नई प्रविष्टियाँ

आँख के बदले आँख में पहली आँख माफ!

बैनर पर अंग्रेजी में लिखा है कि आँख के बदले आँख, सभ्यता की निशानी नहीं. कितना सही लिखा है. तो क्या शरूआती आँख फोड़ने की कल्पना की जा सकती है या उसकी छूट है?

आधुनिक मोक्ष के लिए जीरो-फिगर

आधुनिक मोक्ष के लिए जीरो-फिगर

पहला सुख स्वस्थ काया. मगर विभिन्न उद्देश्यों के लिए स्वेच्छा से काया के साथ खिलवाड़ होता रहा है. कभी काम-क्रोध पर विजय पाने के लिए तो कभी आधुनिक युग में फैशन के नाम पर…फिलहाल तो जीरो-फिगर की धूम है…

कठिन डगर इस पनघट की

एक जगह पढ़ा की एक निजी कम्पनी में काम करने वाले एक युवक को पुलिस उठा ले गई और फिर वह अपनी नौकरी से भी हाथ धो बैठा. अन्दर की बात पता नहीं मगर पढ़ कर अच्छा नहीं लगा की शक के आधार पर पुलिस पकड़ ले तो आदमी की नौकरी भी जा सकती है, [...]

नामी गिरामी लोगो के साथ भेदभाव होता है

आधुनिक युग की सोच को परिभाषित करती कोई खोज है तो वह इंटरनेट है. ऐसे में भारत विरोधी हिन्दी ब्लॉगो के आगमन के प्रति हमारे विचारों में परिपक्वता होनी ही चाहिए. शाबाना आज़मी को भेदभाव की शिकायत है….

साइट या ब्लॉग पर बिल्ला लगाएं

साइट या ब्लॉग पर बिल्ला लगाएं

15 अगस्त यानी 61 वाँ स्वतंत्रता दिवस. अपनी साइट/ब्लॉग पर यह बिल्ला जो विभिन्न आकारों में कोड सहित उपलब्ध है, लगाएं. कोड या सीधे सीधे तस्वीर ही यहाँ से उठाएं.

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मान गए उस्ताद

ऑलम्पिक का आयोजन कोई छोटी मोटी बात नहीं, अपना देश तो अभी दूर दूर तक ऐसे आयोजन की सोच भी नहीं सकता. मगर चीन को शाबासी उसकी असली उस्तादी दिखाने के लिए मिलेगी.

साड़ी पहनी तो दण्ड भरना होगा

साड़ी पहनी तो दण्ड भरना होगा

साड़ी देह से लिपटा नौ गज का जादू है, साड़ी के बारे में यह मेरी निजी राय है. मगर हमारी संस्कारवान साड़ी शायद नाइजीरिया की सरकार को अश्लील लगती है.

सचमुच आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता?

देश के किसी भी शहर में बम फटते है तब मरने वालो पर चीख-पुकार से भी पहले जो शोर सुनाई देता है वह है आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता. क्या सचमुच कोई धर्म नहीं होता?
फिर यह धर्म तब क्यों हो जाता है जब कोई अपराधी/आंतकी पुलिस के हाथों मारा जाता है या न्यायालय उसे [...]

जीवन देने वाले के नाम पर...

जीवन देने वाले के नाम पर…

अल्लाह के नाम पर एक और भयानक काम हो गया, वैसे तो भारत की कोई जगह सुरक्षित नहीं मगर मेरे शहर अहमदाबाद में ऐसा होगा यह कभी सोचा ही नहीं, वजह रही पिछले छह वर्षो की शांति. शहर ने तब से अपने आप को बहुत बदल लिया है. यहाँ तब भी आतंकी हमला नहीं [...]

नमस्ते जी

नमस्ते जी

बजार और वैश्वीकरण को नमस्कार. भारत के बढ़ते कद और उसका बजार के लिए बढ़ते मूल्य का परिणाम है की अमेरिका के ह्यूस्टन के उच्च-माध्यमिक विद्यालय में हिन्दी पढ़ाई जाएगी. इसके लिए शिक्षक अरूण प्रकाश ने आठ वर्ष के परिश्रम से 480 पन्नो की बहुरंगी पुस्तक “नमस्ते जी” तैयार की है. यह पुस्तक भारत में [...]