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टीका, आखिर कैसे काम करता है |
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स्वास्थ्य
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गुरुवार , , 19 जुलाई |
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पंकज बेंगाणी
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आजकल जोरशोर से चल रहे पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम की वजह से निसन्देह देश के लोगों में जागरूकता आई है, और वे बच्चों को पोलियो का टीका लगाने लगे हैं. अगर यह अभियान इसी तरह चलता रहा तो एक दिन देश का कोई भी बालक पोलीयोग्रस्त नहीं रहेगा.
बच्चे के जन्म के बाद पोलियो की ही तरह अन्य कई बिमारियों के टीके भी लगाए जाते हैं, आइए देखते हैं ये टीके किस तरह से काम करते हैं.
यह तो स्पष्ट है कि हम बीमार क्यों पडते हैं. मानव शरीर के उपर हर क्षण असंख्य बिमारियों के जीवाणुओं के हमले होते ही रहते हैं. हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इन जीवाणुओं से लडती रहती है, और शरीर को इनसे ग्रसित होकर बीमार पडने से बचाती रहती है.
टीका भी इसी पद्धति पर काम करता है. जब किसी को टीका दिया जाता है तो उस टीके में उस बीमारी के रोगाणुँ सुशुप्त अवस्था में अथवा मृतप्राय अवस्था में शरीर के अंदर दाखिल किए जाते हैं. चूँकि ये जीवाणु मृतप्राय होते हैं इसलिए शरीर को इनसे कुछ खाश नुकसान नही होता. लेकिन इन जीवाणुओं के प्रवेश करते ही शरीर की रोक प्रतिरोधक क्षमता सक्रीय हो जाती है, तथा इन जीवाणुओं की रूपरेखा अपने मेमरी सेल्स B और T में संग्रहित कर लेती है. तथा इनसे लडने के लिए प्रतिद्रव्य यानि कि Antibodies बना लेती है.
इस तरह भविष्य में यदि उसी बीमारी के सक्रिय जीवाणु जब हमला करते हैं तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता उन्हे तुरंत पहचान लेती है और प्रतिद्रव्य द्वारा उनका खात्मा कर देती है. इससे शरीर उनसे ग्रसित होने से बच जाता है.
अब सवाल यह कि क्या टीका पुरी उम्र कारगर तरीके से काम कर पाता है. वास्तव में अलग अलग बिमारियों के टीकों के लिए अलग अलग मान्यताएँ हैं.
टीके की खोज 1796 में ब्रिटिश चिकित्सक एडवर्ड जेनर ने की थी जिन्होंने चिकन पोक्स का टीका बनाया था. उसके वाद येलो फिवर के रोग के लिए भी यह टीका कारगर साबित हुआ था. चिकित्सकों के एक दल ने देखा कि इस टीके की असर 20 वर्ष बाद कम होने लगी थी.
इस घटती असर को रोकने के लिए बूस्टर टीके का उपयोग किया जाता है. अमुक साल बाद उसी बीमारी का एक और टीका लगाया जाता है. हर बीमारी के टीके के लिए समय मर्यादा अलग अलग होती है.
लेकिन इतना तय है कि टीके की खोज के बाद हम हमारी आने वाली पीढ़ी को कई बिमारियों से बचा पा रहे हैं.
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चित्र देख के घिग्गी बंध गई. फिर याद आया कि अपने तो सारे टीके टप्पे हो चुके हैं
-- शास्त्री जे सी फिलिप
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