|
महत्वपूर्ण परंतु कम चर्चास्पद सिर क्रिक खाडी का विवाद |
|
इतिहास
|
|
गुरुवार , , 28 फ़रवरी |
 |
तरकश ब्यूरो
|
|
|
|
| स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान ने खाडी के प्रदेश पर अपना मालिकाना हक जताया. |
|
|
|
सिर क्रिक खाडी भारत मे गुजरात के कच्छ जिले और पाकिस्तान मे सिंध की सीमा के पास आई हुई है. यहाँ भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा को लेकर विवाद है लेकिन यह विवाद कम ही चर्चा मे आता है.
सिर की खाडी का विवाद से पुराना रिश्ता रहा है. ईस्ट इंडिया कम्पनी के सेनापति चार्ल्स नैपियर ने 1842 मे सिंध जीतने के बाद उस प्रदेश का प्रशासन मुम्बई राज्य को सौंप दिया था. इसके बाद सिंध मे अपना प्रशासन चला रही अँग्रेज़ सरकार ने सिंध और मुम्बई प्रांत के बीच के सीमा रेखा खींची थी जो कच्छ के मध्य से गुजरती थी. इसमें यह सम्पूर्ण खाडी सिंध प्रांत मे दिखाई गई थी. यानि कि कच्छ के मूल प्रदेश से उसे अलग कर सिंध मे जोड दिया गया था. दूसरी तरफ दिल्ली के अँग्रेज़ सरकार अपने अधिकृत नक्शे में सिंध और कच्छ के बीच की सीमारेखा को कच्छ के रण तक खींचने के बाद खाडी के प्रदेश के पास अटका कर दिखाती थी.
स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान ने खाडी के प्रदेश पर अपना मालिकाना हक जताया. इसके जवाब में भारत का प्रस्ताव था कि कच्छ के रण से लेकर खाडी के मुख तक की एक सीधी रेखा को सीमा रेखा मान लेना चाहिए. परंतु यह प्रस्ताव पाकिस्तान को मंजूर नही था.
इस प्रकार से सिर की खाडी का करीब 650 वर्ग किलोमीटर का प्रदेश आज भी विवादित प्रदेश है और इस प्रदेश से पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा भारतीय मछुआरों को उठा ले जाने की खबरें आती रहती है. सियाचिन के बाद सिर क्रिक भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढाने वाली एक और सीमारेखा है. लेकिन यह सियाचिन जितनी चर्चा मे नही आती है.
|
|