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सामान्य शिष्टाचार: ब्लॉग लिखते समय
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 2
बेकारअति उत्तम 
सामान्य शिष्टाचार
बुधवार , , 20 जून
एक मशहूर लेखिका कहती हैं इस दुनिया में शायद ही कोई होगा जिसका अपना चिट्ठा ना हो. खैर यह बात अंग्रेजी भाषी लोगों के लिए सत्य हो सकती है, पर हिन्दी चिट्ठाजगत के लिए नहीं. इस संसार के लिए तो हम यही कह सकती हैं कि हर हिन्दी भाषी (और प्रादेशिक भी) व्यक्ति का अपना निजी चिट्ठा होना चाहिए. खैर यह तो दूर की कौडी है, लेकिन चिट्ठाकारीता का भविष्य उज्जवल है और हर दिन सैंकड़ो लोग इससे जुड  रहे हैं.

 

 

 

 

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सामान्य शिष्टाचार : ब्लॉग लिखते समय
    तरकश टीम ने सामान्य शिष्टाचार श्रेणी के अंतर्गत चिट्ठा लिखने के दौरान किन शिष्टाचारों का प्रयोग करना चाहिए उसको लेकर अध्ययन किया और उनका विश्लेषण निम्नलिखित है.

    दो बार सोचिए क्या लिख रहे हैं : आप जो लिख रहे हैं, वह दुनिया भर में पढा जाने वाला है. आपका चिट्ठा आपकी निजी डायरी नहीं है, बल्कि एक खुला पन्ना है जो सारी दुनिया तक आपके विचार पहुँचा रहा है. तो अपनी प्र विष्टी लिखने के बाद उसे दो बार पढिए कि आपने क्या लिखा है, और उसके क्या परिणाम हो सकते हैं. आपका आज का लिखा कुछ भी कल, परसों या फिर कई सालों बाद संदर्भ के लिए लिया जा सकता है. तो लिखते समय ध्यान रखें कि जो लिख रहे हैं वह संज्ञान मे लिया जा रहा है.  

    अपने लेखन की ज़िम्मेदारी लीजिए: आप जो लिखेंगे उसके उपर से लोग आपको परखेंगे. वे हमेशा आपकी तारीफ ही नही करेंगे परंतु कटाक्ष भी करेंगे और असहमति भी दर्शाएंगे. तो आप तैयार रहिए, किसी भी अनपेक्षित टिप्पणी के लिए. उसे पढिए और उचित जवाब दीजिए. लेकिन अशिष्टता से नहीं.  

    विश्वसनीय लिखिए: आपके चिट्ठे को लोग आपकी विश्वसनीयता से परखेंगे और पढेंगे. इसलिए हमेशा ईमानदारी से लिखिए और वही लिखिए जो वास्तविक हो मनगढ़ंत ना हो. आप जो भी लिख रहे हैं, वह एकदम सच होना चाहिए, क्योंकि झूठ एक बार चल सकता है पर फिर लोग आपकी विश्वसनीयता पर शक करने लगेंगे और आप अपना पाठक वर्ग खो देंगे.  

    शुद्ध लिखिए: जहाँ तक हो सके अपनी भाषा और व्याकरण का ध्यान रखिए. यह सही है कि यह आपका निजी ब्लॉग है और आप स्वतंत्र है चाहे जिस भाषा में लिखें, लेकिन यह भी सच है कि आप निजी डायरी ना लिख कर ब्लॉग लिख रहे हैं और चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग उसे पढें. तो आपकी भाषा और व्याकरण एक दम शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए. यह सही है कि एकदम शुद्ध कोई नही लिखता, लेकिन हम अधिक से अधिक शुद्ध लिखने का प्रयास तो कर ही सकते हैं. यदि कोई गलती हुई तो यथासम्भव शीघ्र उसे सुधारना चाहिए. लोगों की राय को स्वीकार करना चाहिए.  

    अपने विचार लिखिए: सिर्फ समाचार मत परोसिए, परन्तु अपनी अमूल्य राय भी दीजिए. याद रखिए आज दुनिया में असंख्य संजाल है जो लगातार समाचार परोस रहे हैं, इसलिए आप जो समाचार लेकर आएँगे, आपके पाठक उसे पहले ही पढ चुके होंगे. तो समाचारों को घटनाओं के बारे में जानकारी देने की बजाय उसका विश्लेषण करना अधिक ठीक रहता है.  

    संदर्भ दें तो लिंक भी दें: यदि आप कोई संदर्भ दे रहे हैं या कोई घटना के बारे में बता रहे हैं तो कोशिश कीजिए कि आपने जहाँ से उसे पढ़ा है उसका लिंक भी साथ में थे. ऐसा करने पर आप आपके समाचार प्रदाता के साथ न्याय करेंगे साथ ही साथ आपकी विश्वसनीयता भी बढ़ेगी.  

    किसी के विचार प्रदर्शित करने से पहले अनुमति लें: यदि आप किसी के ब्लॉग पर पहले से लिखी हुई कोई पोस्ट के अंश अपनी पोस्ट में लिखना चाहते हैं, अथवा किसी की टिप्पणी को संदर्भ के रूप में लेना चाहते हैं तो पहले उस मूल लेखक की अनुमति अवश्य लें, तथा जहाँ से आप उसे ले रहे हैं, उस पोस्ट का लिंक भी दें.
    अनवांछित टिप्पणी हटा दीजिए: आपका ब्लॉग आपकी निजी सम्पत्ति है. इसलिए आप किसी भी टिप्पणी को हटाने के लिए स्वतंत्र हैं, तथा उसे अनुमोदित करने के लिए भी. इसलिए यदि आपको कोई टिप्पणी विषय अनुरूप नहीं लगती तो उसे बेहिचक मिटा दीजिए. लेकिन इस प्रक्रिया में यथासम्भव ईमानदारी बनाए रखिए.  

    पारदर्शिता: आपके ब्लॉग पर आपके नियम लागू होते हैं. आप अपने नियम स्वयं बना सकते हैं. आप यह तय कर सकते हैं कि लोगों को टिप्पणी देनी है कि नहीं, और उनकी टिप्पणी स्वतः प्रकाशित होगी या नहीं या किन शब्दों को हटा दिया जाएगा इत्यादि. लेकिन इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखिए. अर्थात यदि आप कोई नया नियम बना रहे हैं तो लोगों को साइड बार में सूचित करिए. 

    अपनी गलती मानिए: कोई भी हर पर हर समय सही नहीं हो सकता है. यदि आपसे जाने अनजाने कोई भूल हुई हो तो तुरंत माफी मांग कर आगे की सोचिए. रक्षात्मक रूख अपना कर और तर्क वितर्क करके आप समय नष्ट करेंगे. 

    छद्म रूप ना धरें: कोशिश करें कि छद्म नाम से टिप्पणी ना करें. ध्यान रखिए यदि आप अपना नाम देकर टिप्पणी नहीं कर पा रहे तो बेहतर है वह टिप्पणी ना करें, क्योंकि यह आप भी जानते हैं कि आपकी वह टिप्पणी किसी के लिए दुखद होगी. आप अपने ब्लॉग के लिए अपना नाम पसंद कर सकते हैं. लेकिन फिर वही नाम से टिप्पणी भी करें. क्योंकि लोग आपको  आपके विचारों से पहचानते हैं. अपनी पहचान को क्षति मत पहुँचाइए और खुद के प्रति ईमानदार बनिए. 

    कम से कम ग्राफिक रखिए: ध्यान रखिए कि सब लोगों के पास ब्रोडबेंड कनेक्शन नहीं होता है. इसलिए अपने ब्लॉग पर कम से कम ग्राफिक रखिए. छवियाँ यथासम्भव छोटी रखिए. 

    विवादों में ना पड़े : कुछ ब्लॉगर विघ्न संतोषी होते हैं.  उनके पास सिर्फ विवादित विषय ही होते हैं. कोशिश करिए की उनके द्वारा प्रायोजित किसी भी विवाद से बचें . त्वरित प्रतिक्रिया ना दें. 

    ज़बरदस्ती पोस्ट ना पढ़वाएँ: किसी भी ब्लॉगर साथी को अथवा अपने पाठक को चैट  क्लाइंट द्वारा या इमेल द्वारा निजी मेल कर के  अपनी पोस्ट पढने को बाध्य ना करें. ना ही टिप्पणी देने के लिए प्रार्थना (बाध्य) करें. याद रखिए ऐसा करने पर आप अपनी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा खो रहे हैं. और लोग सिर्फ आपका मन रखने के लिए टिप्पणी कर रहे हैं. उन्हे आपकी पोस्ट में कोई दिलचस्पी नही है. 
    टिप्पणी आपकी लोकप्रियता नहीं दर्शाती: यदि आपको 30 टिप्पणी मिलती है और आपके साथी को 5 तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपका साथी कमतर लेखक है. टिप्पणियों से लोकप्रियता का अंदाजा नहीं लगता. यह देखिए कि आपके लिखे को कितने लोग पढ़ते हैं, यह मत देखिए कि कितनों के टिप्पणी दी. ऐसा हो सकता है कि आपके लेख पर टिप्पणी देने जैसा कुछ हो भी नहीं, पर आपके लेख को पसंद किया जा रहा हो. 

    निजी प्रहार ना करें: किसी भी साथी पर तथा अन्य किसी भी व्यक्ति पर निजी प्रहार ना करें. याद रखिए आप किसी को मानसिक कष्ट पहुँचा सकते हैं. किसी के लिए उन शब्दों का प्रयोग ना करें जो आप खुद अपने लिए ना सुन सकें. व्यक्ति के विचारों का विरोध करिए लेकिन उस व्यक्ति का नहीं. 

    विषय अनुरूप ही लिखिए: ध्यान रखिए कि आप किस विषय पर लिख रहे हैं. कोशिश करें कि आपने जिस विषय पर लिखना शुरू किया है, उसी पर खत्म भी करें. 

    छोटा लिखिए: कम से कम शब्दों में लिखने का प्रयत्न करें. याद रखिए लोगों के पास पढने को बहुत कुछ है पर समय नही हैं. वे आपके लम्बे लेख को आधा पढ़े इससे अच्छा है छोटे लेख को पूरा पढ़े. 

    प्रति टिप्पणी करिए: यदि आपको टिप्पणी मिल रही है तो उसका धन्यवाद ज़रूर व्यक्त करिए. तथा हर टिप्पणी का जवाब लिखें. ध्यान दीजिए, इससे आपके पाठक को अच्छा लगेगा और वह आपके ब्लॉग पर बार बार आना पसंद करेगा. 
    विज्ञापन रखिए पर ध्यान से: आपको अपने ब्लॉग से कमाई करने का पूरा अधिकार है. परंतु अपने पाठक वर्ग की कठिनाइयों के उपर कमाई नही हो सकती. इसलिए विज्ञापन जरूर रखिए लेकिन उन्हे ऐसी जगह लगाएँ जिससे पाठक को पढने मे असुविधा ना हो. 
 

  




टिप्पणियाँ (5)add
बहुत सही
द्वारा प्रेषित श्रीश शर्मा , जून 20, 2007
अच्छा लिखा जी,

जबरदस्ती पोस्ट न पढ़वाएं - यह बात हमारे बहुत से दोस्तों को समझनी चाहिए।

प्रतिटिप्पणी करें- यह भी बहुत जरुरी होता है, यदि आप प्रतिटिप्पणी करते हैं तो आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने वाला बार-बार देखने आता है कि आपने जवाब दिया या नहीं। उदाहरण के लिए समीरलाल जी और फुरसतिया जी प्रतिटिप्पणी जरुर करते हैं जबकि उनके पास सर्वाधिक टिप्पणियाँ आती है।
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बहुत खूब
द्वारा प्रेषित समीर लाल , जुलाई 02, 2007
अरे, इतना सारगर्भित लेख और हमारी नजरों से बच निकला. घोर अनर्थ!!! smilies/grin.gif
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द्वारा प्रेषित Yatish Jain , अगस्त 09, 2007
बहुत उपयोगी लेख, सभी को इन बातो का ध्यान रखना चाहिये.
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द्वारा प्रेषित आनंद , अक्टूबर 14, 2007
बहुत अच्‍छा लेख है। इससे हम सभी को मार्गदर्शन लेना चाहिए।- आनंद
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द्वारा प्रेषित अविनाश वाचस्पति , नवम्बर 01, 2007
एक उपयोगी लेख जो सदा प्रासंगिक रहेगा
जो पढ़ेगा समझेगा गुनेगा वही बना रहेगा
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