महिलाएं जो रक्तदान नहीं कर सकती
उच्च-मध्यम वर्ग से सम्बन्ध रखती महिलाएं एक के बाद एक रक्तदान के लिए अयोग्य निकलती रही. मुझे आश्चर्य हुआ. किसी चीज की कमी इन्हे है नहीं…फिर?
उच्च-मध्यम वर्ग से सम्बन्ध रखती महिलाएं एक के बाद एक रक्तदान के लिए अयोग्य निकलती रही. मुझे आश्चर्य हुआ. किसी चीज की कमी इन्हे है नहीं…फिर?
हम जैसे मंद बुद्धि के लोग यही मानते आए हैं कि स्वतंत्रता सेनानी मात्र और मात्र देश भक्त थे. मगर मेरे सेक्युलर मित्र मौके बे मौके बेतुका सवाल उठा रहें है कि भगवा वालों ने स्वतंत्रता संग्राम में कब हिस्सा लिया था?
एसएमएस की भाषा तो ऐसी है कि हर कोई समझ ही न सके. r u rdy lol टाइप. देवनागरी का एक ऐसा ही संक्षिप्त स्वरूप प्रयोग में लिया जाता था.
तमाम तरह के नक्सलवादी, वामपंथी, मानावाधिक्कारवादी, देशद्रोंहियों से सहानुभुति रखने वाले लोग, संगठन, चैनल वाले एक मंच पर आकर अन्ना को नायक बनाया. अब अग्निवेश ने साफ किया है कि अन्ना को सबसे पहले वे गुजरात लाएंगे और भांड़ा भेड़ेंगे.
एक सरगना था. भोली भाली सूरत वाला सरगना. एक दिन उसे न्यायालय के सामने प्रस्तुत होना पड़ा.
बिना अंग्रेजी के प्रभाव वाले भारत की कल्पना करने से हम घबरा नहीं जाते? अगर जवाब हाँ है तो मान कर चलिये अंग्रेजी का प्रभाव मन की गहराईयों तक बैठा दिया गया है.
आज से जब भी पानी पीएं, कृपया कोला पीने वालों का आभार माने. अपराध बोध सा हो रहा है. हाय, मैंने अब तक कोला क्यों नहीं पीया.
कृष्ण जब बाँसुरी बजाते होगें तब सुनने वाला सुध-बुध खो देता होगा. यह कला हुई. भोंपू को फूँक फूँक कर कान फाड़ दे उसे क्या कला कह सकते है?
(सोनिया माइनो) गाँधी के बन्दर
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मैने भावनाएं व्यक्त करने के लिए दो कार्टून का केवल डिजीटली सम्पादन किया है. मूल कार्टूनिस्टों का आभार.
अद्भुत है भारत इसलिए भी कि उसका शासक ईमानदार तो है, मगर हजार बेईमानों का नेता है. ट्विटर पर भारतीय खुश है, बुद्धिजीवी खुश है, मिस्र गए हमारे पत्रकार खुश है…