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समझ लो कि जुमले तो देसी होने चाहिए

प्रचार के असली खिलाड़ी ही जुमले है. जो नारा चल गया तो समझो अपना प्रचार परवान चढ़ गया. बिलकुल फिल्म के हीट गीत वाली कहानी है.

महत्व त्याग का है, कारण में क्या रखा है?

जा ले जा मैनें तुझे दान किया. परिणाम यह होता है कि भगवान के खाते में लूटमार की घटना दानपूण्य की घटना के रूप में दर्ज हो जाती है.

अब नौटंकी का नहीं व्यवहार कुशल बनने का समय है

आआपा की जीत इसमें नहीं कि उसने 28 सीटों पर कब्जा किया, जीत इसमें है कि उसे पढ़े-लिखे व संपन्न ‘खास’ लोगो ने वोट दिया.

[ आगे पढ़ें ] December 24th, 2013 | 3 टिप्पणियाँ | श्रेणी राजनीति में |

इंटरनेट-हिंदुओं का आतंक

क्या आप दुनिया के निकृष्टतम व्यक्ति को जानते है? नहीं जानते तो मैं बताता हूँ, और यह ज्ञान मुझे कल ‘आज-तक’ की साइट पर एक साथ प्रकाशित तीन तीन लेखों को पढ़ कर प्राप्त हुआ है.

[ आगे पढ़ें ] November 6th, 2013 | टिप्पणी नहीं | श्रेणी राष्ट्ररंग में |

देश के मान अपमान से ऊपर हो गया है मोदी विरोध

हमारे प्रधानमंत्री पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा फबती कसे जाने पर मोदी को क्यों जरूरत पड़ी कि वे भरी सभा में मुखर विरोध दर्ज करवाएं. वास्तव में तो यह काम भारत सरकार के प्रवक्ता को करना चाहिए था.

[ आगे पढ़ें ] September 30th, 2013 | टिप्पणी नहीं | श्रेणी राजनीति में |

सपोर्ट पर समर्थन, सहयोग व उसकी अनुकुलता

सपोर्ट) के लिए समर्थन शब्द का उपयोग होता है. यह सही लगता है अगर आप किसी का सपोर्ट यानी पक्ष ले रहे हो तो. मगर जब सोफ्टवेर का अनुवाद करते है तब कई मामलों में अर्थ-भिन्नता रहती है

[ आगे पढ़ें ] August 30th, 2013 | 5 टिप्पणियाँ | श्रेणी हिन्दी में |

मोढ़ेरा का सूर्य मन्दिर

अब यहाँ पूजा-अर्चना नहीं होती क्योंकि मन्दिर खिल्लजी द्वारा खंडित कर दिया गया था, साथ ही भगवान सूर्य की स्वर्ण प्रतिमा तथा गर्भ-गृह के खजाने को भी इस मुस्लिम शासक ने लूट लिया था.

[ आगे पढ़ें ] April 13th, 2013 | 5 टिप्पणियाँ | श्रेणी जानकारी में |

न्याय की जीत या भय की जीत?

आखिर ऐसा क्या हुआ कि सत्तारूढ कांग्रेस को अफजल की फाँसी पर निर्णय लेना पड़ा और आनन-फानन में सारी प्रक्रियाएं भी पूरी कर ली गई.

[ आगे पढ़ें ] February 9th, 2013 | 1 टिप्पणी | श्रेणी राष्ट्ररंग में |

गाँधी पर राजस्थानी में लोकगीत

नायकों पर लोकगीत देखे सुने हैं, ऐसा ही एक गीत गाँधीजी पर दिखा तो कुतुहल जगा. जिस प्रकार की इसकी रचना है सम्भवतः यह शादी के मौके पर गाने के लिए लिखा गया है.

[ आगे पढ़ें ] January 3rd, 2013 | 3 टिप्पणियाँ | श्रेणी लोकाचार में |

सन 46 वाली खादी की दुकान

धिरेन्द्रनाथ दास सिलचर आ कर खादी के प्रचार प्रसार का काम देखने लगे. 1946 में खादी बेचने के लिए दुकान खोली जो अब भी उनके बेटे स्वदेश प्रियदास द्वारा संचालित है.

[ आगे पढ़ें ] December 15th, 2012 | 4 टिप्पणियाँ | श्रेणी दुनिया भर की में |