साहित्य/हास्य व्यंग्य
सोमवार , , 21 मई

रश्मिजी फोन लाइन से-देखिये, सिपाशा बसु और नेता दोनों ही झूठ बोलते हैं, पर सिपाशाजी झूठ बोलते हुए अच्छी लगती हैं। जब झूठ ही सुनना है, तो ब्यूटीफुल झूठ क्यों ना सुना जाये। मेरे ख्याल से अब मुझे प...

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सोमवार , , 25 अगस्त
सोमवार , , 18 अगस्त
स्वयं निट्ठले बैठे रहना या हालात का रोना रोना,...
मंगलवार , , 12 अगस्त

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