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बालशोषण, आत्महत्या और दिमाग के जेनेटिक्स का संबंध |
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स्वास्थ्य
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गुरुवार , , 08 मई |
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तरकश ब्यूरो
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| आत्महत्या करने वाले उन लोगों ,जिनका बचपन में शोषण हुआ होता है, के दिमाग में जिनेटिक फेरबदल पाया जाता है. |
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कनाडा की मेकगिल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि आत्महत्या करने वाले उन लोगों ,जिनका बचपन में शोषण हुआ होता है, के दिमाग में जिनेटिक फेरबदल पाया जाता है. जो शायद उन्हे आत्महत्या करने के लिए प्रेरित भी करता है.
बचपन में हुए शोषण अथवा अकेलेपन की वजह से मानव की दिमागी संरचना मे फेरबदल आ जाते हैं. यह फेरबदल जेनेटिक होता है. और इस प्रकार के बायोलोजिकल दुष्प्रभाव के मानव के स्वभाव में भारी फेरबदल आता है जो उसे आत्महत्या करने तक के लिए उकसा सकता है.
इस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 20 ऐसे व्यक्तियों के दिमाग का अभ्यास किया जिनका बचपन में शोषण हुआ था और उन्होने बाद मे आत्महत्या की थी. इसके बाद वैज्ञानिकों ने 20 ऐसे व्यक्तियों के दिमाग का अभ्यास किया जिनकी अचानक ही मृत्यु हो गई थी, लेकिन जिनका बचपन मे शोषण नही हुआ था.
अभ्यास से पता चला कि जिन लोगों का बचपन में शोषण हुआ था, उनके दिमाग की जेनेटिक ब्लूप्रिंट बदल गई थी. इन लोगों के RNA में बदलाव हुआ था. RNA एक जेनेटिक पदार्थ होता है जो दिमाग के कोषों के काम करने लायक प्रोटीन तैयार करता है.
बालशोषण का शिकार हुए लोगों में मिथीलेशन नामक रासायनिक क्रिया होती है जो उनके दिमाग में जेनेटिक बदलाव ला देती है.
इस शोध से उदासीनता और अन्य दिमागी बिमारियों से शिकार लोगों का इलाज करने में सुविधा प्राप्त होगी.
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