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आँखो की रोशनी वापस लाएगा बायोनिक विज़न |
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स्वास्थ्य
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मंगलवार , , 22 अप्रेल |
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तरकश ब्यूरो
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| इस तकनीक का सफल प्रयोग लिंडा मूरफूट नामक बुजुर्ग महिला पर किया गया. |
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यह नई खोज उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नही है, जिन्होनें किसी वजह से अपनी आँखो की रोशनी खो दी है. वे ना केवल वापस देख सकेंगे बल्कि उन्हे किसी भी प्रकार के ऐनक अथवा कोंटेक्ट लेंस पहनने की भी आवश्यकता नही होगी. लॉस एंजिलस के बायोमेडिकल संस्थान के प्रोफेसर मार्क हुमाय़ु की नई खोज बायोनिक विजन आँखो की खोई रोशनी वापस ला सकता है, लेकिन कुछ अलग तरह से.
यह वास्तव मे एक छोटा से कैमरा है जिसे आँखो के अंदर स्थापित किया जा सकेगा. यह कैमरा अपने द्वारा खींचीं गई तस्वीरों को एक रेडियो रिसीवर तक भेजता है जिसे आँखो के पास ही फिट किया जाता है. यह रेडियो रिसीवर बाद में इसे एक सिलीकान प्लेटिनम चिप तक प्रेषित करता है जिसे आँखो के रेटिना में फिट किया जाता है. यह चिप बाद में प्राप्त हुए सिग्नलों को दिमाग तक प्रेषित करता है और इंसान अपने आसपास की घटनाओं को देख सकता है.
इस तकनीक का सफल प्रयोग लिंडा मूरफूट नामक बुजुर्ग महिला पर किया गया. लिंडा ने पिगमेंटोसा नामक रोग की वजह से अपनी आँखों की रोशनी खो दी थी. मार्क हुमायु के नेतृत्व मे डाक्टरों की एक टीम ने लिंडा की आँखो मे रिसीवर और चिप फिट किए. और कैमरे को फिलहाल उनके चश्मे पर ही लगाया. उसके बाद लिंडा अपनी आँखो से आंशिक रूप से देख पाने मे सफल रही.
यह तकनीक अभी प्रायोगिक स्तर पर ही कारगर सिद्ध हुई है, लेकिन आने वाले पाँच सालों मे पूर्ण रूप से विकसित हो जाएगी ऐसी सम्भावना है. इस समय कैमरा चश्मे पर ही लगाया जाता है, लेकिन बाद मे इस आँखो के अन्दर ही लगाया जा सकेगा.
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