मँझली – बड़की – छुटकी और काले चश्मे वाले दादामुनी

सितम्बर 1959 को ऑल इंडिया रेडियो के कुछ इंजीनियरों ने मात्र प्रयोग करने के लिए सप्ताह में दो बार टीवी प्रसारण शुरू किया था. वह दूरदर्शन की शुरूआत थी. 50 साल का हो चुका यह नेटवर्क आज अपनी प्रासंगिकता खो रहा है.

आज जमाना बदल गया है और लोग दूरदर्शन को भूलने लगे हैं. सच भी है ना आज कौन ऐसा है जो दूरदर्शन के बोझिल कार्यक्रम देखना चाहेगा.

लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो याद आते ही दूरदर्शन का सुनहरा काल याद आने लगता है.  काला चश्मा पहने अशोक कुमार, बसेसर राम, मँझली – बड़की – छुटकी, कृषि दर्शन, चित्रहार, सलमा सुल्तान, शम्मी नारंग, लाहौरी राम, गुरू, खोपड़ी, शांति, चन्द्रकांता…

सूची लम्बी है, आप भी जोड़िए.

[तरकश पर दूरदर्शन के सुनहरे काल पर आधारित विशेष लेख पढें]

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