गाँधी व्यंग्य चित्र संग्रह
गाँधी के व्यंग्य चित्र का पहला संस्करण 1970 में छपा था और दुसरा अब जा कर 2011 में छपा है. हाल ही में छपे संस्करण की छपाई व कागज बूरे है. समझ नहीं आया अब सुन्दर छपाई की तकनीक उपलब्ध होने के बाद भी इस तरह क्यों छापा गया है?
गाँधी के व्यंग्य चित्र का पहला संस्करण 1970 में छपा था और दुसरा अब जा कर 2011 में छपा है. हाल ही में छपे संस्करण की छपाई व कागज बूरे है. समझ नहीं आया अब सुन्दर छपाई की तकनीक उपलब्ध होने के बाद भी इस तरह क्यों छापा गया है?
जहाँ आपको रोजगार और बेहतर जीवन का अवसर मिला है वह प्रांत स्वप्रांत जितना ही सम्माननीय है, गर्व योग्य है.
दिल्ली में जुटी भीड़ से बोराए साथीगण सेक्युलरी बुखार से ग्रस्त हो गए. बन्दे भूल गए की वोट बैंक और भीड़ बैंक में अंतर होता है. भूल गए कि लोक आन्दोलन लोगों का होता है.
थोड़ा रंज जरूर है कि पहला स्थान न पा सके. और यह कोई नई बात नहीं पश्चिम वाले सदा पक्षपात करते ही हैं, पहले क्रम पर अपने वाले को ही रखना था.
राहुल ने मुझे निराश किया. यह कोई व्यंग्य नहीं है न ही मैं उत्तर-प्रदेश के चुनाव परिणाम के लिए ऐसा कह रहा हूँ.
बिते कुछ दिन ब्लॉगर-मिलन के हिसाब से हमारे लिए फलदायी रहे है. रतनसिंहजी व ललीतशर्मा जी के बाद कोलकाता से शिवकुमार मिश्रजी हमारे शहर पधारे.
उच्च-मध्यम वर्ग से सम्बन्ध रखती महिलाएं एक के बाद एक रक्तदान के लिए अयोग्य निकलती रही. मुझे आश्चर्य हुआ. किसी चीज की कमी इन्हे है नहीं…फिर?
हम जैसे मंद बुद्धि के लोग यही मानते आए हैं कि स्वतंत्रता सेनानी मात्र और मात्र देश भक्त थे. मगर मेरे सेक्युलर मित्र मौके बे मौके बेतुका सवाल उठा रहें है कि भगवा वालों ने स्वतंत्रता संग्राम में कब हिस्सा लिया था?
एसएमएस की भाषा तो ऐसी है कि हर कोई समझ ही न सके. r u rdy lol टाइप. देवनागरी का एक ऐसा ही संक्षिप्त स्वरूप प्रयोग में लिया जाता था.
तमाम तरह के नक्सलवादी, वामपंथी, मानावाधिक्कारवादी, देशद्रोंहियों से सहानुभुति रखने वाले लोग, संगठन, चैनल वाले एक मंच पर आकर अन्ना को नायक बनाया. अब अग्निवेश ने साफ किया है कि अन्ना को सबसे पहले वे गुजरात लाएंगे और भांड़ा भेड़ेंगे.