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कैसे लूटा भारत गज़नी के हाथों?
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 11
बेकारअति उत्तम 
इतिहास
द्वारा/by : संजय बेंगाणी   
शनिवार , , 16 दिसम्बर
कैसे एक लूटेरा बारबार भारत को लूटता रहा. किस तरह से महमूद गज़नी लम्बे चौडे रेगिस्तान पार कर सोमनाथ लूट कर चला गया? 

 

 

क�?या इतिहास उबाऊ होता है? अगर वह पाठ�?य-प�?स�?तक में सिमटा ह�?आ न हो तो बिल�?क�?ल नहीं. जानिये उस कथा के बारे में जिससे तब भारत सीख सकता था कि अपना अस�?तित�?व बचाना हो तो पूजे जाने वाले तमाम देवता व सम�?पति कभी काम नहीं आ�?ंगे, पर भारत ने सीखा नहीं और शताब�?दियों की ग�?लामी तो भोगी ही, अपनी आधी से ज�?यादा जमीन भी खो दी. भारत तब सोने का तो था, पर �?सी चिड़ीया था जिसे बाज़ नोचते रहे.

 

गज़नी का महम�?दयह कथा हजार वर�?ष प�?रानी है, तब अफगानिस�?तान में �?क बह�?त ही छोटा-सा राज�?य ह�?आ करता था - गजनी. 9 अप�?रैल 977 को सबकतगीन  नामक �?क जन�?मजात ग�?लाम ने विद�?रोह कर वहा�? के शासक पिराई को भागने पर मजबूर कर दिया तथा शासन पर अपना कब�?जा कर लिया. गजनी का भावी शासक तथा सबकतगीन का बेटा महमूद (जन�?म: 1 नवम�?बर 971) तब छह वर�?ष का था और यह कहावत की ग�?लाम का बेटा सदा ग�?लाम ही रहता है, उसके लि�? �?ूठी साबित ह�?ई थी.

 

अब चलते हैं भारत की ओर. उस समय भारत से (ग�?जरात के वेरावल बन�?दरगाह से) पर�?शिया (आज का ईरान) सम�?द�?री व�?यापार ह�?आ करता था. पर बाद में सम�?द�?री लूटेरों से तंग आकर यह व�?यापार भू-मार�?ग से होने लगा. व�?यापारी अपना मूल�?यवान सामान ऊ�?टों पर लाद कर गजनी होते ह�?�? होर�?म�?ज (बन�?दर अब�?बास) और सिराफ जाने लगे था. इन�?ही काफिलो से कभी बालक महमूद ने भारत तथा सोमनाथ के नाम स�?ने होंगे, पर तब उसके लि�? कौत�?हल का विषय भारत का वैभव न हो कर मात�?र ऊ�?ट के ये काफिले ही रहे होंगे.

 

इधर सबकतगीन शासक बनने के बाद लगातार अपना राज�?य ब�?ाने में लगा रहा. उसने राजा जयपाल से उसका हिन�?दू राज�?य पंजाब का अधिकतर हिस�?सा जिसमें काब�?ल भी शामिल था, जीत लिया तथा पूर�?वी पर�?शिया के ख�?रासान प�?रांत तक अपने राज�?य की सीमा�?�? ब�?ा ली. �?क समय का छोटा-सा राज�?य गजनी बीस वर�?षो में प�?रे अफगानिस�?तान तथा ईरान के क�?छ भू-भाग जितना बड़ा हो गया.

 

सबतगीन ने अपने �?क बेटे ईस�?माइल को ईरान के ख�?रासान का स�?बा दे रखा था. तथा 997 में मरने से पहले अपने दूसरे बेटे महमूद को अपना उत�?तराधिकारी निय�?क�?त कर दिया. 

 

ईस�?माइल ने इसका विरोध किया पर दरबार में वजीरों का समर�?थन महमूद को मिला ह�?आ था.

 

दोनो भाईयों में टकराव चलता रहा, जिसका अंत �?क य�?द�?ध से ह�?आ. ईस�?माइल की फौज बल�?ख से, तो महमूद की निशाप�?र (इसी गा�?व में बाद में कभी क�?तब�?बूद�?दीन �?बक जिसने क�?त�?बमिनार बनवायी थी, ग�?लाम के रूप में बिका था) से कूच कर गजनी के पास टकराई. ईस�?माइल हार गया तथा उसे आजीवन कैद की सजा मिली.

 

भारत की वायव�?य भूमि पर गजनी नामक राज�?य की स�?थापना ह�?ई तब तक मात�?र अरब ही सिंध तक आ�? थे. इसके अलावा कंदहार (गांधार), तक�?षशिला, प�?रूषप�?र (पेशावर) तथा हिन�?द�?क�?श का प�?रा प�?रदेश तत�?कालीन भारतीय राज�?यों में बंटा ह�?आ था. पंजाब इनमें सबसे बड़ा राज�?य था. इसके विपरीत महमूद के पूर�?वज मोंगोलो के विरूद�?ध लड़ने के लि�? खरीदे ग�? महज ग�?लाम सैनिक भर थे.

 

सत�?ता पर आने के चार वर�?ष बाद महमूद ने आक�?रमणों की श�?रूआत की. सबसे पहले पंजाब की राजधानी पेशावर को निशाना बनाया. सितम�?बर 1001 को जब वह गजनी से निकला तब उसके साथ 15000 अश�?वरोही तथा पैदल सैन�?य था. उधर पंजाब के शासक जयपाल के पास 12000 अश�?वरोही तथा 300 हाथी भी थे. लाहोर से अन�?य सैन�?य मदद भी आने वाली थी पर इससे पहले ही महमूद ने आक�?रमण कर दिया. जयपाल प�?री तैयारी के बिना लड़ा और अंत में हार गया. उसे बन�?दी बना लिया गया. महमूद को अपनी सैन�?य ताकत ब�?ाने के लि�? धन की आवश�?यकता थी. पिता जयपाल को छ�?ड़ाने के लि�? आनन�?दपाल ने राज�?य का खजाना महमूद को सौंप दिया. जयपाल यह सह नहीं पाया और राजगद�?दी आनन�?दपाल को सौंप प�?रजा की उपस�?थिति में चिता पर च�? प�?राण त�?याग दिये.

 

सन 1004 में महमूद ने सिंधू नदी के किनारे बसे राज�?य उच पर इसलि�? आक�?रमण किया क�?योंकि वहा�? के शासक भीरराव ने जयपाल के विरूद�?ध य�?द�?ध में महमूद को सहायता करने का वचन दिया था, पर निभाया नहीं. भीरराव हार गया और जंगल की ओर भाग खड़ा ह�?आ. विरोधी सैनिको ने उसका पीछा किया पर उसने आत�?महत�?या कर ली. भीरराव का मस�?तक काट कर गजनी के दरबार में पेश किया गया.

 

इसके बाद महमूद ने 1006 में म�?लतान पर तथा 1008 में पेशावर पर फिर से हमला किया. आनन�?दपाल ने तब तक �?क बड़ी सेना का गठन कर लिया था, पर अंत में वह हार गया. उसके 8000 सैनिक मारे गये. यह आनन�?दपाल का अंतिम य�?द�?ध था. इसके तीन वर�?ष बाद उसकी मृत�?य�? हो गई थी.

 

सन 1009 में महमूद ने हिमाचल के नगरकोट (कांगड़ा) के वज�?रेश�?वरी मन�?दिर को लूटने के लि�? आक�?रमण किया. उसने यहा�? की घन-सम�?पदा के बारे में स�?न रखा था. इधर किसी ने सोचा भी नहीं था की गजनी का स�?ल�?तान यहा�? तक आ पा�?गा. इसलि�? मन�?दिर की स�?रक�?षा निहत�?थे पूजारीयों के हाथों में थी. महमूद तीन दिन तक मन�?दिर का घेरा डाले रहा. देवता न सहायता कर सकते थे और न ही उन�?होने की. अंत में रक�?तपात से बचने के लि�? मन�?दिर के द�?वार खोल दिये ग�? तथा 7 लाख सोने के सिक�?के 7 हजार किलो जवाहरात तथा 25 हजार किलो सोने-चा�?दी के बर�?तन महमूद को सौप दिये ग�?. मन�?दिर कंगाल हो गया.

 

दान-दक�?षिणा ने बाद में उसे फिर से समृद�?ध बना दिया पर तब तक उसकी समृद�?धि की गंध दूसरे कई लूटेरों को लग च�?की थी. 1337 में म�?हम�?म�?द बीन त�?गलक, 1399 में सिकंदर लोदी, 1621 में जहा�?गीर ने इस मन�?दिर को फिर से ल�?टा.

 

धन-दौलत के लि�? आक�?रमण करना महमूद गजनी की आदत-सी हो गई. बह�?त भारी मात�?रा में धन निहत�?थे पंडे-पूजारीयों के हाथो में रहता था. जहा�? भी धन की बात पता चलती महमूद पूरी ताकत से �?पटता था. क�?या उसके आक�?रमण मात�?र धन के लालच में ही होते थे? शायद नहीं. आइये देखें क�?या ह�?आ था सन 1014 को.

 

इस वर�?ष महमूद गजनी पूरे पंजाब को चीरता ह�?आ हरियाणा के थानेसर (स�?थानेश�?वर) के मन�?दिर तक पह�?ंचा. यहा�? उसके लि�? ख�?ला मैदान था. उसने भक�?तों का कत�?लेआम किया. 2 लाख लोगो को ग�?लामो के रूप में गजनी ले गया जो आजीवन ग�?लामो की जिन�?दगी जीते रहे, साथ ही मन�?दिर की सम�?पति कब�?जाने के बाद मूर�?ति के ट�?कड़े करवा कर उसे भी साथ में ले गया. मूर�?ति के इन टूकड़ो को उसने राजधानी के मार�?गो में जड़वा दिये. स�?थानेश�?वर की मूर�?ति के अवशेष रात-दिन लोगो की ठोकरे खाते रहे.

 

इस आतंक के बाद चार वर�?षो तक भारत की तरफ उसने नजरें नहीं की पर 1018 में उसने भारत के हृदय सम�?मान भाग पर आक�?रमण करने का विचार किया. यह गंगा-यम�?ना का फलद�?र�?प व समृद�?ध मैदानी भाग था. गजनी से लगभग 1500 किलोमीटर दूर तक उसे आना था, इसलि�? उसने 20 हजार सैनिको को लूट में हिस�?सा देने का लालच देकर अपने साथ किया तथा 1 लाख घ�?ड़सवार उसके अपने थे.

 

2 दिसंबर को वह यम�?ना पार कर मथ�?रा पह�?ंच गया. यहा�? दिल�?ली के राजा विजयपाल का शासन था, पर वहा�? रक�?षा करने के लि�? कोई नहीं था. मन�?दिर की सम�?पति लूट कर उसे तोड़ा-फोड़ा फिर आग लगा दी. यहा�? से निकल कर उसने राजा जयचन�?द के कनोज पर आक�?रमण किया तथा 20 दिसम�?बर को शहर को ल�?टा. फिर गजनी के लि�? रवाना ह�?आ. गजनी जाते समय वह 53 हजार ग�?लाम व 350 हाथीयों पर लदा धन ले गया.

 

अब तक महमूद सम�? गया था की भारत के अन�?दर तक के भागो को वह बिना किसी खास प�?रतिकार के लूट सकता है. उसकी हिम�?मत भी ख�?ल गई थी.

 

अब बारी थी सोमनाथ की.

 

वेरावल उस समय महत�?वपूर�?ण व�?यापारिक केन�?द�?र था. यहा�? की समृद�?धि के बारे में उसने स�?न ही रखा था. साथ ही उसे पता चला की सोमनाथ के मन�?दिर में अब तक उसके द�?वारा लूटी गई सम�?पति से भी ज�?यादा धन-दौलत है. वहा�? �?क हजार प�?जारी तथा म�?ण�?डन आदि के लि�? तीन सौ नाई सदा हाजिर रहते है. इससे महमूद गजनी पर धन का लालच तथा धर�?म का ज़�?नून सवार ह�?आ.

 

somnath templeसोमनाथ को लूटने के लि�? उसे 1580 किलोमीटर की यात�?रा करनी थी, जिसमें 900 किलोमीटर तो केवल रेगिस�?तानी प�?रांत था. उसे बीकानेर, जयप�?र, जोधप�?र जैसे राजप�?ती राज�?यों को भी पार करना था. पर वह अच�?छी तरह जानता था की कलहप�?रिय राजा विदेशी आक�?रमण के समय भी �?कता नहीं दिखा पा�?ंगे. सजग महमूद ने अपने अभियान को अक�?टूबर में श�?रू करने की योजना बनाई ताकि दिसम�?बर तक रेगिस�?तानी इलाके में प�?रवेश कर फरवरी तक वापसी कर सके.

 

18 अक�?टूबर 1025 को 1 लाख से ज�?यादा सैनिक 30 हजार ऊंट सवार तथा 30 हजार रसद को लादे ऊंटो के साथ रवाना ह�?आ. 20 नबम�?बर को म�?लतान पह�?ंचा फिर 42 दिनो में ही राजस�?थान का रेगिस�?तानी इलाका पार कर जनवरी तक पाटण पह�?�?च गया. यहा�? राजा भीमदेव सौलंकी का शासन था जो महमूद के आने से पहले ही भाग खड़ा ह�?आ. महमूद ने शहर को मन भर ल�?टा. वहा�? से महमूद सोमनाथ की ओर ब�?ा. पर रास�?ते में ही उसका सामना भीमदेव से हो गया. भीमदेव को अपने कर�?तव�?य का बोध हो गया था अतः उसने अपने सैनिको के साथ महमूद से लड़ते ह�?�? केसरीया (अवश�?यम�?भावी मृत�?य�? को देखते ह�?�? भी य�?द�?ध करना) किया.

 

वह ग�?रूवार 6 जनवरी 1026 का दिन था, महमूद गजनी अपने लक�?ष�?य प�?रतिष�?ठित सोमनाथ मन�?दिर के आगे खड़ा था. वहा�? न किल�?लेबन�?दी थी न कोई सैनिक थे. मन�?दिर के प�?जारी तथा भक�?त मन�?दिर की रक�?षा में घेरा डाले खड़े थे.

 

उन�?होने मन�?दिर को भ�?रष�?ट न करने के लि�? सम�?ाते ह�?�? सारी सम�?पति उसे दे देने की बात कही. पर वह केवल दौलत लेने ही नहीं आया था. उसने 50 हजार लोगो का कत�?लेआम करवाया फिर कटे ह�?�? लोगो के ऊपर से ग�?जरते ह�?�? मन�?दिर में प�?रवेश किया. वहा�? छः सात फूट का ज�?योतिर�?लिंग था, ऊपर सोने की जंजीर से अभिषेक-पात�?र लटक रहा था. उसने जंजीर को उतरवा लिया. मन�?दिर के नीचे के कक�?षो से धन के पात�?र निकलवाये तथा अपने हाथों से शीवलिंग के ट�?कड़े किये, जिन�?हे वह लूटी गई दौलत के साथ गजनी ले गया और जामा मस�?जिद की सीढ़ियों में जड़वाया. साथ में मन�?दिर के भव�?य द�?वार भी उतरवा कर ले गया. मात�?र पर�?शियन-ग�?रंथो की ही माने तो महमूद ने तब 2 करोड़ दिरहाम जितना धन ल�?टा था.

 

महमूद गजनी फिर भारत को ल�?टने नहीं आया क�?योंकि 30 अप�?रेल 1030 में उसकी मृत�?य�? हो गई थी.

 

 




 

 

 

Somnathलगभग हजार वर�?षो के विदेशी शासन के बाद भारत आजाद ह�?आ. तब तत�?कालीन गृहमंत�?री सरदार पटेल ने सोमनाथ का प�?नर�?निमाण करवाने का निर�?णय लिया. उन�?होने महाराजा जाम-साहेब की अध�?यक�?षता में सोमनाथ ट�?रस�?ट की स�?थापना की तथा 8 मई 1950 को जाम-साहेब के हाथों मन�?दिर का शिलान�?यास करवाया. राष�?ट�?रपति राजेन�?द�?रप�?रसाद ने भी निजि रूचि लेनी श�?र�? कर दी थी. साथ ही कई राज�?यों के म�?ख�?यमंत�?रियों ने भी इस कार�?य का स�?वागत किया.

 

तब पण�?डितजी (स�?वतंत�?र भारत के प�?रथम प�?रधानमंत�?री) ने 2 मई 1951 को इन�?हे धर�?मनिरपेक�?षता की याद दिलाते ह�?�? पत�?र लिखा, आप जानते हैं कि सोमनाथ मन�?दिर का उद�?घाटन होने वाला है, बह�?त से व�?यक�?तियों को इस घटना ने आकर�?षित किया हैं, इनमें मेरे क�?छ साथी भी शामिल हैं. ...मैं आप लोगो से कहना चाहता हू�? कि आपको हमारी धर�?मनिरपेक�?ष नीति को ध�?यान में रखते ह�?�? �?से समारोह से दूर रहना चाहि�?.

 

उद�?घाटन 11 मई 1951 को राष�?ट�?रपति राजेन�?द�?र प�?रसाद करने वाले थे. पण�?डितजी ने उन�?हे पत�?र लिखा,उद�?घाटन समारोह में आप शामिल हो यह म�?�?े अच�?छा नहीं लगेगा. व�?यक�?तिगत रूप से मेरा मानना है की सोमनाथ के इतने बड़े निर�?माण की कोई आवश�?यकता नहीं थी. परंत�? जब �?सा हो ही गया है तब आपको इसके उद�?घाटन पर अध�?यक�?ष पद नहीं सम�?भालना चाहि�?.

 

परंत�? पण�?डितजी का यह कथन राष�?ट�?रपति राजेन�?द�?र प�?रसाद को पसन�?द नहीं आया और उन�?होने नियत दिन स�?बह 9 बज कर 47 मिनट पर ज�?योतिर�?लिंग की स�?थापना की.

 

टिप्पणियाँ (14)add
महमूद गजनी
द्वारा प्रेषित अनूप श?क?ल , दिसम्बर 17, 2006
संजय भाई, लेख बह?त अच?छा लगा! यह कट? सच?चाई है कि अपना समाज बिखरा रहा। शायद इसलिये भी कि यहां का जीवन आसान रहा होगा। दूसरी बात यह भी कि समाज के सारे वर?ग के लोग देश/राज?य से मन से ज?ड़े न रहे होंगे। कारण चाहे जातिवाद रहा हो या हिंदू धर?म की दूसरी अंतर?निहित कमियां। अब देखिये अफगानिस?तान के भी क?या हाल हैं। जिसे देखो आता है, रौंद के चला जाता है। बढि़या लेख लिखने के लिये बधाई।
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...
द्वारा प्रेषित सागर चन?द न , दिसम्बर 19, 2006
बह?त जानकारी पूर?ण लेख, बधाई
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गजनी
द्वारा प्रेषित समीर लाल , दिसम्बर 19, 2006
बह?त ब?ियां प?रस?त?ति की है संजय भाई. बधाई. वाकई ?से अगर इतिहास प?ाया गया होता तो शायद ऊबाऊ न लगता बह?तों को.
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अच?छी प?रस
द्वारा प्रेषित रवि , दिसम्बर 21, 2006
"...बह?त ब?ियां प?रस?त?ति की है संजय भाई. बधाई. वाकई ?से अगर इतिहास प?ाया गया होता तो शायद ऊबाऊ न लगता बह?तों को...."

म??े भी पहली बार इतिहास में इतनी रूचि जागी. अन?यथा तो ?तिहासिक घटनाओं के वर?षों के आंकड़े ही नज़र आते थे जिन?हें याद रखने में नानी याद आती थी!
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गजनी और भार
द्वारा प्रेषित अमित पिसाव , दिसम्बर 24, 2006
बह?त अच?छी जानकारी संजोयी है !
धन?यवाद !
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महमूद गजनी
द्वारा प्रेषित डा प?रभात ट , दिसम्बर 29, 2006
सब क?छ ईशवर भरोसे छोडकर यह पंडित-प?रोहित अगर लोगों को संगठित करके जबाब देने का प?रयत?न करते तो आज कहानी अलग ही होती।
लेख का प?रस?त?तीकरण बह?त ही प?रभावशाली लगा।
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gazani
द्वारा प्रेषित pankaj बेंगानी , जनवरी 01, 2007
भारत हमेशा से ही भिरू रहा है. शायद यही नियति है
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महमूद गज़नी
द्वारा प्रेषित संजय बेंगाणी , जनवरी 01, 2007
आप सबका आभार व?यक?त करता हू?. इतिहास पर लिखने से पहले दो बार सोचा था, पर आप सबकि टिप?पणीयों से अन?य लेख लिखने का साहस मिला है. smilies/smiley.gif
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HINDU EKTA
द्वारा प्रेषित kay kay , जनवरी 01, 2007
hindu ek jut honge to itihas bhi badlega. Maa kasam ek kya 1000 mehmood gajnavi bhi kuch nahi bigad sakte hamara agar sare hindu ek ho jaye.

Zarorat hai hindu ekta ki. Hum 60 Crore hindu hai lekin hamare 60 crore dharam hai. Yadi sare hindu apne samaj, jaat paaat, dharam se upar uthke ek ho jaye to koi akraman bharat bhumi par na ho sakega
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हिन?द?ओं की स?रक?षानीति-सम?बन?धी गलतिया?
द्वारा प्रेषित ANUNAD , जनवरी 05, 2007
इतिहास की अच?छी समीक?षा ! इतिहास बह?त ही उपयोगी विषय है, केवल ?क बात का ध?यान जरूरी है कि इसका अध?ययन भी 'क?रिटिकल' ढंग' से किया जाना चाहिये। इस बात का ध?यान रखना चाहिये कि जीतने वाला सदा इतिहास लिखता है और अपने अन?रूप उसे तोड़-मरोड़ कर लिखवाया जाता है।


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Muhmad Ghajani
द्वारा प्रेषित R.M.Parekh , जनवरी 06, 2007
Best Article
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NICE
द्वारा प्रेषित SANJAY BAFNA , जनवरी 19, 2007
NICE ARTICAL,SANJAY BEGANI IS GREAT WRTTER.I AM THE FAN OF HIM.
THANKS.
SANJAY BAFNA
http://www.bafnawadi.com
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बह?त अच?छा आर?टीकल है
द्वारा प्रेषित SHUAIB , फ़रवरी 10, 2007
ये लेख मैं ने पहले उर?दू मे कहीं पढा था और अब हिन?दी मे पढ कर बह?त ख़?शी ह?ई और बह?त सारी बातों की जानकारी मिली। धन?यवाद संजय भाई
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द्वारा प्रेषित viral shah , फ़रवरी 27, 2007
vah bahut achhe
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