गृह

 
tarakash-universe-logo
गांधी टोपी का इतिहास
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 2
बेकारअति उत्तम 
इतिहास
शुक्रवार , , 02 नवम्बर

 

Team Tarakash


 

 

 

 

 

 

 

 

topi
 
 
गांधी टोपी अमूमन खादी से बनाई जाती है और आगे और पीछे से जुड़ीं हुई होती है, तथा उसका मध्य भाग फुला हुआ होता है. इस प्रकार की टोपी के साथ महात्मा गांधी का नाम जोड़कर इसे गांधी टोपी कहा जाता है. परंतु गाँधीजी ने इस टोपी का आविष्कार नही किया था.

वास्तव में इस प्रकार की टोपी भारत के कई प्रदेशों जैसे कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, बंगाल, कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र में सदियों से पहनी जाती रही है. मध्यमवर्ग से लेकर उच्च वर्ग के लोग बिना किसी राजनैतिक हस्तक्षेप के इसे पहनते आए हैं. इस प्रकार से देखा जाए तो महात्मा गांधी के जन्म से पहले भी इसटोपी का अस्तित्व था.

लेकिन गाँधीजी ने इस टोपी की लोकप्रियता को बढाने मे उल्लेखनीय योगदान दिया था. बात उस समय की है जब मोहन दास गांधी दक्षिण अफ्रीका में वकालत करते थे. वहाँ अंग्रेजों के द्वारा किए जा रहे अत्याचारों से दुखी होकर मोहन दास गांधी ने सत्याग्रह का मार्ग अपनाया था. उस समय अंग्रेजों ने एक नियम बना रखा था कि हर भारतीय को अपनी फिंगरप्रिंट्स यानि हाथों की निशानी देनी होगी. गाँधीजी इस नियम का विरोध करने लगे और उन्होने स्वैच्छा से अपनी गिरफ्तारी दी. जेल में भी गाँधीजी को भेदभाव से दो चार होना पडा क्योंकि अंग्रेजों ने भारतीय कैदियों के लिए एक विशेष प्रकार की टोपी पहनना जरूरी कर दिया था.

आगे चलकर गाँधीजी इस टोपी को हमेशा के लिए धारण करना और प्रसारित करना शुरू कर दिया जिससे कि लोगों को अपने साथ हो रहे भेदभाव याद रहें. यही टोपी आगे चलकर गांधी टोपी के रूप में जानी गई.

orange-topikhaki-topiगाँधीजी जब भारत आए तो उन्होने यह टोपी नही बल्कि पगडी पहनी हुई थी. और उसके बाद उन्होने कभी पगडी अथवा गांधी टोपी भी नही पहनी थी, लेकिन भारतीय नेताओं और सत्याग्रहियों ने इस टोपी को आसानी से अपना लिया. कॉंग्रेस पार्टी ने इस टोपी को गाँधीजी के साथ जोडा और अपने प्रचारकों एवं स्वयंसेवकों को इसे पहनने के लिए प्रोत्साहित किया. इस प्रकार राजनैतिक कारणों से ही सही परंतु इस टोपी की पहुँच लाखों ऐसे लोगों तक हो गई जो किसी भी प्रकार की टोपी धारण नही करते थे.

topi-red kali-topiभारतीय नेता और राजनैतिक दल इस प्रकार की टोपी के अलग अलग प्रारूप इस्तेमाल करते थे. सुभाष चन्द्र बोस खाकी रंग की तो हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता काले रंग की टोपी पहनते थे.

आज भी इस टोपी की प्रासंगिकता बनी हुई है. जहाँ भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस इसे अभी भी अपनाए हुई है वहीं समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता लाल रंग की गांधी टोपी पहनते हैं.




 


टिप्पणियाँ (2)add
...
द्वारा प्रेषित Amar Singh , दिसम्बर 03, 2007
रोचक जानकारी है. धन्यवाद
report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
...
द्वारा प्रेषित तानसेन् , दिसम्बर 27, 2007
ग़ांधी टोपी के बारे मे पढ कर अच्छा लगा smilies/smiley.gif

report abuse
vote down
vote up
Votes: +0
टिप्पणी लिखें
quote
bold
italicize
underline
strike
url
image
quote
quote
smile
wink
laugh
grin
angry
sad
shocked
cool
tongue
kiss
cry
smaller | bigger

security image
दिखाये गये अक्षर लिखें


busy
 






Subscribe Newsletter

हमारे बारे में : About Us

Tarakash Universe Ideas

Copyright 2007-08 Tarakash.com, All Rights Reserved | Tarakash Universe is powered by: Chhavi Media Services