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पोपाई, पालक और ताकत का राज! |
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स्वास्थ्य
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मंगलवार , , 12 फ़रवरी |
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तरकश ब्यूरो
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| पोपाई पालक नही परंतु स्पिनेच खाता है |
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स्पिनेच मे प्रति 100 ग्राम लौहतत्व की मात्रा 30 मिलिग्राम नही बल्कि 3 मिलिग्राम ही होती है.
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मशहूर कॉमिक चरित्र पोपाई मरियल सा दिखाया जाता है जो मुसीबत आने पर डिब्बाबंद पालक खाता है और उसे खाते ही उसके शरीर मे इतनी ताकत आ जाती है कि वह सम्भव से लगने वाले कार्य भी चुटकी बजाते कर देता है. आखिर इस बात मे सच्चाई और मात्र कल्पना की सम्भावना कितनी है?
यह तो जाहिर है कि पोपाई चरित्र गढने वाले ई.सी. सेगर नामक कार्टुनिस्ट ने पालक के पोषक तत्वों का बखूबी प्रचार किया था. लेकिन वास्तव मे देखा जाए तो यह सभी बाते बहुत हद तक गलत है. पहली बात तो यह कि जैसा कि बताया जाता है पोपाई पालक नही परंतु स्पिनेच खाता है. स्पिनेच का भौतिक नाम Spinacia oleracca है जबकि पालक का भौतिक नाम Beta vulgarih है जो एक दूसरे से भिन्न है.
स्पिनेच का सेवन अमरीका, यूरोप, और कैनेडा जैसे प्रदेशों मे होता है, भारत मे पालक खाई जाती है. लेकिन एक समानता जो दोनों सब्जियों मे होती है वह है लौहतत्व. लौहतत्व की मौजूदगी इन दोनों को शक्तिवर्धक बनाती है. लेकिन यह इतनी भी अधिक नही होती कि इसे मात्र खाने भर से त्वरित ताकत मिल जाए. वास्तव मे हुआ यह था कि 19वीं सदी के अंत मे स्पिनेच के पोषकतत्वों पर शोध कर रहे एक दल ने गलती से स्पिनेच मे लौहतत्व की मात्रा प्रति 100 ग्राम 3 मिलिग्राम के बदले मिलिग्राम 30 ग्राम दर्ज कराई.
सेगर ने इस बात को हाथों हाथ लिया और अपने देश के बच्चों मे स्पिनेच खाने के प्रति उत्साह जगाने के लिए उन्होने अपने काल्पनिक पात्र पोपाई को स्पिनेच खाते हुए दिखाया. इसका असर भी हुआ, और अमरीका के बच्चे बडी मात्रा मे स्पिनेच का सेवन करने लगे.
हालाँकि काफी वर्ष बीत जाने के बाद आखिरकार यह हकीकत सामने आ गई कि स्पिनेच मे प्रति 100 ग्राम लौहतत्व की मात्रा 30 मिलिग्राम नही बल्कि 3 मिलिग्राम ही होती है. लेकिन तब तक जनमानस मे स्पिनेच की छवि दर्ज हो चुकी थी.
मजेदार बात यह भी है कि स्पिनेच की बजाय पालक मे लौहतत्वों की मात्रा कहीं अधिक (प्रति 100 ग्राम 16 मिलिग्राम) होती है.
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