हरी राम को दूसरों के ग�?सलखाने में �?ांक �?ांक कर चटपटी खबर लाने का आदेश दे कर हम गाना गाते ह�?ये नहा रहे थे कि अचानक ही हरी राम ने ग�?सलखाने का दरवाजा पीटते ह�?ये आवाज़ दी,”मालिक जल�?दी निकलिये, बड़ी गज़ब की खबर लाया हूं.”
कड़ाके दार ठंडक में गरमा-गरम पानी से नहा रहे थे, निकलने का मन तो किया नहीं, सो हमने अंदर से ही बा�?ग लगायी,” क�?या ह�?आ हरी राम, �?सी कौन सी खबर लाये हो, भाई? क�?या टोनी ब�?लेयर और म�?शर�?रफ ने ब�?श की हां में हां मिलाने से मना कर दिया है या पाकिस�?तान में प�?रजातंत�?र बहाल हो गया है?”
अरे मालिक! बाहर तो आइये उससे भी जोरदार खबर लाया हूं!
ऑयें! उससे भी जोरदार.....!” हम सम�? गये हरी राम कोई बम धमाका ले कर आया होगा, हम ने लप�?प �?प�?प तौलिया, खूंटी से तौलिया खींचा और बिना बदन पोंछे ह�?ये ही लपेटते ह�?ये बाहर निकले. ग�?सलखाने में तो गरम पानी की भाप से वातावरण में गर�?मी थी, बाहर आते ही मारे ठंड के बदन लगा कांपने और दांत लगे क�?ड़क�?ड़ाने. जस-तस क�?ड़क�?ड़ाते ह�?ये दांतों को नियंत�?रित करते ह�?ये हमने कहा,” बोलो हरी राम, जल�?दी बोलो...!
हरी राम: मालिक! आपके सनसनीखेज लेख ‘तरकश पर तीर’ के बावजूद यह बेंगाणी बंध�? स�?धरे नहीं...
मैं: मतलब?
हरी राम: मालिक, आपने अपनी जादूई कलम से उनकी काली करतूतों का पर�?दा पूरे चिठ�?ठा जगत के सामने फाश किया था, फिर भी देखिये, लज�?जित होने के बजाये अब दोनों �?क नयी प�?रतियोगिया ले कर आ गये हैं और वो भी मोर फ�?रीक�?वेंटली, मालिक!
मैं: मोर फ�?रीक�?वेंटली से त�?म�?हारा क�?या मतलब है, हरी राम.
हरी राम: मालिक, कह रहे हैं कि अब महीने-महीने इनाम बांटेगे...
मैं: मतलब?
हरी राम: अब का बतलायें मालिक, कहते ह�?ये भी लाज आ रही है, बस यह सम�? लीजिये कि जैसे ‘प�?लेबॉय’ पत�?रिका में हर महीने ‘फ�?लेवर ऑफ द मंथ’ होता है ना – ‘मिस मई’, ‘मिस जून’, ‘मिस ज�?लाई’....बस वैसे ही बेंगाणी बंध�? महीना दर महीना विजेता बना�?ंगे.
मैं: क�?या बात कह रहे हो !! ?? बेंगानी बंध�? ‘प�?लेबॉय’ छापने लगे हैं !! ??
हरी राम: हां मालिक! मैं तो पूरे ब�?लॉग जगत में �?िं�?ोरा पीट कर उनको बदनाम भी कर आया हूं.
मैं: अरे हरी राम, बस दिखावे का ही �?िं�?ोरा पीटना, कहीं �?सा ना हो कि दबाव में आ कर वो ‘प�?लेबॉय’ छापना बंद कर दें, नहीं तो हम रंगीनियां देखने को ही तरस जायेंगे... वाह भई वाह ... ‘प�?लेबॉय’. वाह, मैं तो अभी से उतावला हो रहा हूं कि ‘प�?लेमेट ऑफ द इयर 2006’ के ल�?भावने चित�?र देखने को मिलेंगे.
हरी राम: अरे मालिक, लगता है कि मैं आप को ठीक से सम�?ा नहीं पाया, बेंगाणी बंध�? ‘प�?लेबॉय’ छापने जैसा कोई विचार नहीं रखते हैं....
मैं: ऑयें...!! फिर ?
हरी राम: मालिक, जैसे ‘प�?लेबॉय’ तमाम स�?ंदरियों में से �?क को च�?न कर ‘मिस मई’ या ‘मिस जून’ या ‘मिस ज�?लाई’ बनाती है, उसी प�?रकार हर दो महीने के अंतराल पर तमाम रचनाओं में से �?क को प�?रस�?कृत किया जायेगा. यह प�?रस�?कार चिठ�?ठाकार के लिये ना होकर रचना विशेष के लिये है. और हां, साल के अंत में ‘वर�?ष का सर�?वश�?रेष�?ठ चिठ�?ठाकार’ वाला प�?रस�?कार यानि कि ‘प�?लेमेट ऑफ द इयर’ तो है ही – जिसका आपने भांडा फोड़ा था.
मैं: हरी राम, भई पूरी खबर �?क साथ दिया करो – पल भर में ना जाने कितने हसीन सपने देख डाले. हरी राम.....
हरी राम: जी मालिक...!
मैं: इस तर�?ज़ के हिसाब से तो ‘प�?लेबॉय प�?लेमेट ऑफ द इयर 2006’ तो अपने समी...
हरी राम: अरे मालिक, �?सा भयावह दृश�?य ना दिखलाइये....�?क साथ रामसे ब�?रदर�?स की दस-बीस फिल�?में दिखा दीजिये....मेरी आंखें फोड़ दीजिये, लेकिन ‘तरकश’ की ‘प�?लेमेट ऑफ 2006’ को ‘प�?लेबॉय’ की ‘प�?लेमेट’ के रूप में देखने को मत कहिये.
मैं: हें... हें... हें... हरी राम मैं तो मजाक कर रहा था, ये ले : ) स�?माइली पकड़! खैर उनको छोड़, ये बता कि हम “चौपाल” और “पानी के बताशे” को प�?रमोट करने के लिये क�?या करें. लिखना लिखाना तो हमारे बस का है नहीं कि धा�?सू लेख लिखो और �?ेर सारे पाठक पाओ. कविता अपने बस की है नहीं – सो हमने “चौपाल” का दिया तो ब�?�?ा ही दिया अब तो वहा�? केवल �?ींग�?रों की �?ायें-�?ायें ही स�?नाई देती है. रही बात “पानी के बताशों” की तो आदमी आखिर कितने दिन मेरी बकवास प�?ने के लिये आता रहेगा. त�?म ही देख लो रेटिंग�?स लगातार गिरती जा रही हैं. कोई य�?क�?ति स�?�?ाओ...
हरी राम: मालिक, मेरी मानो तो आप भी अपने चिठ�?ठे पर �?क प�?रतियोगिता रख लो “द बेस�?ट हिन�?दी चिठ�?ठाकर ऑन द अर�?थ”.... ख�?द को जिता दीजिये, बस�?स!
मैं: अंग�?रेज़ी में नाम रखें ?
हरी राम: हां मालिक अंग�?रेज़ी से बात में वज़न आता है..
मैं: पर हरी राम, उससे क�?या फ़ायदा, हमारा लेखन तो भइये �?सा है, कि हमें तो ख�?द को भी इनाम देते ह�?ये शर�?म आती है...
हरी राम: मालिक ईमानदारे से च�?नाव करवाइये, आपै जितिहैं...
मैं: जरा विस�?तार में बताओ हरी राम...
हरी राम: क�?योंकि प�?रतियोगिता का आयोजन आप कर रहे हैं तो आप अपनी शर�?तें रखिये – जैसे कि केवल दो ही चिठ�?ठे नामांकित किये जा सकते हैं – “चौपाल” और “पानी के बताशे”, फिर इन नामांकन पर च�?नाव करवा दीजिये – बस�?स हो गया काम. आप प�?रजातांत�?रिक तरीके के च�?नाव में विजयी हो कर ‘लोक सभा’ में आ जायेंगे – ना कि मनोनीत हो कर “राज�?य सभा” में.
मैं: वाह हरी भाई वाह, यह सब ग�?र त�?मने कहां से सीखे?
हरी राम: मालिक, मैं पहले म�?शर�?रफ के बाल काटता था.
मैं: वेरी ग�?ड, चल इसी ख�?शी में क�?छ पी लेते हैं, मेरी “ओल�?ड मांक” वाली वह बोतल उठा कर लाना जिसमें स�?कॉच भरी ह�?यी है....
हरी राम: मालिक आप देसी दारू की बोतल में स�?कॉच भर कर कयों रखते हैं?
मैं: त�?म नहीं सम�?ोगे हरी राम, इसे कहते हैं “समाजवादी पू�?जीवाद”.
हरी राम: और मालिक इस देसी लेख का यह विलाइती शीर�?षक “प�?लेमेट ऑफ़ द इयर” देने की कोई खास वजह?
मैं: हरी राम, यह भी त�?म नहीं सम�? पाओगे. यह मार�?केटिंग के तरीके हैं. जनता को �?से ही ल�?भाना पड़ता है. बस यूं सम�? लो कि कोका कोला के कैन में लस�?सी भर कर बेंच रहे हैं.
हरी राम: मालिक फिर इसे क�?या कहते हैं?
मैं: इसे कहते हैं “पू�?जीवादी समाजवाद”
हरी राम: सम�? गया मालिक, इसी ख�?शी में ‘चियर�?स’.
मैं: चियर�?स! हरी राम, चियर�?स!!
चलते-चलते:
मैं और हरी राम अपनी स�?कॉच गटक रहे थे कि फोन घनघना उठा,
मैं: हलोओओ...
संजय: मैं ‘तरकश डॉट कॉम’ से संजय बेंगाणी बोल रहा हूं...
मैं: (उनके �?क हज़ार र�?पये के बो�? के नीचे दबे ह�?ये हैं, सो घिघिया कर बोले) हां, हां संजय जी, बताइये यह गरीब आपकी क�?या ख़िदमत कर सकता है...?
संजय: ये हरी राम नाई त�?म�?हारा ही आदमी है ना?
मैं: जी हां, है तो मेरा ही आदमी. क�?यों, नादान से कोई भूल हो गयी है क�?या?
संजय: उस #@$%? को सम�?ा लो, वर�?ना ठीक नहीं होगा!
मैं: क�?या ह�?आ भाई साहब?
संजय: क�?या ह�?आ? पूछ रहे हो क�?या ह�?आ? हायें? बताऊं क�?या ह�?आ? उस #@$%? ने पूरे ब�?लॉग जगत में जा कर ना जाने क�?या �?िं�?ोरा पीट दिया है कि आज स�?बह से ही ‘तरकश डॉट कॉम’ के ऑफिस के सामने तमाम चिठ�?ठाकार चड�?�?ी-बनयान पहने, और क�?छ तो केवल चड�?ढी पहने ही चहलकदमी कर रहे हैं.
(हमने कनखिया कर बड़े गर�?व से व�?हिस�?की ग�?टकते हरी राम को देखा)
संजय: मेरे ऑफिस के नीचे चड�?�?ी बनियान की द�?कान ख�?ल गयी है – जहा�? रंग बिरंगी, अजीब-ओ-गरीब तरीके की चड�?�?ी बनियान बिक रही हैं, कई चिठ�?ठाकारों ने पंकज को घेर लिया है और कह रहे हैं कि पंकज उनकी फोट�?�?ं खींच कर उनका पोर�?ट�?फोलिये तैयार करें. दो-चार हाथ में बैनर ले कर खड़े है जिस पर लिखा है “हमें च�?नो प�?लेमेट ऑफ 2007”
मैं: घबराइये मत संजय जी, हरी राम �?क जिम�?मेदार व�?यक�?ति है, वह इस पूरे प�?रकरण की जिम�?मेदारी लेता ह�?आ नैतिक आधारों पर माफ़ी मांग लेगा और साथ ही मेरे घर में नाई के पद से त�?याग पत�?र भी दे देगा. साथ ही मैं केन�?द�?र से अन�?रोध करके इस पूरे मामले की छान बीन हेत�? �?क विशेष जांच समिति गठित करने की मा�?ग भी करूंगा और यदि आवश�?यकता ह�?यी तो मामला सी बी आई जांच की मा�?ग भी करूंगा. यदि हरी राम दोषी पाया गया तो न�?यायालय द�?वारा दिया गया दण�?ड भी भगवान का प�?रसाद सम�? कर ग�?रहण करेगा. आप घबराइये मत.....
संजय शांत हो कर फोन रख देते हैं और मैं तथा हरी राम ठहाका लगा कर फिर स�?कॉच ग�?टकने लगते हैं.