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मैं जब बहुत छोटी थी तब मैं और मेरे भाई बहिन हमेशा शाम को बैठकर नये-नये किस्से-कहानियाँ सुनने की जिद किया करते थे उनमें बहुत किस्से ऐसे होते थे जो हमें उस वक्त याद होते थे पर बाद में भूल जाया करते थे और फिर से कोई उन्हीं किस्सों को सुनाता तो लगता इन किस्सों से हमारी मुलाकात पहले भी कहीं हुई है, पर कहाँ? याद नहीं आता था। दिन पंख लगाकर उड़ते गये और मैं उन्हीं पखों पर सवार होकर,अपनी धरती से दूर, परदेस में आ बसी पर कहीं, मेरे दिल के कोने में वो बचपन की यादें आज भी वैसे ही ज़िन्दा हैं जैसे कि सच्चा प्यार, सच्ची दोस्ती हमेशा ज़िन्दा रहती है। उन किस्सों मे से एक किस्सा मैं आपको भी सुनाती हूँ जो मैं आज तक नहीं भूली। हुआ यूँ कि एक मेज़र साहब थे उनको आर्मी से बहुत प्यार था, उन्होंने अनेक लडाईयाँ देश के लिए लड़ीं, अनेक मैडल उनको मिले। जब मेज़र साहब का बेटा बड़ा हुआ तो उनका इकलौता अरमान मन में हिचकोले खाने लगा कि वह अपने बेटे को भी आर्मी ही ज्वाइन करायेंगे पर उनके साहब जादे को आर्मी-वार्मी में कोई दिलचस्पी नहीं थी, पर अपने पिता को इन्कार का मतलब उनके क्रोध का भाजन बनना था, जिसको सोचते ही उनकी रूह काँप जाती थी। अब वो समय आखिरकार आ ही गया जब उनके पिताश्री उनको आर्मी में सलैक्शन के लिये ले गये 'अब मरता क्या न करता' बेटे साहब को भी जाना ही पड़ा, अब उनसे इन्टरव्यू के समय पहला सवाल दागा गया, ठीक उसी तरह, जिस तरह दुश्मन को देखते ही किसी भी देश के जवान गोली दाग दिया करते हैं। खैर, पूछा गया कि- "आप आर्मी क्यों ज्वाईन करना चाहते हैं? साहबजादे ने कहा- "मैं वो मैं… तो.. मैं तो…. नहीं करना चाहता परन्तु मैं अपने पिताजी की इच्छा से यहां आया हूँ क्योंकि उनका अरमान है कि मैं आर्मी ज्वाइन करूँ। " क्यों?" आर्मी आफिसर ने पूछा वह बोला कि- "मेरे पिताजी खुद एक आर्मी आफिसर हैं।" अच्छा क्या नाम है आपके पिताजी का? नाम बताने पर आफिसर चौंका और बोला अच्छा तो तुम उनके बेटे हो वो तो हमारी आर्मी की शान हैं। इतने बड़े, इतने जोशिले आदमी के बेटे होकर तुम आर्मी में क्यों नहीं जाना चाहते? क्या डरते हो? "नहीं डरता तो नहीं पर एक बात है जो मुझे हमेशा रोक देती है।" आफिसर ने पूछा? अच्छा तो फिर वो बात बता दो जो तुम्हें आर्मी में आने से रोकती है? वो बोला- अगर मैं आर्मीं में सलेक्ट हो गया तो दो बातें होंगी, या तो आप मुझे सीमा पर भेज़ देगें या फिर किसी शहर में, अगर शहर में भेज़ दिया तो कोई बात नहीं, पर सीमा पर भेज़ दिया तो फिर दो बातें होंगी, या तो सीमा पर वार होगी, या नहीं होगी, अगर वार नहीं हुई तो कोई बात नहीं, पर अगर वार हुई तो फिर दो बातें होंगी, वार में या तो दुश्मन को मारूँगा या खुद मारा जाऊँगा, दुश्मन को मारूँगा तो कोई बात नहीं, पर खुद मारा जाऊँगा तो फिर दो बातें होंगी, या तो मेरी बॉडी नहीं मिलेगी या फिर मिलेगी, अगर मेरी बॉडी नहीं मिलेगी, तो कोई बात नहीं पर अगर मिली तो फिर दो बातें होंगी, या तो मेरी बॉडी की पहचान होगी या फिर नहीं होगी, पहचान होगी तो कोई बात नहीं पर अगर पहचान ना हुई तो फिर दो बातें होंगी, या तो मुझे जलाया जायेगा या फिर दफनाया जायेगा, अगर ज़लाया गया तो कोई बात नहीं, पर अगर दफनाया गया तो फिर दो बातें होंगी, या तो मेरी कब्र पर पेड़ उगेगा या फिर नहीं उगेगा पर अगर उगा तो फिर दो बातें होंगी या तो वो पेड़ आम का उगेगा या फिर सरसों का, अगर आम का उगा तो कोई बात नहीं पर अगर सरसों का उगा तो फिर दो बातें होंगी या तो सरसों का तेल बनाया जायेगा या फिर नहीं बनाया जायेगा अगर तेल नहीं बनाया गया तो कोई बात नहीं पर अगर बनाया गया तो फिर दो बातें होंगी, या तो तेल खाने के काम में लाया जायेगा या फिर साबुन बनाने के काम में लाया जायेगा, खाने के काम में लाया गया तो कोई बात नहीं पर अगर साबुन के काम में लाया गया तो फिर दो बातें होंगी, या तो वो साबुन नहाने का बनेगा या फिर कपड़े धोने का बनेगा अगर कपड़े धोने का बना तो कोई बात नहीं पर नहाने का बना तो फिर दो बातें होंगी, या तो वो जैन्ट्स साबुन होगा या फिर लेडीज़ साबुन होगा अगर जैन्ट्स साबुन होगा तो कोई बात नहीं पर अगर लेडीज़ साबुन होगा तो बहुत बड़ी बात होगी क्योंकि जब कोई लेडी उससे नहायेगी तो मुझे बहुत शर्म आयेगी। अब आप खुद ही समझ सकते हैं कि उस आर्मी आफिसर कि क्या हालत हुई होगी? और क्या आप लोगों की? वो तो आपकी प्रतिक्रियाएं ही बता पायेंगी और अगर आपकी प्रतिक्रियाएं आईं तो मैं प्रेरित होऊँगी नही आईं तो फिर दो बातें होगीं या तो मैं अपनी लेखनी यानि "की-बोर्ड" को गुस्से में तोड़ दूँगी या फिर नहीं तोडूँगी, अगर नहीं तोडूँगी तो कोई बात नहीं, पर अगर तोड दिया तो फिर दो बातें होंगी, या तो मैं उसको कूडेदान में डाल दूँगी या फिर नहीं डालूँगी, नहीं डालूँगी तो कोई बात नहीं पर डाल दूँगी तो फिर दो बातें होंगी या तो उसको रबिश वाली लॉरी उठाकर ले जायेगी या नहीं ले जायेगी, नहीं ले जायेगी तो कोई बात नहीं, पर ले गई तो फिर दो बातें होंगी, या तो उसको वो गड्ढे में डाल देगी या नहीं डालेगी, गड्ढे में डाल देगी तो कोई बात नहीं, पर गड्ढे में नहीं डालेगी, तो फिर दो बातें होंगी या तो वो सड़क पर लगे कूड़े के अम्बार पर डालेगी, या फिर नहीं डालेगी, नहीं डालेगी तो कोई बात नहीं, पर डालेगी तो, फिर दो बातें होंगी या तो उसको गाय खायेगी या फिर भैंस खायेगी, गाय खायेगी तो कोई बात नहीं, पर भैंस खायेगी तो बहुत बुरी बात होगी क्योंकि भैंस उन अक्षरों को पढ़ जायेगी तो फिर दुनिया की उस कहावत का क्या होगा? कि- "काला अक्षर भैंस बराबर"? अब ये कहावत बन्द हो जायेगी, बन्द हो गयी तो फिर दो बातें होंगी, या तो नयी कहावत बनेगी या नहीं बनेगी, बनेगी तो कोई बात नहीं, नहीं बनी तो फिर दो बातें होंगी, या तो लोग मेरे ऊपर दावा करेंगे, या नहीं करेंगे, नहीं करेंगे तो कोई बात नहीं, करेंगे तो फिर दो बातें होंगी, या तो लोग भूख हडताल पर बैठेगें, या नहीं बैठेंगे, नहीं बैठेंगे तो कोई बात नहीं, बैठेगें तो फिर दो बातें होंगी, या तो उनका परिवार भूख को बर्दाश्त कर लेगा, या नहीं करेगा, कर लेगा तो कोई बात नहीं, नहीं करेगा, तो फिर दो बातें होंगी, या तो वो परिवार मर जायेगा, या नहीं मरेगा, नहीं मरेगा तो कोई बात नहीं, मर जायेगा तो उसके जिम्मेदार आप होंगे मैं नहीं।
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