भारत, संस्कृति और समलैंगिकता
कानून धार्मिक आधार पर नहीं, वैज्ञानिक सोच के आधार पर और समाज के कल्याण को ध्यान में रख कर बनाए जाते है. स्त्री देह में पुरूष या इससे उल्टा हो तो उसकी व्यक्ति की कशमकश को समझना उतना सरल नहीं है. यह भी है कि मौज मजे के लिए समलिंगी सम्बन्ध और समलैंगिता के समर्थन में भौंड़ी परेड़ का भी समर्थन नहीं किया सकता. सभ्य समाज में स्वछंद उद्दंडता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए.









































