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बामियान के भित्तीचित्रों ने खोला इतिहास का नया अध्याय
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इतिहास
बुधवार , , 23 अप्रेल
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लगभग 7वीं शताब्दी के कलाकारों के पास भी तैलीय रंगों से चित्र बनाने की कला मौजूद थी.

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सन 2001 में अफगानिस्तान के तालेबान लडाकों ने बामियान में बुद्ध के दो ऐतिहासिक बुत तोपों के गोले बरसाकर गिरा दिए थे. उस समय पूरा विश्व इस पागलपन की वजह से हिल गया था.

आज 7 साल बात बामियान की गुफाएँ एक बार फिर चर्चा मे आई है. लेकिन इस बार यह खबर सुखद है. बामियान की गुफाओं में बनाए गए भित्तीचित्रों से एक नई खोज सामने आई है.

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि ये भित्तीचित्र तैलीय रंगो से बनाए गए हैं. इसका मतलब यह हुआ कि लगभग 7वीं शताब्दी के कलाकारों के पास भी तैलीय रंगों से चित्र बनाने की कला मौजूद थी. जबकि आजतक यही माना जाता था कि तैलीय रंगो का सबसे पहला प्रयोग 15 वीं शताब्दी मे यूरोप मे हुआ था.

यह शोध जापान के नेशनल रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ आर्ट प्रोपर्टीस, फ्रांस के सेंटर फोर रिसर्च एंड रिस्टोरेशन ऑफ फ्रेंच म्यूज़ियम, और अमरीका के गेट्टी कंजर्वेशन नामक संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से की गई.

इस शोध को मूर्त रूप देने के लिए वैज्ञानिकों ने यूरोपियन सिंक्रोटोन रेडियशन फेसिलीटी नामक अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया. वैज्ञानिकों का मत है कि बामियान की 50 गुफाओं मे से 12 में तैलीय रंगो से चित्र बनाए गए हैं. ये चित्र उन कलाकारों द्वारा बनाए गए हो सकते हैं जो सिल्क रूट से आवागमन करते थे और मध्य पूर्व और चीन के बीच व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाते थे.

राजनैतिक कारणों से आज तक बामियान की गुफाओं तक पहुँचना आसान नही था, लेकिन अब तालेबान के उखड जाने के बाद बामियान की गुफाओं के रहस्य आम जनता तक पहुँचने शुरू हो गए हैं.








 

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