी मनाया जाता है जहाँ दूनिया भर के पतंग विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं.
तो इस 14 और 15 जनवरी को यदि आपको आकाश का रंग नीला ना दिखाई दे, लोग सडकों पर कम और छतों पर ज्यादा दिखाई दे, अनोखे और रंग बिरंगे पतंगों से आकाश भरा हुआ दिखाई दे और दुःखद रूप से पक्षियों की शामत आई हुई भी महसूस हो तो यकिनन आप गुजरात मे ही हैं.
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